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जम्मू-कश्मीर के बड़गाम में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन चलाया. लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के फील्ड कमांडर आसिफ उर्फ मूसा फौजी, जिस पर 1 करोड़ रुपये का इनाम था, को बड़गाम के कैवन जंगलों में रात भर चले ऑपरेशन में मार गिराया गया. मूसा 2023 से सक्रिय था और उसने जम्मू-कश्मीर में कई बड़े हमलों की साजिश रची थी, जिसमें पहलगाम टेरर अटैक भी शामिल है. आइए आपको बताते हैं कि कैसे इतना खतरनाक आतंकी सुरक्षा बलों के बिछाए जाल में फंसा.
सुरक्षा बलों के एक संयुक्त ऑपरेशन में, मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में यह ऑपरेशन SOG बड़गाम, 53 RR, पैरा-कमांडो और CRPF बड़गाम यूनिट ने मिलकर चलाया था. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आसिफ मूसा लगभग तीन साल से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय था; वह 22 सितंबर 2023 को भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था और वो लगातार एक के बाद एक करके कई आतंकी हमलों का मास्टरमाइंड रहा है.
पिछले 5 दिनों से सुरक्षा बलों को कैवन जंगलों में मूसा की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल रही थी. इसलिए, एक ऑपरेशन प्लान तैयार किया गया. SOG बडगाम के स्थानीय लोगों की मदद से उसकी गतिविधियों की पुष्टि की गई. गतिविधि की पुष्टि होने के बाद, घात लगाकर हमला करने की योजना बनाई गई और सुरक्षा के लिए हवाई निगरानी भी रखी गई. सूत्रों के अनुसार, पिछले दो दिनों से मूसा खाना लेने के लिए जंगल से नीचे आ रहा था; यह उसकी नियमित गतिविधि थी, इसलिए इसी आधार पर ऑपरेशन की योजना बनाई गई. जब कल रात मूसा खाने के लिए नीचे आया, तो SOG बडगाम, जम्मू-कश्मीर पुलिस, पैरा कमांडो, भारतीय सेना की RR और CRPF बडगाम यूनिट की स्पेशल ऑपरेशन्स पार्टी घात लगाकर बैठी थी. थोड़ी देर चली गोलीबारी में रात 10:30 से 11:00 बजे के बीच मूसा को मार गिराया गया. तब से लेकर अब तक जंगलों में तलाशी अभियान जारी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इलाके में कोई और आतंकवादी तो मौजूद नहीं है.
मोहम्मद आसिफ, उर्फ हाशिम मूसा (जिसे आमतौर पर मूसा फौजी या आसिफ फौजी के नाम से जाना जाता था), मूल रूप से पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अटक जिले के नसीराबाद इलाके में स्थित ढोक मालियार गांव का रहने वाला था. 22 सितंबर 2023 को डेरा की गली के रास्ते भारत में घुसपैठ करने से पहले, वह पाकिस्तान के रावलपिंडी के न्यू चक्रा इलाके में मोहल्ला कोहिसार कॉलोनी में रहता था. सुरक्षा बलों के पास मौजूद जानकारी के अनुसार, लश्कर-ए-तैयबा (LeT) कमांडर के तौर पर जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने से पहले, उसने कई वर्षों तक पाकिस्तान सेना के खास स्पेशल सर्विस ग्रुप (SSG) में सेवा की थी. सूत्रों के मुताबिक, उसका सर्विस नंबर PA-3106947 था और वह हवलदार के पद पर था.
पुलिस सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान सेना ने उसे LeT समूह के ऑपरेशन्स को बढ़ावा देने के मकसद से जम्मू-कश्मीर भेजा था. पैरा कमांडो के तौर पर उसकी ट्रेनिंग उसे खास तौर पर खतरनाक बनाती थी, क्योंकि उसे वॉर, गुप्त मिशन और ज्यादा जोखिम वाले टेक्टिकल ऑपरेशन्स में महारत हासिल थी. अधिकारियों ने बताया कि वह आधुनिक हथियारों को चलाने में माहिर था, आमने-सामने की लड़ाई में कुशल था और उसमें नेविगेशन और सर्वाइवल की बेहतरीन क्षमताएं थीं.
