पंचकूला स्कूल केस: ह्यूमन राइट कमीशन की टीम मौके पर पहुंची, वहां क्या-क्या मिला?
मानवाधिकार आयोग ने पंचकूला के स्कूल में मासूम बच्ची के साथ हुई बर्बरता के मामले में संज्ञान लिया है. आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति और असिस्टेंट रजिस्ट्रार स्कूल पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया. बच्ची के परिजनों ने स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी निगरानी पर सवाल उठाए हैं.
हरियाणा स्थित पंचकूला का स्कूल केस देशभर में चर्चा का विषय बना है. ये इतना डरावना मामला है कि वीडियो देखकर ही लोग डर गए हैं. सेक्टर-20 स्थित शहीद मेजर अनुज राजपूत राजकीय संस्कृति मॉडल स्कूल का ये मामला है. अब मानवाधिकार आयोग भी सक्रिय हो गया है. शनिवार को आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और असिस्टेंट रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा स्कूल पहुंचे. टीम ने उस क्लासरूम और घटनास्थल का निरीक्षण किया जहां बच्ची के साथ कथित तौर पर बेरहमी से मारपीट की गई थी.
पहले ही जांच कमेटी गठित की जा चुकी
असल में आयोग की टीम ने मौके की परिस्थितियों को समझने और मामले से जुड़े पहलुओं की जानकारी लेने का प्रयास किया. हरियाणा सरकार की तरफ से पहले ही जांच कमेटी गठित की जा चुकी है. अब मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप से स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जांच का दायरा बढ़ गया है.
करीब 35 घंटे बाद होश आया.
घटना में गंभीर रूप से घायल बच्ची का चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज चल रहा है. जानकारी के मुताबिक बच्ची को करीब 35 घंटे बाद होश आया. उसके चेहरे और नाक की हड्डी में फ्रैक्चर है और शरीर के अन्य हिस्सों पर भी चोटें आई हैं. चेहरे की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने सर्जरी की जरूरत बताई है. बच्ची की हालत को लेकर परिवार के लोग चिंतित हैं.
सामने आए सीसीटीवी फुटेज ने लोगों को झकझोर दिया है. फुटेज में एक तीसरी कक्षा का बच्चा बच्ची को क्लासरूम में ले जाता दिखाई देता है. इसके बाद वह कथित तौर पर बच्ची का सिर बेंच पर पटकता है, बाल पकड़कर घसीटता है और जमीन पर गिराकर मारता है.
स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
परिजनों ने स्कूल प्रबंधन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. बच्ची के चाचा का आरोप है कि स्कूल में बच्चों की निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं थे. उन्होंने सवाल उठाया कि आरोपी छात्र ही परिजनों को घायल बच्ची तक लेकर पहुंचा था. ऐसे में स्कूल के शिक्षकों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए.
परिजनों ने स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि जब स्कूल में छोटे बच्चे पढ़ते हैं तो उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन और शिक्षकों की होती है. ऐसे में यह पता लगाना जरूरी है कि घटना के दौरान निगरानी में कहां चूक हुई और समय रहते बच्ची को मदद क्यों नहीं मिल सकी.
किसकी जवाबदेही तय होगी?
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि बच्ची के साथ हुई घटना के लिए किसकी जवाबदेही तय होगी. जांच में यह देखना होगा कि स्कूल में बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम थे, शिक्षकों की निगरानी कितनी प्रभावी थी और घटना के बाद स्कूल प्रबंधन ने क्या कदम उठाए. फिलहाल मानवाधिकार आयोग की टीम के निरीक्षण के बाद जांच और कार्रवाई पर सबकी नजर है. (इनपुट- विजय राना)