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न सरहद की फिक्र, न समंदर का डर: 23 देशों का सफर कर मणिपुर लौटे दो 'अमूर फाल्कन', केंद्रीय मंत्री ने शेयर की पक्षियों की अद्भुत कहानी

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने दो 'अमूर फाल्कन' की कहानी साझा की है, जिन्होंने करीब 23 देशों की यात्रा तय की. अब इन पक्षियों की मणिपुर में वापसी हो गई है. ये पक्षी करीब 3 हफ्ते तक यहां ठहराव करेंगे और फिर 6,000 किलोमीटर लंबी यात्रा के लिए रवाना हो जाएंगे.

Written By abhinav tripathi
Published: Oct 23, 2026, 02:43 PM IST | Updated: Oct 23, 2026, 03:36 PM IST
Image Credit: 11 दिन में चीन ने भारत पहुंचे दो खास पक्षी. (फोटो- x/@byadavbjp)
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भारत में एक बार से प्रकृति का ऐसा नजारा देखने को मिला है, जिसको जानने के बाद आप भी गर्व करेंगे. लंबी दूरी करने वाले दो 'अमूर फाल्कन' पक्षियों की भारत में वापसी हो गई है. इन पक्षियों का नाम 'अपापांग' और 'अलंग' है. सबसे खास बात है कि इन दोनों पक्षियों ने एक साल में 23 देशों का सफर तय किया. इस बात की जानकारी केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी.

दरअसल, अपनी पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने इन दोनों पक्षियों की तस्वीर को साझा किया है. केंद्रीय मंत्री ने इस दौरान कहा कि इन दोनों अमूर फाल्कन ने उत्तर-पूर्वी चीन से अपनी यात्रा शुरू की थी. चूंकि, इन पक्षियों का मुख्य प्रजनन क्षेत्र वही है. वहां से ये 11 दिन पहले उड़े थे, जो सुरक्षित तरीके से भारत के मणिपुर राज्य पहुंचे हैं.

पिछले साल वैज्ञानिकों ने किया था टैग

यहां पर ध्यान देने वाली बात है कि यह केवल 11 दिन की यात्रा का कमाल नहीं है. वास्तव में यह उनके लंबे एक साल के ट्रैकिंग अभियान की बड़ी सफलता भी है. भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिकों ने नवंबर 2025 में इन पक्षियों को टैग किया था. इस टैगिंग के बाद ये दोनों पक्षी अफ्रीका और एशिया के कुल 23 देशों से होकर गुजरे हैं.

यह इन पक्षियों की मणिपुर से शुरू होकर मणिपुर आने की पूरी राउंड-ट्रिप है. यही कारण है कि इतने लंबे अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण केंद्रीय मंत्री ने इन पक्षियों को वैश्विक नागरिक करार दिया है. जानकार बताते हैं कि ये पक्षी करीब 3 हफ्ते तक अब मणिपुर में ही रहेंगे. बताया जाता है कि हर साल स्थानीय नागरिक इन पक्षियों का बेसब्री से इंतजार करते हैं. आसपास के लोग इन पक्षियों का शिकार नहीं करते, बल्कि इनका संरक्षण करते हैं.

क्यों मणिपुर में ठहराव लेते हैं ये पक्षी

वैज्ञानिक बताते हैं कि मणिपुर में इनके रुकने की ककई वजहें हैं. ये पक्षी यहां पर रुककर दीमकों को अपना भोजन बनाते और अपने शरीर में जरूरी फैट एकत्र करते हैं. यही फैट इन्हें आगे की उड़ान में मदद करेगा. बताया जाता है कि मणिपुर में ठहराव के बाद इनकी असली उड़ान शुरू होगी.

यहां से ये पक्षी सोमालिया के लिए उड़ान भरेंगे. ये यात्रा करीब 6,000 किलोमीटर के करीब की होगी. इसमें सबसे खास है कि ये यात्रा 6 दिन की लगातार उड़ान भरी होगी. ये पक्षी कहीं रुकेंगे नहीं. पक्षियों को करीब 3,000 किलोमीटर की दूरी केवल अरब सागर के ऊपर से तय करनी है. आमूल फाल्कन अपनी इसी बेमिसाल प्रवासी यात्राके लिए दुनिया में जाने जाते हैं. 

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About the Author

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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