SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

न गोलियों ने छीनी जान, न ऑपरेशन में कोई शहादत: CRPF ने 47 साल बाद हासिल की ऐसी उपलब्धि, देश कर रहा गर्व

सीआरपीएफ ने ऑपरेशनल सुरक्षा के मोर्चे पर 47 साल बाद एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. 30 अक्टूबर 2025 के बाद पूरे 12 महीनों तक किसी भी अभियान में किसी भी जवान की मौत नहीं हुई. सीआरपीएफ के चीफ ने इस उपलब्धि का राज भी बताया है. हालांकि, इसी फोर्स में जवानों की आत्महत्या के बढ़ते आंकड़ों ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है.

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Nov 03, 2026, 06:09 AM IST | Updated: Nov 03, 2026, 06:39 AM IST
Image Credit: (CRPF)
Join

देश की सेना और सुरक्षाबल दुश्मनों के हर नापाक इरादों को नाकाम करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं. इस कड़ी में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शौर्य और काबिलियत की चर्चा जोर-शोर ने हो रही है. सीआरपीएफ (CRPF) के नाम ऐसा रिकॉर्ड दर्ज हुआ है, जिसे एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. दरअसल सीआरपीएफ ने लगातार 12 महीने यानी एक साल का ऐसा साइकिल पूरा किया है, जब किसी भी जवान की ऑपरेशन के दौरान मौत नहीं हुई. सीआरपीएफ के इतिहास में 47 साल बाद ऐसा हुआ है. सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह ने इस उपलब्धि पर अपनी पूरी फोर्स के जवानों और अधिकारियों को बधाई दी है. 

उन्होंने बताया कि सीआरपीएफ में आखिरी ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी. इससे पहले जनवरी 1979 में ऐसा दौर खत्म हुआ था, जब इतने लंबे समय तक ऑपरेशन के दौरान किसी जवान की जान नहीं गई थी.

जीपी सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस उपलब्धि की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'सीआरपीएफ के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. सीआरपीएफ ने लगातार 12 महीने यानी एक साल बिना किसी ऑपरेशनल मौत के पूरे किए हैं. आखिरी ऑपरेशनल मौत 30 अक्टूबर 2025 को हुई थी. इससे पहले जनवरी 1979 में इस तरह की उपलब्धि हासिल हुई थी.

चीफ का बयान

उन्होंने ये भी कहा, 'इस उपलब्धि को हासिल करने में कई चीजों ने बड़ी भूमिका निभाई है, जैसे कि अत्याधुनिक उपकरण, बेहतर ट्रेनिंग और रणनीतिक योजना बनाकर काम करने से ये उपलब्धि हासिल हुई. हमने हर घटना के बाद अपने एक्शन प्लान को कैसे पूरा करेंगे, उस पर अतिरिक्त ध्यान दिया. घायल जवानों को तुरंत बेहतर मेडिकल सुविधाओं पहुंचाने से लेकर हर मौके पर हम अलर्ट रहे. ये उपलब्धि इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि इस दौरान हमारे जवान सभी प्रमुख ऑपरेशनल क्षेत्रों में तैनात रहे. सीआरपीएफ, देश को सभी नागरिकों के लिए शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. 

सिंह ने इस कामयाबी का श्रेय बेहतर उपकरणों, प्रशिक्षण और ऑपरेशन की बेहतर योजना को दिया. उनके मुताबिक, किसी घटना के बाद तुरंत कार्रवाई करना और घायल जवानों को प्राथमिक, द्वितीयक तथा उच्च स्तरीय चिकित्सा केंद्रों तक तेजी से पहुंचाना भी इसमें अहम साबित हुआ है.

सीआरपीएफ प्रमुख ने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि बल के जवान देश के सभी प्रमुख ऑपरेशनल इलाकों में तैनात हैं और पूरी सक्रियता के साथ अभियान चला रहे हैं. इन अभियानों में महत्वपूर्ण सफलताएं भी मिली हैं.

उन्होंने ये भी कहा कि CRPF देश को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता के साथ काम करता रहेगा.

जवानों की आत्महत्या के मामले चिंता के विषय

हालांकि, CRPF की इस उपलब्धि के बीच जवानों की आत्महत्या के बढ़ते मामले एक गंभीर चुनौती बने हुए हैं. ऑपरेशन के दौरान होने वाली मौतों से आत्महत्या के मामलों को अलग श्रेणी में दर्ज किया जाता है.

अगस्त में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मीडिया में आई एक रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था. इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि जनवरी से मई 2026 के बीच पांच महीने से भी कम समय में CRPF के 19 जवानों ने आत्महत्या कर ली.

आयोग ने कहा था कि यदि ये खबरें सही हैं, तो देश के सबसे बड़े केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल में तैनात जवानों के जीवन के अधिकार को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं. NHRC ने इस मामले में केंद्रीय गृह सचिव और CRPF के महानिदेशक को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी.

11 अगस्त को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में CRPF के कुल 281 जवानों ने आत्महत्या की. इनमें करीब 216 जवान उस समय ड्यूटी पर तैनात थे.

साल दर साल आत्महत्या के मामले

 2021: 57 जवान
 2022: 43 जवान
 2023: 57 जवान
 2024: 46 जवान
 2025: 59 जवान

इन आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में आत्महत्या के 59 मामले दर्ज किए गए, जो पांच साल की अवधि में सबसे ज्यादा थे.

(डिस्क्लेमर: जीवन अनमोल है. इसे व्यर्थ न गंवाएं. आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं है. अगर आप मानसिक तनाव, अवसाद या किसी तरह की परेशानी से जूझ रहे हैं, तो अपने परिवार, दोस्तों या किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें. जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सक और एक्सपर्ट की मदद लें. आपकी जिंदगी और आपका मानसिक स्वास्थ्य बेहद महत्वपूर्ण है. इन नंबरों पर फोन करें- 24x7 Toll-Free Mental Health Rehabilitation Helpline किरण -1800-599-0019. फोन करें- टेली मानस टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 14416 या 1-800-891-4416)

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES