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दुर्गा अष्टमी 2026 को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है. इस बार महाष्टमी और कन्या पूजन 18 अक्टूबर को किया जाएगा या 19 अक्टूबर को. इसे लेकर अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं. विभिन्न मंदिरों के पुजारी और ज्योतिषाचार्य तिथियों की गणना के आधार पर अपनी राय दे रहे हैं. इसी को लेकर जी मीडिया की टीम ने हरियामा के यमुनानगर के विभिन्न मंदिरों के पुजारियों से बातचीत की.
कब मनाई जाएगी दुर्गा अष्टमी?
यमुनानगर के दुर्गा मंडल, सरोजनी कॉलोनी के पुजारी पंडित दिनेश प्रसाद ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार दुर्गा अष्टमी 19 अक्टूबर (सोमवार) को मनाना शास्त्रसम्मत है. उन्होंने बताया कि अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 29 मिनट के बाद शुरू होगी, लेकिन उस दिन सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि रहेगी. वहीं, 19 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अष्टमी तिथि होने के कारण इस दिन महाष्टमी और कन्या पूजन करना उचित रहेगा.
पंडित दिनेश प्रसाद के मुताबिक, शास्त्रों में उदयातिथि का विशेष महत्व है. कन्या पूजन प्रातःकाल किया जाता है और इस दौरान अष्टमी तिथि का होना महत्वपूर्ण माना जाता है. इसलिए श्रद्धालुओं को 19 अक्टूबर यानी कि सोमवार को ही दुर्गा अष्टमी मनाने की सलाह दी गई है.
कन्या पूजन में इन बातों का रखें ध्यान
पंडित दिनेश प्रसाद ने बताया कि दुर्गा अष्टमी के दिन कन्याओं का पूजन विशेष महत्व रखता है. इस अवसर पर कन्याओं को श्रद्धापूर्वक भोजन कराएं. हलवा, पूरी और खीर का भोग लगाकर कन्याओं को भोजन कराएं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा और उपहार दें. मान्यता है कि सच्चे मन से मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और कन्या पूजन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी पूजन करना उचित
यमुनानगर के एक अन्य पुजारी के अनुसार, उदयातिथि के आधार पर अधिकांश श्रद्धालु 19 अक्टूबर को अष्टमी मनाई जाएगी. उनका कहना है कि सोमवार को सुबह से अष्टमी तिथि रहेगी और सुबह 10 बजकर 53 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. ऐसे में अष्टमी और नवमी से जुड़े पूजन के लिए तिथि के अनुसार विधि-विधान का पालन करना चाहिए.
20 अक्टूबर को दशहरा, जानें रावण दहन का समय
विजयादशमी यानी दशहरा 20 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा. दशहरे के दिन भगवान श्रीराम की पूजा और रावण दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है. उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट तक रहेगी.
विजय मुहूर्त: दोपहर 1:59 बजे से 2:45 बजे तक
रावण दहन: 20 अक्टूबर को सूर्यास्त के बाद, स्थानीय परंपरा और प्रदोष काल के अनुसार शाम लगभग 5:47 से 5:50 बजे के बाद रावण दहन किया जा सकता है.
(यमुनानगर से कुलवंत सिंह की रिपोर्ट)