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CISF में बड़ा बदलाव: पावर प्लांट से लेकर बंदरगाहों तक की सुरक्षा के लिए बनेगी अलग कमान, 1 नवंबर से लागू होगा नया सिस्टम

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद 1 नवंबर 2026 से नई व्यवस्था लागू होगी. सुरक्षा में तकनीक के बढ़ते महत्व को देखते हुए सीआईएसएफ प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर अपनी साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को भी मजबूत कर रहा है

Written By Shwetank Ratnamber
Published: Oct 18, 2026, 12:24 PM IST | Updated: Oct 18, 2026, 01:40 PM IST
Image Credit: CISF (AI)
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देश के अति-संवेदनशील और रणनीतिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को और अभेद्य बनाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) अपनी प्रशासनिक और ऑपरेशनल व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव करने जा रहा है. गृह मंत्रालय (MHA) की मंजूरी के बाद यह नया ढांचा 1 नवंबर 2026 से पूरे देश में लागू हो जाएगा.
इस पुनर्गठन का मुख्य उद्देश्य सीआईएसएफ की कमान और निगरानी व्यवस्था को अलग-अलग सेक्टर (जैसे- बिजली, कोयला, स्टील, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, बंदरगाह, सरकारी इमारतें, संग्रहालय, स्मारक और मेट्रो) की विशिष्ट सुरक्षा जरूरतों के हिसाब से ढालना है. इससे सुरक्षा तंत्र में विशेषज्ञता आएगी, ऑपरेशनल निगरानी बेहतर होगी, सुरक्षा के तरीकों में एकरूपता (uniformity) आएगी और संबंधित मंत्रालयों, विभागों व प्रतिष्ठान के प्रबंधन के साथ तालमेल और मजबूत होगा.

क्षेत्रीय कमान (Territorial) से कार्यात्मक विशेषज्ञता (Functional) की ओर

सीआईएसएफ वर्तमान में हवाई अड्डों, बंदरगाहों, परमाणु और अंतरिक्ष केंद्रों, पावर प्लांट्स, स्टील प्लांट्स, कोयला खदानों, पेट्रोलियम रिफाइनरियों, नोट छापने वाली प्रेसों के साथ सरकारी इमारतों, ऐतिहासिक स्मारकों और मेट्रो जैसी अलग-अलग तरह की संपत्तियों की सुरक्षा करता है. इनमें से हर जगह की काम करने की प्रक्रिया, बुनियादी ढांचा, संभावित खतरे और सुरक्षा की चुनौतियां बिल्कुल अलग होती हैं.

पहले सुरक्षा की जिम्मेदारी मुख्य रूप से 'क्षेत्र' (इलाके) के आधार पर तय होती थी. हालांकि, पिछले 25 वर्षों में सीआईएसएफ ने कुछ खास क्षेत्रों जैसे एविएशन (हवाई अड्डों), परमाणु ऊर्जा (DAE) और अंतरिक्ष विभाग (DoS) में काम (Function) के आधार पर सुरक्षा व्यवस्था लागू की थी. इन क्षेत्रों से मिले अनुभव ने साबित किया कि अगर एक तरह के काम वाले प्रतिष्ठानों (जैसे सभी एयरपोर्ट्स) की निगरानी एक ही कमान के तहत हो, तो वहां के जवानों की ट्रेनिंग बेहतर होती है, सुरक्षा के नियम (SOPs) ज्यादा सटीक बनते हैं और प्रबंधन के साथ तालमेल शानदार रहता है.

इसी सफलता को देखते हुए, सीआईएसएफ ने लंबी चर्चाओं और गृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद अब अपने बाकी बचे सभी क्षेत्रीय (Territorial) सेक्टर्स को भी काम (Functional) के आधार पर पुनर्गठित कर दिया है.

क्या हैं नए बदलाव (नए सेक्टर्स का गठन):

नए ढांचे के तहत मौजूदा क्षेत्रीय सेक्टर्स को अब इस तरह बदल दिया गया है.

सरकारी भवन, संग्रहालय, स्मारक और एमआरटीएस (GBMM & MRTS) सेक्टर: मौजूदा 'राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) सेक्टर' को अब पुनर्गठित कर यह नई जिम्मेदारी दी गई है (मुख्यालय: नई दिल्ली).

पावर (बिजली) सेक्टर-I और II: 'नॉर्थ सेक्टर' (नई दिल्ली) को 'पावर-I सेक्टर' और 'नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर-II' (कोलकाता) को 'पावर-II सेक्टर' बना दिया गया है.

कोयला और स्टील सेक्टर: 'ईस्टर्न सेक्टर' (रांची) को अब पूरी तरह से 'कोयला (Coal) सेक्टर' में बदल दिया गया है, जबकि 'सेंट्रल सेक्टर' (भिलाई) अब डेडिकेटेड 'स्टील (Steel) सेक्टर' होगा.

पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस सेक्टर: 'नॉर्थ ईस्टर्न सेक्टर' (गुवाहाटी) को बदलकर 'पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस सेक्टर' कर दिया गया है.

बंदरगाह (पोर्ट) सेक्टर: भारत के समुद्री व्यापार की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, 'वेस्टर्न सेक्टर' (मुंबई) को 'वेस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर' (पश्चिमी तट) और 'साउथ सेक्टर' (चेन्नई) को 'ईस्ट कोस्ट पोर्ट सेक्टर' (पूर्वी तट) में तब्दील कर दिया गया है.

मौजूदा DAE & DoS सेक्टर (बेंगलुरु), एयरपोर्ट सेक्टर-I (नई दिल्ली) और एयरपोर्ट सेक्टर-II (बेंगलुरु) पहले की तरह ही अपने कार्यात्मक ढांचे के तहत काम करते रहेंगे.

बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच एक जरूरी सुधार यह पुनर्गठन ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, जब सीआईएसएफ की भूमिका सिर्फ पारंपरिक औद्योगिक सुरक्षा से आगे बढ़कर नई और विशेष सुरक्षा जिम्मेदारियों तक फैल रही है.

सीआईएसएफ को 'अंतर्राष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा (ISPS) कोड' के तहत बंदरगाहों के लिए एक मान्यता प्राप्त सुरक्षा संगठन (RSO) नामित किया गया है. बंदरगाह क्षेत्र में इस नए ढांचे से विशेष सुरक्षा विशेषज्ञता विकसित करने में मदद मिलेगी.

बल को जम्मू-कश्मीर में अति-संवेदनशील जेलों की सुरक्षा का जिम्मा भी सौंपा गया है.

साथ ही, सीआईएसएफ को क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 'हवाई सुरक्षा' (एरियल सिक्योरिटी) की नोडल एजेंसी भी बनाया गया है. इन जिम्मेदारियों के लिए विशेष ट्रेनिंग, स्पष्ट जवाबदेही और उभरते खतरों से निपटने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण की आवश्यकता है.

फ्यूचर रेडी फोर्स

सुरक्षा में तकनीक के बढ़ते महत्व को देखते हुए सीआईएसएफ प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ मिलकर अपनी साइबर सुरक्षा, ड्रोन और एंटी-ड्रोन क्षमताओं को भी लगातार मजबूत कर रहा है ताकि महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को साइबर हमलों और संदिग्ध ड्रोन्स के खतरों से बचाया जा सके.

देश के लिए इस पुनर्गठन का सीधा मतलब है कि अब भारत की रणनीतिक और आर्थिक संपत्तियों की सुरक्षा एक बेहद कुशल और 'सेक्टर-विशेष' सुरक्षा तंत्र के हाथों में होगी. पूरी तरह से कार्यात्मक (Functional) कमान में बदलने से सीआईएसएफ एक ऐसी भविष्य के लिए तैयार (Future-ready) फोर्स बनेगा, जो उभरते खतरों का सक्रिय रूप से सामना कर सकेगा और भारत की तेज आर्थिक वृद्धि की नींव को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाएगा.

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About the Author

श्वेतांक रत्नाम्बर वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल न्यूज़ मीडिया में 22 वर्षों से ज्यादा का व्यापक अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय (देश-दुनिया) खबरों की डेस्क पर कार्यरत हैं. समसामयिक मुद्दों, वैश्विक राजनीति और कूटनीति पर गहरी समझ रखने वाले श्वेतांक जटिल अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों और राजनीतिक समीकरणों का सटीक विश्लेषण करने के विशेषज्ञ हैं.Zee News डिजिटल से पहले उन्होंने ज़ी मीडिया नेटवर्क के ग्लोबल न्यूज़ चैनल 'WION' के साथ काम किया है. इस दौरान उन्होंने 'Gravitas', 'The West Asia Post' और 'One Africa' जैसे कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्राइम-टाइम शोज़ के हिंदी प्रोडक्शन और इंटरप्रिटेशन में अहम भूमिका निभाई. 2004 से शुरू हुए अपने पत्रकारिता करियर में श्वेतांक ने रिपोर्टिंग और एंकरिंग के साथ-साथ चार लोकसभा और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की व्यापक ग्राउंड कवरेज की है.जामिया मिल्लिया इस्लामिया (JMI), नई दिल्ली से जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा के बाद मास कम्युनिकेशन और पॉलिटिकल साइंस में मास्टर्स डिग्री हासिल करने वाले श्वेतांक लंबे समय से 'प्रेस क्लब ऑफ इंडिया' (PCI) के सम्मानित सदस्य हैं.आप श्वेतांक रत्नाम्बर से सीधे shwetank.ratnamber@india.com पर ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), मेटा (फेसबुक) और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.' 
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