पिछले तीन सालों में उसने पीर पंजाल रेंज के दोनों तरफ़ अपने ठिकाने बनाए और बड़े पैमाने पर गतिविधियां चलाईं. वह पहले पुंछ जिले के घने जंगलों से गुजरा और बाद में अपना ध्यान मध्य कश्मीर के बड़गाम, गांदरबल, पहलगाम और युसमर्ग इलाकों पर केंद्रित किया. अधिकारियों ने बताया कि मूसा के खिलाफ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया गया था क्योंकि वह सुरक्षा बलों पर कई हमलों में शामिल था, जिनमें पहलगाम का जानलेवा हमला, जोजिला टनल हमला और गुलमर्ग हमला शामिल हैं. दो बार घेराबंदी से बच निकलने के बाद उस पर इनाम की राशि 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई थी. हाल ही में वह बच निकलने में कामयाब रहा था, और फिर 5 सितंबर 2026 को बडगाम के जंगलों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन अशदार' में उसका करीबी साथी यासिर उर्फ अबू तलहा भी मारा गया था.
मूसा की पृष्ठभूमि और गतिविधियों के बारे में जानकारी तब मिली जब पहलगाम हमले की जांच के दौरान कश्मीर के 14 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGWs) में से एक से पूछताछ की गई. उस समय सुरक्षा बलों ने एक तस्वीर जारी की थी जिसमें 4 आतंकवादी (1 स्थानीय और 3 पाकिस्तानी) दिखाई दे रहे थे; उनमें से एक मूसा फौजी था. सबसे पहले, वह पुंछ-राजौरी में पीर-पंजाल रेंज में रहा. अधिकारियों के मुताबिक, मूसा 2024 की शुरुआत में हुए तीन और हमलों में सीधे तौर पर शामिल था, जिससे इस इलाके में एक अहम आतंकवादी के तौर पर उसकी पहचान पक्की हो गई. उसने पहला हमला 4 अगस्त 2023 को कुलगाम-पुंछ बॉर्डर पर स्थित हालन गांव में किया था. गोलीबारी के दौरान सेना के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई.
दूसरा हमला उसने 21 दिसंबर 2023 को पुंछ के डेहरा की गली में किया. यह हमला राजौरी और पुंछ की सीमा से सटे सुरनकोट इलाके में डेरा की गली और बुफलियाज के बीच 'धत्यार मोड़' नाम के एक अंधे मोड़ (ब्लाइंड कर्व) पर हुआ था. इस हमले में चार सैनिक शहीद हो गए और तीन अन्य घायल हो गए. तीसरा हमला उसने 4 मई 2024 को पुंछ के शास्तर में IAF के काफिले पर घात लगाकर किया. इसमें IAF का एक कॉर्पोरल मारा गया और चार अन्य एयर वॉरियर्स को गोली लगी. चौथा हमला उसने 24 अक्टूबर 2024 को गुलमर्ग के बुटा पथरी में एक कैंप पर किया. इसमें चार लोग मारे गए - भारतीय सेना के दो सैनिक और सेना के लिए पोर्टर का काम करने वाले दो आम नागरिक.
इन हमलों के बाद में उसे जम्मू-कश्मीर में LeT का फील्ड कमांडर बनाया गया. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पहलगाम हमला, ज़ोजिला टनल हमला और कोकरनाग में गाडोल हमला उसी ने करवाया था. सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा को कश्मीर में LeT का सबसे ज़्यादा वांछित (मोस्ट-वांटेड) कमांडर बताया है. वह घाटी में कई हमलों में शामिल रहा है, जिनमें पुंछ-राजौरी, गुलमर्ग, गांदरबल और पहलगाम की घटनाएँ शामिल हैं. अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद, जांच एजेंसियों ने हमले से जुड़े चार आतंकवादियों की तस्वीरें जारी कीं. इनमें अबू तलहा, सुलेमान शाह और हाशिम मूसा (सभी पाकिस्तानी) और जुनैद अहमद (स्थानीय) शामिल थे. अधिकारियों ने बताया कि मूसा कश्मीर में LeT के ऑपरेशन्स की कमान संभाल रहा था और पहलगाम हमले की योजना बनाने में उसकी अहम भूमिका थी. सुरक्षा बलों ने अब इन चारों आतंकवादियों को मार गिराया है; मूसा आखिरी आतंकवादी था.