राहुल गांधी के फॉर्म-6 पर दावे का EC ने कर दिया फैक्ट चेक, SC का आदेश शेयर कर कहा- गुमराह कर रहे!
राहुल गांधी के वोटर रजिस्ट्रेशन फॉर्म-6 को लेकर किए गए दावे पर चुनाव आयोग ने फैक्ट चेक जारी किया है. आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश साझा करते हुए स्पष्ट किया कि दावों से जनता को गुमराह किया जा रहा है.
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी के के उन आरोपों पर जवाब दिया है जिसमें राहुल गांधी ने 30 सितंबर को चुनाव आयोग पर आरोप लगाया था कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने गैर कानूनी तरीके से फॉर्म-6 में बदलाव किया. राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए चुनाव आयोग पर ये भी आरोप लगाये थे कि CEC ज्ञानेश कुमार ने बीजेपी को सियासी लाभ पहुंचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया है.
अब चुनाव आयोग ने राहुल गांधी की उस पोस्ट को अपने एक्स प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए फैक्ट चेक के बाद लिखा कि राहुल गांधी की ये पोस्ट पूरी तरह से भ्रामक पोस्ट है. राहुल गांधी का ये बयान लोगों को गुमराह कर रहा है. इसके साथ ही कैप्शन में लिखा कि बिहार में SIR के लिए 24 जून 2025 को जारी किया गया आदेश आयोग की सर्वसम्मत मंजूरी से जारी किया गया था. भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट ने 27 मई 2026 के अपने फ़ैसले में इस आदेश को सही ठहराया है.
अपनी पोस्ट में राहुल ने CEC पर क्या आरोप लगाए?
चुनाव आयोग ने राहुल गांधी की पोस्ट का जवाब देते हुए अपने सोशल मीडिया पर दूसरा प्वाइंट लिखा, 'ECI ने 26 सितंबर 2026 के अपने प्रेस नोट नंबर 120 के पॉइंट 1(iii) में कहा है कि, 'SIR के लिए फॉर्म 6 के साथ लगे घोषणा-पत्र को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है.' इसके पहले राहुल गांधी ने 30 सितंबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाते हुए अपने एक्स पर लिखा था, 'अब यह बात बिना किसी शक के साबित हो चुकी है कि ज्ञानेश कुमार ने गैर-कानूनी और एकतरफा तरीके से 'फॉर्म 6' में बदलाव किया.'
राहुल गांधी ने CEC की भूमिका पर खड़े किए सवाल
यह इस बात का एक और सबूत है कि उन्होंने BJP की मदद करने के लिए अपने पद का गलत इस्तेमाल किया. लोकतंत्र पर हुए इस आपराधिक हमले में शामिल उन्हें और बाकी सभी लोगों को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा.' राहुल गांधी ने इसके पहले भी अपनी पोस्ट में लिखा था ऑनलाइन फॉर्म 6 में गैर-कानूनी तरीके से बदलाव किया गया - जैसा कि EC के अपने कमिश्नरों ने दर्ज किया है. ECI में किसने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को वह बदलाव करने का आदेश दिया? TCS में किसने इसे मंजूरी दी? और क्या ऐसा करने के लिए उन पर दबाव डाला गया था?
क्या है फॉर्म - 6?
भारतीय निर्वाचन आयोग का फॉर्म 6 हर नए मतदाता के लिए वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने का आधिकारिक जरिया है. अगर आपकी उम्र 18 साल या उससे अधिक हो चुकी है और आप पहली बार वोट बनवाने जा रहे हैं, तो यह फॉर्म आपके लिए ही है. इसके अलावा, अगर आप किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र से नए पते पर शिफ्ट हुए हैं, तब भी अपना नाम नई वोटर लिस्ट में जुड़वाने के लिए आपको यही फॉर्म भरना पड़ता है. इसे आसान भाषा में नए वोटरों के लिए लोकतंत्र का 'एंट्री पास' कहा जा सकता है. फॉर्म 6 भरते समय आवेदक को अपनी निजी जानकारी, जैसे कि नाम, माता-पिता का नाम, पते का विवरण, उम्र का प्रमाण पत्र और भारत का नागरिक होने से जुड़ी कुछ जरूरी घोषणाएं जमा करनी होती हैं.