Campaign against illegal madrasas in West Bengal: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु सरकार ने फर्जी और अवैध मदरसों के खिलाफ एक्शन लेना शुरू किया तो मौलाना साजिद रशीदी जैसे लोग भड़क गए और डायरेक्ट सीएम शुभेंदु को चैलेंज करने लगे. वहीं बंगाल सरकार ने साफ कर दिया है कि ये तो महज शुरुआत है और पूरी पिक्चर अभी बाकी है.
असल में बंगाल में अवैध और फर्जी मदरसों के खिलाफ सरकार ने जब से एक्शन लेना शुरू किया है, वहां पर हंगामा खड़ा हो गया है. मौलाना इसके विरोध में खुलकर खड़े हो गए. पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक और मदरसा शिक्षा विभाग की तरफ से पहले चरण में कोलकाता समेत राज्य के सभी 22 जिलों में सर्वे कराया गया. इस सर्वे में मैनेजमेंट, छात्रों के एडमिशन, फंडिग के स्रोत और रजिस्ट्रेशन की जांच की गई. जांच के जो आंकड़े सामने आए उसने प्रशासनिक तंत्र को चौंका दिया.
कुकुरमुत्ते की तरह उग आए मदरसों में कोई इंतजाम नहीं मिला. जाहिर है एक्शन होना था और वो हुआ भी. सर्वे में 2396 गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की पहचान की गई. जिनमें से 252 मदरसों को तत्काल प्रभाव से संचालन बंद करने का आदेश दिया गया. जबकि करीब 100 मदरसों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.
बंगाल में अवैध मदरसों पर कार्रवाई हुई तो मौलाना बौखला गए. ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी ने तो शुभेंदु सरकार को खुली चुनौती दे डाली. बंगाल की सरकार का तर्क है कि मदरसों से बैर नहीं. लेकिन अवैध रूप से चलें, फर्जीवाड़ा हो, अव्यवस्था हो तो ऐसे मदरसों की खैर नहीं.
बंद किए जाने वाले मदरसों में सबसे अधिक मालदा जिले से लगभग 44-45 हैं. इसके बाद उत्तर दिनाजपुर में 37, दक्षिण 24 परगना में 32, मुर्शिदाबाद में 25 और नदिया में लगभग 25 मदरसे शामिल हैं. असली हड़कंप तो उन बाकी बचे 2,100 से ज्यादा गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों में मचा है, जो अभी भी रडार पर हैं.
बात पते की: रशीदी की शुभेंदु को '2.5% वाली' चुनौती ! — Zee News (@ZeeNews) September 14, 2026
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, शुरुआती जांच में यह बात भी सामने आई है कि इनमें से कई संस्थानों में न तो बुनियादी शैक्षणिक ढांचे का पालन किया जा रहा था और न ही बच्चों की सुरक्षा व स्वास्थ्य से जुड़े न्यूनतम मानकों को पूरा किया जा रहा था. कई जगहों पर बच्चों को दीनी तालीम की आड़ में गैर-कानूनी गतिविधियां सिखाए जाने संकेत मिले हैं, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंताओं को और अधिक बढ़ा दिया है.
इस पूरी कार्रवाई के बीच वित्तीय पहलुओं की भी गहरी छानबीन शुरू कर दी गई है. जांच एजेंसियों का अंदेशा है कि इन गैर-मान्यता प्राप्त और फर्जी मदरसों को कई संदिग्ध घरेलू और विदेशी स्रोतों से भारी मात्रा में फंड मिल रहा था. इस बात की आशंका जताई जा रही है कि इस पैसे का इस्तेमाल शिक्षा के अलावा अन्य गतिविधियों के लिए हो रहा था, जिसकी अब वित्तीय खुफिया इकाइयों द्वारा बारीकी से जांच की जा रही है.
सरकार के इस सख्त रुख के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी काफी तेज हो गई है. कांग्रेस, टीएमसी और वाम दल सरकार की इस कार्रवाई को राजनीतिक चश्मे से देखते हुए विरोध कर रहे हैं. वहीं बीजेपी इस कार्रवाई को प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून का राज स्थापित करने की दिशा में जरूरी कदम बता रही है.