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देश के तीन राज्य और एक केंद्रशासित प्रदेश की 6 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं. असम की नौगांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए वोट डाले जा रहे हैं, तो पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर, तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम के साथ पुडुचेरी की थट्टनचावडी विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी है. यानी एक लोकसभा सीट और पांच विधानसभा सीट पर लोग प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेंगे.
दरअसल, यह उपचुनाव कई मायनों में खास हो जाता है. असम में की जिस लोकसभा सीट पर उपचुनाव हो रहा है, वह कांग्रेस के लिए मजबूत मानी जाती है. असम में हो रहे उप चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय है. इसके अलावा बंगाल की दो विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ओर बीजेपी में सीधी लड़ाई है. तमिलनाडु में टीवीके चीफ विजय के सीएम बनने के बाद पहला चुनाव है. इन सभी सीटों पर हो रहे उपचुनाव के नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे.
कांग्रेस के प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद असम की नगांव लोकसभा सीट खाली हुई थी, जिसके बाद यहां पर उपचुनाव हो रहे हैं. हालिया असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने प्रद्युत बोरदोलोई को अपना विधानसभा उम्मीदवार बनाया था और उन्होंने जीत दर्ज की थी. बीजेपी ने इस सीट से पूर्व आईएएस अधिकारी देबाशीष शर्मा पर भरोसा जताया है. कांग्रेस ने पूर्व विधायक सिबामोनी बोरा को मैदान में उतारा है. चूंकि, यह कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, ऐसे में बीजेपी इसको जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा रही है.
भले ही इस लोकसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस में नजर आ रहा हो, लेकिन ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के उम्मीदवार के कारण यह त्रिकोणीय बन चुका है. AIUDF ने यहां से मोहम्मद बदरुद्दीन अजमल को उम्मीदवार बनाया है. इस लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है. साल 2023 में हुए परिसीमन के बाद इस सीट के 19 लाख मतदाताओं में से 55 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम वोटर्स हैं.
यूं तो देश के 3 राज्यों में 6 सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, लेकिन सबसे अधिक चर्चा बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर सीट की हो रही है. यहां पर वोटिंग शुरू हो गई है. दोनों सीटें काफी हाईप्रोफाइल हैं. इसी साल हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासित जीत हासिल की. सीएम शुभेंदु अधिकारी भवानीपुर और नंदीग्राम सीट से विधायक बने थे.
बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट को छोड़ दिया. बीजेपी ने यहां से हसीरानी रथ को मैदान में उतारा है. कांग्रेस ने मिलन प्रधान पर भरोसा जताया. टीएमसी ने कांग्रेस उम्मीदवार को ही अपना समर्थन दिया है. वहीं, रेजीनगर से बीजेपी ने शंकराव सरकार पर भरोसा जताया, तो कांग्रेस ने मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को टिकट दिया. इस सीट से हुमायूं कबीर ने भी अपने बेटे गुलाम नबी आजाद को प्रत्याशी बनाया है. इससे पहले खुद हुमायूं कबीर ने यहां से जीत हासिल की थी.
रेजीनगर विधानसभा क्षेत्र में हो रहे उपचुनाव पर AJUP पार्टी के प्रमुख हुमायूं कबीर ने कहा कि यहां इस बार 93 फीसदी से अधिक मतदान होगा. दिन खत्म होने के बाद पता चलेगा कि वोटिंग कैसी हुई, लेकिन सबसे अधिक वोटिंग होगी. उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे डरे हुए हैं. पुलिस आम जनता पर हमला कर रही है. मेरी पार्टी के 64 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है. केवल मुस्लिमों पुरुषों को निशाना बनाया जा रहा है. ये लोग बीजेपी को कभी वोट नहीं देंगे, इस कारण ही दुश्मनी की भावना से उनपर हमला किया जा रहा है. पुलिस को ज्यादा अत्याचार नहीं करना चाहिए.
तमिलनाडु की दो विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए वोटिंग जारी है. इसमें मदुरंतकम और धारापुरम शामिल है. साल 2026 में हुए विधानसभा चुनाव में इन दोनों सीटों पर एआईएडीएमके ने जीत हासिल की थी. हालांकि, बाद में AIADMK के दोनों विधायकों ने विजय की टीवीके का दामन थाम लिया. उन्होंने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया.
अब टीवीके ने उन्हीं दलबदलु नेताओं को अपना उम्मीदवार बनाया है. धारापुरम से टीवीके ने पी. सत्यबामा और मदुरंतकम और मरागाथम कुमारवेल को अपना प्रत्याशी बनाया है. अगर टीवीके के उम्मीदवार विधानसभा पहुंचते हैं, तो टीवीके विधानसभा में बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगी.
केंद्रशासित राज्य पुडुचेरी की एक विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव हो रहा है. सीएम एन. रंगासामी ने हालिया विधानसभा चुनाव में दो सीटों से चुनाव लड़ा था, जिसके बाद उन्होंने थट्टनचावडी सीट को छोड़ने का फैसला किया, जिससे ये सीट खाली हो गई. एन. रंगासामी ने मंगलम विधानसभा सीट अपने पास रखी. ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (AINRC) और कांग्रेस समर्थित गठबंधन में इस सीट पर सीधा मुकाबला देखने को मिल रहा है.
देश के तीन राज्यों की 6 सीटों पर हो रहे ये उपचुनाव भले ही केंद्र या किसी राज्य की सरका पर सीधा असर न डालें, लेकिन देश के राजनीतिक मिजाज को समझने में अहम साबित होंगे. उपचुनाव से यह पता चलेगा कि क्या हालिया चुनाव के बाद किसी भी राज्य में लोगों के मिजाज में क्या बदलाव आया है. उपचुनावों से राज्य की राजनीति पर पड़ने वाले असर के बारे में भी जानकारी मिल सकेगी.