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100 KM का शानदार सफरः बंगाल से भटककर आई बाघिन का असम में रेस्क्यू, बक्सा टाइगर रिजर्व में ऐसे हुई 'घर वापसी'

बंगाल की बाघिन BT1 करीब 100 किलोमीटर का सफर तय करके असम पहुंच गई थी. यहां उसका सफल रेस्क्यू करके वापस बक्सा टाइगर रिजर्व पहुंचाया गया. दोनों राज्यों की सरकारों ने इस काम में लगे सभी अधिकारियों की तारीफ की है.

Written By K. Raj Mishra
Published: Nov 04, 2026, 11:04 AM IST | Updated: Nov 04, 2026, 11:23 AM IST
Image Credit: बंगाल से भटककर आई बाघिन का असम में रेस्क्यू (Photo- ANI)
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पश्चिम बंगाल की बाघिन BT1 के 100 किलोमीटर का सफर बड़े ही रोमांचक अंदाज में समाप्त हो गया है. दरअसल, पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व से बाघिन BT1 के अचानक से गायब हो गई थी. इससे राष्ट्रीय उद्यान के अधिकारियों में हड़कंप मच गया. वन विभाग के अधिकारियों ने बाघिन के गले में लगे 'रेडियो कॉलर' से ट्रैक किया, तो पता चला कि वह असम में है. बाघिन लगातार आगे बढ़ते हुए BTR स्थित रायमोना नेशनल पार्क पहुंच गई. हालांकि, बक्सा टाइगर रिजर्व के अधिकारी लगातार उस पर नजर बनाकर रखे हुए थे. बाघिन के असम की सीमा में प्रवेश करते ही बक्सा टाइगर रिजर्व के अधिकारियों ने रायमोना नेशनल पार्क के अधिकारियों से संपर्क किया और उन्हें इस घटना की जानकारी दी.

BT1 की सुरक्षित हुई 'घर वापसी'

इसके बाद दोनों राज्यों के वन विभाग अधिकारियों ने मिलकर बाघिन को रेस्क्यू करने का प्लान तैयार किया. बाघिन के रेस्क्यू अभियान में पश्चिम बंगाल और बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन (BTR) के वन अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन और स्थानीय लोग भी शामिल हुए. 

जानकारी के मुताबिक, सभी ने मिलकर बाघिन को ट्रैंक्विलाइजर डार्ट से बेहोश किया और सुरक्षित पकड़कर पिंजड़े में बंद कर लिया. इस दौरान डॉक्टरों की एक टीम भी मौजूद रही. बाघिन को पकड़ने के बाद डॉक्टरों ने उसके स्वास्थ्य की जांच की, जिसमें वह पूरी तरह से स्वस्थ्य पाई गई.

बिहार से बंगाल लाई गई थी BT1

बता दें कि 2 अक्टूबर को इस बाघिन को बिहार के VTR से बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में लाया गया था. 23 अक्टूबर को बाघिन अचानक से गायब हो गई थी. 'रेडियो कॉलर' से ट्रैक करने पर पता चला कि वह असम के रायमोना नेशनल पार्क पहुंच गई है. 

बंगाल के वन मंत्री मनोज ओरांव ने बताया कि शुरुआत में हमने उसे घूमने-फिरने दिया, लेकिन जब हमें पता चला कि वह (बाघिन) इंसानी बस्तियों के करीब पहुंच गई है, तो हमारी चिंता बढ़ गई. तब हमने असम प्रशासन से मदद मांगी और उसे पकड़ लिया. अब घबराने की कोई बात नहीं है.

बंगाल की पहचान वापस लाने की कोशिश

बता दें कि बक्सा को 1983 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था, लेकिन हाल ही में वहां एक भी बाघ नहीं बचे थे. जिसके चलते पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बिहार से कुछ बाघों को लाकर यहां बसाने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके चलते 2 अक्टूबर को BT1 को यहां लाया गया था. इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि अगले दो महीनों में बक्सा में तीन और बाघ छोड़े जाएंगे. इस पहल से न केवल संरक्षण में मदद मिलेगी, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा.

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About the Author

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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