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DNA मित्रों, मुख्य चुनाव आयुक्त के मुद्दे पर दिल्ली में आंदोलन को लेकर टकराव का दौर जारी है. आज असली तस्वीर सामने आएगी कि इस आंदोलन का दिल्ली पर कितना असर पड़ा है. लेकिन आंदोलन से पहले दिल्ली के बाजार सहमे हुए हैं और व्यापारी परेशान हैं. इसकी वजह ये है कि CJP का आंदोलन ऐसे समय में शुरू होने जा रहा है, जब त्योहारों का सीजन अपने पीक पर पहुंचने वाला है.
रविवार से नवरात्र की शुरुआत होने वाली है. नवरात्र के बाद करवा चौथ, धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहार आने वाले हैं. लेकिन इस दौरान अगर रास्ते बंद रहेंगे और तनाव की वजह से दिल्ली के बाजार बंद रहेंगे तो व्यापारी क्या करेंगे. यही वजह है कि व्यापारियों के एक संगठन ने सरकार से इस आंदोलन को लेकर गुहार लगाई है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि दिवाली तक दिल्ली में धरना-प्रदर्शन पर रोक लगाई जाए.
CTI ने जिन तीन दिनों का हवाला दिया है, उस दौरान सेंट्रल दिल्ली में कांग्रेस ने लगातार धरना-प्रदर्शन किया. तीनों दिन दोपहर से लेकर शाम के समय दिल्ली की कई मुख्य सड़कें बंद रहीं. इसकी वजह से सामान्य दिनों की तुलना में केवल 30% लोग ख़रीदारी करने के लिए बाजार पहुंचे. जबकि उस दौरान वैसी सुरक्षा व्यवस्था भी नहीं थी, जैसी कल के लिए की गई है. अर्थव्यवस्था किसी देश की प्रगति की नींव होती है.
आचार्य चाणक्य के मुताबिक, सुख का मूल धर्म है और धर्म का मूल अर्थ है. यानी असली प्रसन्नता सही आचरण और न्यायपूर्ण व्यवहार से आती है और सही आचरण तभी टिक सकता है, जब लोगों के पास पर्याप्त आर्थिक साधन और समृद्धि हो. लेकिन इस आंदोलन से दिल्ली का अर्थतंत्र प्रभावित होने की आशंका है. इसकी वजह ये है कि आंदोलन का समय वो है, जब बाजार में सबसे ज्यादा खरीदारी होती है. कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के अनुमानों के मुताबिक, दुर्गा पूजा से लेकर दिवाली तक लगभग एक महीने के दौरान ही देश के बाजारों में 6 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होने का अनुमान है. इसमें केवल दिल्ली का हिस्सा 75,000 करोड़ रुपये के करीब है.
दिल्ली के करीब 15 लाख व्यापारियों की कमाई त्योहारों की बिक्री पर निर्भर है. त्योहारों के सीजन में कपड़े, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और घरेलू सामान की खरीदारी बढ़ जाती है. दिल्ली के बाजारों में स्थानीय ग्राहकों के अलावा आसपास के शहरों और दूसरे राज्यों से भी लोग खरीदारी के लिए आते हैं. लेकिन जब दिल्ली का बॉर्डर सील होगा, जब दिल्ली के लिए आने वाली ट्रेन रद्द होगी, जब दिल्ली के रास्ते बंद होंगे और मेट्रो के स्टेशन बंद होंगे तो लोग खरीदारी के लिए कैसे निकलेंगे.
आज के आंदोलन को देखते हुए कनॉट प्लेस के आस-पास की सभी दुकानें बंद रहेंगी. नई दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन ने ऐहतियाती क़दम उठाते हुए कनॉट प्लेस की सभी दुकानों, रेस्टोरेंट और दफ्तरों को बंद रखने की सलाह दी है. इसके अलावा चांदनी चौक में स्थित भागीरथ पैलेस को भी बंद रखने की घोषणा की गई है. ये बिजली का बड़ा बाज़ार है.
