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चक्रवात अर्नब भले ही भारत के समुद्र तटों से टकराकर चला गया, लेकिन भारी तबाही के निशान और बुरी यादें छोड़ गया है. अब तूफान से प्रभावित राज्यों के सामने जनजीवन को पटरी पर लाने की बड़ी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं. आंध्र में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. यहां अब भी बिजली आपूर्ति पहले की तरह पूरी तरह बहाल नहीं हो पाई है. सड़कें टूटने से ट्रैफिक व्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है. चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने प्रदेश कों हुए नुकसान का ब्योरा केंद्र को सौंप दिया है. अब केंद्रीय टीमें हालात का जायजा लेंगी और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाई जाएगी.
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने गुरुवार को बताया कि चक्रवात अर्नब से आंध्र प्रदेश में 7 लोगों की मौत हो गई और प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार 4,600 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण के बाद उन्होंने कहा कि चक्रवात से हुए नुकसान का अनुमान 4,600 करोड़ रुपए है, लेकिन विस्तृत आकलन के बाद यह आंकड़ा बढ़ सकता है. मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने चक्रवात अर्नब से हुए नुकसान के बारे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बात की, उन्हें स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी और केंद्र को नुकसान की प्रारंभिक रिपोर्ट भी सौंपी. आज भी कई टीमें नुकसान का जायजा लेने संबंधित क्षेत्रों में रवाना हो चुकी हैं.
इससे पहले मुख्यमंत्री ने बीआर अंबेडकर कोनसीमा जिले के चक्रवात प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया. गचकयालापोरा गांव में राहत केंद्रों का निरीक्षण करके उन्होंने चक्रवात पीड़ितों से संवेदना जताते हुए उन्हें तत्काल मदद पहुंचाने का भरोसा दिलाया.
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक्स पर लिखा, ओडिशा और आंध्र में तूफान अर्नब की वजह से मारे गए लोगों के परिजनों से मेरी संवेदनाएं हैं. मैं भगवान से प्रार्थना करती हूं कि सभी लोग सुरक्षित रहें और सरकार पीड़ितों को फौरन राहत पहुंचाए.
My thoughts are with the people of Andhra Pradesh facing the devastation caused by Cyclone Arnab and those in Odisha affected by heavy rainfall and flooding. I pray for everyone’s safety and urge Congress workers to extend every possible help to those affected and support relief and rescue efforts.
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) October 30, 2026
नायडू ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करके वास्तविक स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने बताया कि प्रत्येक क्षतिग्रस्त नारियल के पेड़ और प्रत्येक क्षतिग्रस्त ताड़ के पेड़ के लिए 1,500 रुपए का मुआवजा दिया जाएगा.
राहत शिविरों से लौटने वाले परिवारों को 25 किलो चावल, आवश्यक वस्तुओं का एक पैकेट और तत्काल खर्चों के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी.
मुख्यमंत्री नायडू ने कहा कि किसान पहले से ही फसल बीमा योजना के अंतर्गत आते हैं. चक्रवात के कारण फसल की पैदावार कम होने पर उन्हें मुआवजा मिलेगा. उन्होंने कहा कि नुकसान का आकलन करने के बाद कृषि और बागवानी फसलों के लिए मुआवजा जल्द से जल्द लाभार्थियों के खातों में जमा कर दिया जाएगा.
नायडू ने कहा कि आंध्र प्रदेश ने अतीत में कई चक्रवातों का सामना किया है. तीस साल पहले, 6 नवंबर को, एक भयंकर चक्रवात ने इस क्षेत्र में भारी तबाही मचाई थी. हुदहुद, तितली, मोंथा और अर्नब ने भी राज्य में नुकसान पहुंचाया है. करीब 70 साल पहले, दिविसीमा चक्रवात ने हजारों लोगों की जान ले ली थी.
उन्होंने कहा, 'पिछली आपदाओं से सबक लेते हुए हमने एहतियाती उपाय लागू किए और जानमाल के नुकसान को काफी हद तक कम किया. तमाम सावधानियों के बावजूद, दुर्भाग्य से सात लोगों की जान चली गई, जो बेहद दुखद है. सरकारी तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा गया था. जिला कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों और अन्य अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया था.'
कोनसीमा और पश्चिम गोदावरी जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए है. रास्ता बहाल करने के लिए पेड़ों को हटाया जा रहा है. श्रीकाकुलम से कृष्णा जिले तक रियल टाइम गवर्नेंस सोसाइटी राहत कार्यों की निगरानी और क्वार्डिनेशन कर रही है. अकेले कोनसीमा में करीब 8,000 बिजली के खंभे उखड़ गए हैं. कई दूसरे इलाकों में भी सैकड़ों बिजली के खंभे गिर चुके हैं. सभी को मिशन मोड में बदलकर बिजली सप्लाई बहाल कराने के लिए काम जारी है.