कैथल का रानी महल: कभी थी शान, अब खंडहर बनने की कगार पर ऐतिहासिक धरोहर
Haryana News: हरियाणा के कैथल की ऐतिहासिक इमारत इन दिनों बदहाली का शिकार है. कभी शहर की पहचान मानी जाने वाली ये धरोहर अब देखरेख और संरक्षण के अभाव में जर्जर होती जा रही है. इसकी पुरानी दीवारें आज भी इतिहास की झलक दिखाती हैं.
Haryana News: हरियाणा के कैथल की ऐतिहासिक इमारत आज अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष कर रही है. कभी ये कैथल की पहचान हुआ करती थी. अब ये महल धीरे-धीरे जर्जर होते जा रही है. आज भी इसकी पुरानी दीवारें इतिहास की कहानी बताती हैं. वहीं आज जब इसे देखा जाता है, तो देखभाल और संरक्षण के अभाव में ये इमारत खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच गई है.
भाई उदय सिंह के समय हुआ था निर्माण
कैथल की शासक भाई उदय सिंह के समय रानी महल का निर्माण हुआ था. ये महल अपने समय के शानदार वास्तुकला का उदाहरण माना जाता है. इसकी मजबूत दीवारें, ऊंची और पारंपरिक निर्माण इसे दूसरी इमारतों से अलग बनाती है. वहीं लंबे समय से ये इमारत कैथल के इतिहास का अहम हिस्सा मानी जाती है.
इस महल का इस्तेमाल समय के साथ अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया गया. इस महल पर अंग्रेजों के शासन के समय उनका कब्जा हुआ करता था. वहीं आजादी के कुछ समय तक यहां भारतीय सेना का बेस कैंप रहा. उस समय यहां पर सेना की गाड़ियां और टैंक भी आते थे. तब यहां पर इनकी मरम्मत का काम किया जाता था.
एसडीएम से लेकर समाज कल्याण विभाग तक हुआ इस्तेमाल
सेना के जाने के बाद रानी महल में SDM कार्यालय बनाया गया. इसके बाद यहां पर तहसील कार्यालय चला. इसके बाद समाज कल्याण विभाग का ऑफिस भी यही पर चला. अलग-अलग सरकारी विभागों के इस्तेमाल के बाद भी इस ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया.
इस महल को लेकर ये भी कहा कि एक समय पुरातत्व विभाग ने भी इस इमारत को अपने अधीन लिया था. बाद में इसे सेना से जुड़ी जमीन होने के कारण वापस सौंप दिया गया, इसके बाद से महल के संरक्षण को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं.
ढाई एकड़ में फैला है परिसर
ढाई एकड़ में फैला हुआ है रानी महल का पूरा परिसर. वहीं पूर्व सैनिकों की वेलफेयर सोसाइटी लंबे समय से इसके संरक्षण की मांग कर रही है. सोसाइटी का कहना है कि परिसर में एक शहीदी स्मारक बनाया जा चुका है, लेकिन महल की इमारत की स्थिति लगातार खराब हो रही है. उनका आरोप है कि परिसर की जमीन पर धीरे-धीरे कब्जे की कोशिशें भी हो रही हैं. वहीं पूर्व सैनिकों का सुझाव है कि इस ऐतिहासिक परिसर को जनहित में इस्तेमाल किया जा सकता है. यहां सेना से जुड़ा संग्रहालय, बच्चों के लिए लाइब्रेरी या इतिहास से संबंधित केंद्र बनाया जा सकता है.
गर्मियों में भी ठंडा रहता है महल
इसकी सबसे खासियत वास्तुकला है. इसकी दीवारें करीब चार से पांच फीट तक मोटी बताई जाती. महल की छतें भी काफी ऊंची हैं. ये लकड़ी की मजबूत कड़ियों से बनी हैं. इन विशेषताओं के कारण गर्मियों में भी महल के अंदर का वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा रहता है.