रैली पर रार: 'राजनीति के बाजार में व्यापारियों की मोहब्बत की दुकानें न करें बंद', राहुल गांधी से कारोबारियों की अपील
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी CTI ने दिल्ली के रामलीला मैदान के आसपास के 20 बाजारों में एक पोस्टर अभियान लॉन्च किया है. इसे लेकर CTI के चेयरमैन गोयल ने कहा, 'ये पोस्टर राहुल गांधी के लिए आईना है. आप 'भारत जोड़ो यात्रा' में मोहब्बत की दुकान खोलने की बात करते हैं, लेकिन दिल्ली में हमारी 300 साल पुरानी मोहब्बत की दुकानें रैली के कारण बंद करवा रहे हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आह्वान पर एक नवंबर को आयोजित 'दिल्ली चलो' रैली को लेकर कारोबारियों के मन में बैठा डर बढ़ता जा रहा है. अनहोनी की आशंका के बीच चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री यानी सीटीआई ने दिल्ली के रामलीला मैदान के आसपास के 20 बाजारों में एक पोस्टर अभियान लॉन्च किया है. इन व्यापारियों का यह भी कहना है कि कारोबार और अपने कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखने के लिए उनसे जो कुछ करते बन पड़ेगा, उससे वो पीछे नहीं हटेंगे. अपनी इसी मुहिम में सीटीआई ने जो पोस्टर लॉन्च किया है, उसमें लिखा है- 'राजनीति के बाजार में मोहब्बत की दुकाने बंद मत कीजिए.'
इस पोस्टर अभियान के लिए जरिए कारोबारी संगठन से जुड़े लोगों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपील की है कि वो ये सुनिश्चित करें कि 1 नवंबर, 2026 की प्रस्तावित प्रस्तावित रैली से दीपावली के सीजन के कारोबार पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.
इन बाजारों में ताले लगने का खतरा!
सीटीआई नेता गोयल ने कहा, 'चांदनी चौक की परांठे वाली दुकान, खारी बावली के मसाले, सदर की चूड़ी-बिंदी, चांदनी चौक का लहंगा, दरियागंज का एसी, चावड़ी बाजार की सेनिटरी, करोल बाग की मशहूर कुल्फी, ये सब मोहब्बत की दुकानें ही तो हैं. जहां की हर एक दुकान से 10 से 20 लोगों का परिवार चलता है. रामलीला मैदान के चारों तरफ बाजार हैं. 10 लाख लोग और 20 हजार गाड़ियां आएंगी तो इन्हीं 20 बाजारों में ताले लगेंगे.'
75 लाख लोगों के हित से जुड़ी अपील
आपको बताते चलें कि ये सारे पोस्टर रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले 20 बड़े थोक बाजारों में लगने हैं. सीटीआई के मुताबिक रैली से 20 लाख व्यापारियों के काम-काज पर असर पड़ सकता है. एक अनुमान के मुताबिक इस रैली से दिल्ली के कारोबारियों का करीब 10 से 12 हजार करोड़ रुपये का कारोबार खतरे में पड़ने की आशंका है. कारोबारी संगठन ने अनुमान लगाया है कि अगर दीवाली के पीक सीजन पर उनका नुकसान हुआ तो करीब 75 लाख लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ सकता है.
एक नवंबर क्यों खास?
6 नवंबर को धनतेरस है और 8 नवंबर को दीपावली है. नौकरी पेशा लोगों की सैलरी आने की वजह से बाद 1 नवंबर का दिन कारोबारियों के लिए काफी अहम माना जा रहा है. उन्हें लगता है कि अगर 1 नवंबर को 10 लाख लोग और 15 से 20 हजार गाड़ियां अगर सेंट्रल दिल्ली में आ जाएंगी तो रामलीला मैदान के आस-पास के 20 बाजारों में करोड़ों रुपये का कारोबार ठप पड़ सकता है.'
'सोनिया गांधी ने नहीं सुनी'
इससे पहले कारोबारी संगठन ने कांग्रेस पार्टी आलाकमान सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मामले में दखल देकर दीपावली के बाद इस रैली को आयोजित करवाने की अपील की थी. कारोबारियों ने रैली का आयोजन रामलीला मैदान के बजाए बुराड़ी के मैदान में रैली कराने का आग्रह किया था, जहां लाखों की भीड़ जुटाने के लिए पर्याप्त इंतजाम है.