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Himachal में सेब किसानों का भुगतान अटका, सरकार से तुरंत बकाया जारी करने की मांग

हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने MIS के तहत सेब और दूसरे फलों की खरीद का पेंडिंग पेमेंट जल्द जारी करने की मांग की है, जबकि सरकार मार्च से ही किसानों का बकाया पेमेंट धीरे-धीरे कर रही है.

Written By Renu Akarniya
Published: Aug 30, 2026, 08:33 PM IST | Updated: Aug 30, 2026, 08:42 PM IST
Image Credit: Himachal में सेब किसानों का भुगतान अटका, सरकार से तुरंत बकाया जारी करने की मांग
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Himachal Pradesh News: हिमाचल सेब उत्पादक संघ ने राज्य सरकार से बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत खरीदे गए सेब और अन्य फलों के लिए किसानों को लंबित भुगतान तुरंत जारी करने का आग्रह किया है, जिसमें उत्पादकों द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज पूरे करने के बावजूद देरी का आरोप लगाया गया है.

रविवार को जारी एक बयान में, एसोसिएशन की राज्य समिति के सदस्य संजय चौहान ने कहा कि राज्य सरकार ने मार्च में भुगतान प्रक्रिया शुरू कर दी थी और शुरुआत में उन किसानों का बकाया चुकाने का फैसला किया था, जिन्होंने 30 बैग तक की आपूर्ति की थी, उसके बाद उन किसानों का बकाया दिया जाएगा, जिन्होंने 100 बैग तक की आपूर्ति की थी.

उन्होंने कहा हालांकि, कई किसान आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद अभी भी अपने भुगतान का इंतजार कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, कई किसानों ने एक महीने से अधिक समय पहले दस्तावेज पूरे कर लिए हैं, लेकिन पैसा अभी भी उनके खातों में जमा नहीं किया गया है. एसोसिएशन के अनुसार, अधिकारियों ने देरी के लिए पिछले साल कुछ स्थानों पर खरीदे गए सेब बैगों की संख्या से संबंधित कथित अनियमितताओं की चल रही जांच को जिम्मेदार ठहराया है.

एसोसिएशन ने कहा कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने वाले किसानों का भुगतान रोकने से उन उत्पादकों को कठिनाई हो रही है, जिनकी कथित अनियमितताओं में कोई भागीदारी नहीं थी.

चौहान ने कहा कि एसोसिएशन ने MIS के तहत सेब खरीद में कथित अनियमितताओं को एक गंभीर मामला माना है, खासकर राज्य के बागवानी मंत्री ने भी एक विधायक के सवाल का जवाब देते हुए विधानसभा में इस मुद्दे की पुष्टि की थी.

उन्होंने कहा कि आरोपों ने सरकार और हिमाचल प्रदेश बागवानी उत्पादन विपणन और प्रसंस्करण निगम (HPMC) और हिमफेड सहित MIS खरीद के लिए नियुक्त एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

चौहान ने आरोप लगाया, 'कथित अनियमितताओं का पैमाना खरीद के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और संग्रह केंद्रों पर तैनात अन्य कर्मियों की संलिप्तता के बिना संभव नहीं होता.

एसोसिएशन ने अधिकारियों पर पिछले साल एमआईएस के तहत खरीदे गए सेब को संग्रह केंद्रों से समय पर उठाने में विफल रहने और बाद में सड़क अवरोधों का हवाला देते हुए वहां उपज का निपटान करने में लापरवाही का भी आरोप लगाया.

इसमें कथित अनियमितताओं की उचित जांच और जिम्मेदार पाए गए लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई. इसमें दोषी पाए गए लोगों से किसी भी नुकसान की वसूली की भी मांग की गई.

एसोसिएशन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक पारदर्शी खरीद तंत्र का आह्वान किया. इसमें विशेष रूप से मांग की गई कि संग्रहण केंद्रों पर कर्मियों की नियुक्ति के लिए स्पष्ट नियम बनाए जाएं और उनके कामकाज में राजनीतिक या अन्य हस्तक्षेप को रोका जाए.

एसोसिएशन ने केंद्र से बाजार हस्तक्षेप योजना को जारी रखने का भी आग्रह किया, यह कहते हुए कि इसे मूल रूप से 1987-88 में आलू, प्याज, सेब, संतरे और अंगूर जैसी फसलें उगाने वाले किसानों को समर्थन देने के लिए शुरू किया गया था जब बाजार की कीमतें तेजी से गिर गईं.

योजना के तहत, नामित सरकारी एजेंसियां ​​किसानों की उपज तब खरीदती हैं जब मौजूदा बाजार कीमतें लाभकारी रिटर्न प्रदान करने में विफल रहती हैं.

एसोसिएशन ने कहा कि यह योजना शुरुआत से ही हिमाचल प्रदेश में सेब और खट्टे फलों के लिए लागू की गई है. इसमें दावा किया गया कि केंद्र ने 2023 के बजट में योजना के लिए बजटीय आवंटन कम कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप राज्यों को केंद्र सरकार का हिस्सा वापस ले लिया गया और आरोप लगाया कि राज्य सरकार अब धीरे-धीरे इस योजना में अपनी भागीदारी कम कर रही है.

एसोसिएशन ने मांग की कि केंद्र एमआईएस के लिए पर्याप्त धनराशि बहाल करे और कम से कम 1,500 करोड़ रुपये का प्रावधान करे, जैसा कि पहले कहा गया था. इसने राज्य सरकार को लंबित भुगतान जारी करने की भी मांग की.

चौहान ने कहा, अगर केंद्र और राज्य सरकारें बाजार हस्तक्षेप योजना को बंद करने पर विचार कर रही हैं तो यह किसान विरोधी निर्णय होगा. उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम से पहले से ही गंभीर संकट से जूझ रहे सेब उत्पादकों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी. एसोसिएशन ने कहा कि वह इस योजना को बंद करने के केंद्र या राज्य सरकार के किसी भी फैसले का विरोध करेगा. 

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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