महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे के भारत में सत्ता रिजीम चेंज का समर्थन करने वाले बयान पर पलटवार किया. उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे पहले अपनी ही पार्टी में हुए रिजीम चेंज को नहीं रोक पाए, ऐसे में देश में बदलाव की बात करना उनके लिए कितना उचित है.
नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान फडणवीस ने कहा कि जब शिवसेना ने हिंदुत्व और हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा से दूरी बनाई, तब पार्टी में ऐसी उथल-पुथल मची कि बालासाहेब के सिद्धांतों पर चलने वाले नेताओं ने अलग होकर असली शिवसेना बनाई.
फडणवीस का इशारा जून 2022 में शिवसेना में हुई टूट की ओर था. उस समय एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में कई विधायकों ने उद्धव ठाकरे से अलग होकर अपना गुट बना लिया था. इसके बाद पार्टी दो धड़ों में बंट गई. एक गुट उद्धव ठाकरे के पास रहा, जबकि दूसरे का नेतृत्व एकनाथ शिंदे ने किया. इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला.
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में सरकार बदलने का रास्ता संविधान और चुनाव से होकर गुजरता है, न कि सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करके. उन्होंने विपक्षी नेताओं से संविधान के खिलाफ लड़ाई बंद करने की अपील की. फडणवीस ने कहा कि देश से जुड़े फैसले संसद और संविधान के दायरे में लिए जाते हैं. लोकतंत्र में सरकार चुनने का अधिकार जनता के पास है और यह फैसला चुनाव के जरिए होता है.
फडणवीस ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार 2029 में भी सत्ता में लौटेगी. फडणवीस ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उसे सरकार बदलनी है, तो चुनाव में उतरकर जनता का भरोसा जीतना होगा. उन्होंने नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान का जिक्र करते हुए कहा कि इन देशों में हुए घटनाक्रम की तरह भारत में संविधान की अनदेखी करके सत्ता परिवर्तन का सपना देखने वालों को सफलता नहीं मिलेगी.
फडणवीस का यह बयान उद्धव ठाकरे के उस बयान के एक दिन बाद आया, जिसमें उन्होंने भारत में सत्ता परिवर्तन की मांग करने वाले कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं का समर्थन किया था. उद्धव ठाकरे ने कहा था कि अगर लोगों से चुनाव और विरोध प्रदर्शन के जरिए अपनी बात रखने का अधिकार छीन लिया जाता है, तो उनके पास सरकार बदलने के लिए खड़े होने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा. उनके इस बयान ने महाराष्ट्र से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक सत्ता परिवर्तन को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
यह राजनीतिक बयानबाजी ऐसे समय में तेज हुई है, जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं. इन प्रदर्शनों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं. विपक्षी नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं के कुछ बयानों में सत्ता परिवर्तन का मुद्दा उठाए जाने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है. अब इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते नजर आ रहे हैं.