सिर्फ दिल्ली या भारत ही नहीं, पूरे दक्षिण एशिया में घुट रहा है दम! विंटर आते ही क्यों डराने लगा है यह जहरीला संकट?
ठंड की आहट के साथ ही दक्षिण एशिया में हवा की क्वालिटी खराब होने लगी है. भारत और पाकिस्तान से लेकर इंडोनेशिया तक प्रदूषण काफी ज्यादा बढ़ गया है, आने वाले दिनों में यह समस्या और भी खतरनाक हो सकती है.
सर्दियों की शुरुआत होते ही राजधानी दिल्ली समेत उत्तर भारत में प्रदूषण का स्तर भी बढ़ने लगता है. इस बार भी दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने लगा है. हर साल की तरह इस बार भी लोगों को कई हफ्तों तक जहरीली हवा में सांस लेने की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. लेकिन पॉल्यूशन की यह समस्या सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है. पड़ोसी देश पाकिस्तान से लेकर दक्षिण एशिया के कई देशों में भी जहरीली हवा लोगों की सेहत के लिए खतरा बन रही है.
23 अक्टूबर को AQI.in की तरफ से जारी प्रदूषित शहरों की लिस्ट में भारत, पाकिस्तान और इंडोनेशिया के कई शहर शामिल रहे. इस लिस्ट में इंडोनेशिया का पालेमबांग 447 AQI के साथ दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर रहा. इसके बाद इंडोनेशिया के ही संपित में AQI 408 और पलंगकाराया में 356 रिकार्ड किया गया. भारत के अमृतसर में AQI 354 रहा, वहीं पाक के लाहौर में यह आंकड़ा 341 तक पहुंच गया. इस लिस्ट में शामिल 20 शहरों में से 14 भारत के और पांच इंडोनेशिया के थे. ये डेटा AQI in के उस समय के रिकॉर्ड हैं, इन्हें पूरे देश के औसत प्रदूषण का आंकड़ा नहीं माना जा सकता. लेकिन, इनसे साफ है कि जहरीली हवा का संकट किसी एक देश तक सीमित नहीं है.
इंडोनेशिया में जंगलों की आग से फैल रहा धुआं
इंडोनेशिया में वायु प्रदूषण की बड़ी वजह जंगलों और जमीन पर लगने वाली भीषण आग है. इन आग से निकलने वाला धुआं आसपास के शहरों और रिहायशी इलाकों तक पहुंच रहा है. लंबे समय से जारी सूखे के कारण सुमात्रा और कालीमंतन समेत कई इलाकों में धुएं की समस्या बनी हुई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार 22 अक्टूबर को अधिकारियों के हवाले से बताया कि इंडोनेशिया में पिछले 11 सालों की सबसे भीषण आग लगी है. आग के हॉटस्पॉट में कमी जरूर आई है, लेकिन अलग-अलग इलाकों में हो रही हल्की बारिश आग बुझाने के लिए काफी नहीं रही है.
आग पर कंट्रोल पाने के लिए इंडोनेशिया ने 69 हजार से ज्यादा अग्निशमन कर्मियों और 50 विमानों को लगाया है. जिनकी सहायता से इन विमानों की मदद से आग बुझाने, पानी गिराने और मौसम में बदलाव लाने की कोशिश की जा रही है. इस आग का असर इंडोनेशिया तक ही सीमित नहीं रहा. धुएं के कारण सिंगापुर में भी हवा की क्वालिटी खराब हुई है. 14 अक्टूबर को सिंगापुर के पश्चिमी हिस्सों में PM2.5 का स्तर 284 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकार्ड किया गया था, जिसे अधिकारियों ने बहुत ज्यादा श्रेणी में रखा.
सिंगापुर की राष्ट्रीय पर्यावरण एजेंसी ने 22 अक्टूबर को चेतावनी दी कि इंडोनेशिया की आग से उठने वाला धुआं द्वीप की ओर आ सकता है. हालांकि, बारिश और हवा की दिशा में बदलाव से कुछ राहत मिलने की उम्मीद जताई गई. इस प्रदूषण के कारण लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियों की समस्या भी सामने आई है.
पाकिस्तान और भारत में भी बढ़ रही स्मॉग की परेशानी
पाकिस्तान के लाहौर में अक्टूबर से फरवरी के बीच स्मॉग की समस्या आम तौर पर गंभीर हो जाती है. गाड़ियों से निकलने वाला धुआं, फैक्ट्रियों का प्रदूषण, ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल और खेतों में फसल के अवशेष जलाने से हवा खराब होती है. पंजाब प्रांत के अधिकारियों ने प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों, उद्योगों और ईंट भट्ठों के खिलाफ जांच और कार्रवाई तेज की है. लेकिन सर्दियों में तापमान गिरने और हवा की रफ्तार कम होने से प्रदूषक जमीन के करीब जमा हो जाते हैं. इससे स्मॉग की समस्या और गंभीर हो सकती है.
भारत के उत्तरी हिस्सों में भी हालात कुछ ऐसे ही हैं. AQI.in के आंकड़ों के मुताबिक, अमृतसर में AQI 354, हापुड़ में 319 और बठिंडा में 316 दर्ज किया गया. ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर और अलीगढ़ में यह आंकड़ा 306 रहा, जबकि गाजियाबाद और जालंधर में AQI 304 दर्ज किया गया.
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विश्व बैंक ने भी इस क्षेत्र में प्रदूषण से निपटने के लिए देशों के बीच मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर दिया है. प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर लगाम लगाने और पूरे साल नियमों का पालन कराने से ही हालात में लंबे समय तक सुधार लाया जा सकता है. सर्दियों में कुछ समय के लिए पाबंदियां लगाने से राहत मिल सकती है, लेकिन प्रदूषण का स्थायी समाधान तभी संभव है, जब गाड़ियों, उद्योगों, खेतों और दूसरे स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन को कम किया जाए.
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