मित्रों, दिल्ली में इस तरह के आंदोलन लगातार हो रहे हैं. महज ढाई महीने पहले ही पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर CJP का आंदोलन खत्म हुआ था. इस दौरान कनॉट प्लेस और आस-पास की दुकानों और रेस्टोरेंट को काफ़ी नुकसान उठाना पड़ा था. आंदोलन के हिंसक होने के बाद दुकानें शाम को ही बंद हो जाती थीं. व्यापारियों ने अपनी बिक्री 65-70% गिरने की बात कही थी. 2 दिनों में ही कनॉट प्लेस के व्यापारियों को 130 करोड़ से लेकर 210 करोड़ के नुकसान का अनुमान है. जंतर-मंतर के आसपास इंटरनेट बंद होने से UPI, फूड डिलीवरी और टैक्सी बुकिंग जैसे जरूरी काम पर भी असर पड़ता था.
एक रिपोर्ट के मुताबिक जुलाई के आंदोलन के दौरान छोटे व्यापारियों और टैक्सी ड्राइवर की आमदनी में भारी गिरावट दर्ज की गई थी. दिल्ली भारत की राजधानी होने के साथ-साथ आंदोलनों की भी राजधानी है. हर किसी को लगता है कि आंदोलन तभी सफल होगा जब वो दिल्ली में हो. यही वजह है कि हर साल छोटे से लेकर बड़े तक दिल्ली में हजारों आंदोलन होते हैं. देश के कोने-कोने से प्रदर्शनकारी धरना देने के लिए दिल्ली तक आते हैं. पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक
इस संख्या का विश्लेषण करने से पता चलता है कि दिल्ली में रोज 16 से लेकर 30 प्रदर्शन होते हैं. यानी 2022 से 2024 तक आते-आते धरना-प्रदर्शनों की संख्या 86% बढ़ गई. हालांकि इनमें से ज्यादातर प्रदर्शन छोटे स्तर के होते हैं जिनके बारे में अधिकांश लोगों को पता भी नहीं चल पाता. लेकिन जो आंदोलन बड़े स्तर के होते हैं, उसकी क़ीमत दिल्ली के आम लोगों और व्यापारियों को चुकानी पड़ती है. आम लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ता है, ट्रैफिक में लंबा समय बिताना पड़ता है. वहीं व्यापारियों को इसका आर्थिक नुक़सान झेलना पड़ता है.
आपको जानना चाहिए कि दिल्ली में किस बड़े आंदोलन की वजह से व्यापारियों को कितना नुकसान हुआ.
मित्रों, आंदोलन से नुकसान केवल बड़े व्यापारियों को नहीं होता. इसकी वजह से रेहड़ी-पटरी वाले, टैक्सी-ऑटो ड्राइवर, रेस्टोरेंट के कर्मचारी, दुकानों के सेल्समैन और फूड डिलीवरी पार्टनर को भी अपनी उस दिन की आमदनी गंवानी पड़ती है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती है. एक पहलू सुरक्षा का भी है. दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के लगभग 40,000 जवानों को इस आंदोलन के दौरान तैनात किया गया है. इन्हें किसी ज़रूरी काम से हटाकर इस काम में लगाया गया होगा. यानी इससे पुलिस और अर्धसैनिक बलों के नियमित काम पर भी असर पड़ेगा. यानी आंदोलन की कीमत हर किसी को चुकानी होगी.
मित्रों, अब आपको जानना चाहिए..जिस ज्ञानेश कुमार के नाम पर दिल्ली में प्रदर्शन हो रहा है. वो क्या कर रहे हैं? मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कांग्रेस और इंडिया गठबंधन लगातार प्रोटेस्ट कर रही है. सीजेपी दिल्ली की सड़क पर उतरने वाली है. लेकिन इस बीच ज्ञानेश कुमार क्या कर रहे हैं? ये भी आप जानना चाहेंगे. तो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार दिल्ली में ही हैं. वह रोज की तरह अपने दफ्तर जा रहे हैं. आज भी वह दफ्तर पहुंचे थे. शाम को दफ्तर से निकलकर अपने घर गए. हमारे पास जो जानकारी है उसके मुताबिक, प्रदर्शन को देखते हुए उनके आवास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. साथ ही, ज्ञानेश कुमार की व्यक्तिगत सुरक्षा भी बढ़ाई गई है.