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डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने फिलहाल पार्टी के भीतर भड़कती बगावत की आग पर काबू पा लिया है. नाराज विधायकों की शिकायतों को जायज ठहराते हुए उन्हें शांत करने की कोशिश की है. मीटिंग के बाद फारूक ने साफ किया कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और विधायकों की जायज मांगों पर जल्द कदम उठाए जाएंगे. पिछले 10 दिनों में बागी नेताओं ने अब्दुल्ला परिवार को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है कि अब उनकी मनमानी नहीं चलेगी. या तो उनकी मांगें पूरी की जाएं, वरना विरोध के स्वर फिर से उठ खड़े होंगे.
दरअसल, पिछले 10 दिनों में बागी विधायकों ने लगातार 4 बैठकें करके और अपनी एकजुटता दिखाकर पार्टी हाईकमान को कड़ा संदेश दे दिया था. इन नेताओं ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन फारूक अब्दुल्ला को सौंपा, जिसके बाद फारूक को नाराज विधायकों के साथ 3 घंटे तक लंबी चर्चा करनी पड़ी.
मीटिंग के बाद फारूक अब्दुल्ला ने मीडिया के सामने आकर पार्टी में किसी भी तरह की टूट की खबरों को सिरे से खारिज तो कर दिया, लेकिन वहां मौजूद नेताओं के चेहरे कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे. खासकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के, क्योंकि बागी गुट सीधे तौर पर उनकी नीतियों और काम करने के तरीके से नाराज था.
#WATCH | Srinagar: Jammu and Kashmir National Conference president Farooq Abdullah says, "The baseless reports being spread that the National Conference is divided are completely false. This organisation is united, and those who think they can break this organisation should understand that it has never been broken and will never be broken. We have spoken to them. Their issues were genuine and have been given due consideration. Everyone was heard, and some steps will be taken soon, while others will be taken gradually. We will strengthen the party and the government so that people's difficulties can be addressed. Alongside this, our fight for the restoration of Statehood, as well as our fight for Articles 370 and 35A, will continue, and it will be taken to its final conclusion."
— ANI (@ANI) November 6, 2026
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'यह बेबुनियाद अफवाह पूरी तरह गलत है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस टूट गई है. पार्टी पूरी तरह एकजुट है, जो लोग सोचते हैं कि वे इस पार्टी को तोड़ सकते हैं, उन्हें बता दूं कि यह न तो कभी टूटी है और न ही इंशाअल्लाह कभी टूटेगी. हमने उनसे बातचीत की है, उनकी चिंताएं जायज थीं. इन मुद्दों पर गहराई से विचार किया गया है और सबकी बात सुनी गई है. इंशाअल्लाह, जैसा कि उन्होंने संकेत दिया है, कुछ कदम तुरंत उठाए जाएंगे, जबकि बाकी कदम धीरे-धीरे लागू किए जाएंगे.'
फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'हम पार्टी और सरकार दोनों को मजबूत करेंगे ताकि लोगों की मुश्किलें कम हो सकें. इसके अलावा, राज्य का दर्जा (स्टेटहुड) बहाल करने के लिए हमारा संघर्ष और अनुच्छेद 370 तथा 35A को लेकर हमारी लड़ाई जारी रहेगी. इंशाअल्लाह, हम इन प्रयासों को उनके सफल अंजाम तक पहुंचाएंगे.'
बिजबेहरा के विधायक और बागी गुट के सदस्य, डॉ. बशीर विरी ने पुष्टि की कि बैठक सकारात्मक रही. डॉ. विरी ने ज़ी न्यूज़ से कहा, 'पार्टी अध्यक्ष ने धैर्यपूर्वक हमारी बातें सुनीं और हमारी मांगों पर ध्यान दिया. वे हमारे सुझावों को लागू करने के लिए सहमत हो गए हैं, क्योंकि हम सभी पार्टी को मजबूत बनाना चाहते हैं और फारूक साहब भी इस बात से सहमत हैं.'
हालांकि, विधायकों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण होंगे. वे बारीकी से देखेंगे कि नेतृत्व उनकी मांगों पर क्या कदम उठाता है. इस गुट के करीबी सूत्रों ने बताया कि फारूक के हस्तक्षेप से भले ही कुछ समय के लिए राहत मिली हो, लेकिन अगर वादे पूरे नहीं हुए, तो असंतोष की आवाजें फिर से उठ सकती हैं.
सत्ता में वापसी के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी अंदरूनी चुनौती बन गई है, जिसे सीधे तौर पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के काम करने के तरीके के खिलाफ बगावत माना जा रहा है. नाराज विधायकों ने साफ मांग रखी है कि सीएम के सलाहकारों को तुरंत हटाया जाए, सीनियर नेताओं को सरकार व पार्टी में सम्मान मिले, दागी मंत्रियों की छुट्टी हो और चुनाव में जनता से किए गए वादों को ईमानदारी से पूरा किया जाए.