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भारतीय कुश्ती के स्वर्णिम इतिहास में जींद की होनहार बेटी मनीषा भनवाला ने एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ दिया है. कजाकिस्तान के अस्ताना में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में अपनी प्रतिभा और अदम्य साहस का लोहा मनवाते हुए मनीषा ने स्वर्णिम सफलता हासिल की है. महिलाओं के 59 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की दिग्गज पहलवान एबिगेल नेट को एक कड़े और सांस रोक देने वाले मुकाबले में 8-6 से पराजित कर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही मनीषा विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली देश की पहली भारतीय महिला पहलवान बन गई हैं.
फाइनल मुकाबला शुरुआत से ही बेहद आक्रामक और रोमांच से भरा रहा. दोनों ही पहलवानों ने एक-दूसरे पर दांव-पेच आजमाते हुए बढ़त बनाने की हर संभव कोशिश की. शुरुआत में मुकाबला बराबरी का लग रहा था, लेकिन मनीषा ने अपने बेहतरीन मैटो-अवेयरनेस, सटीक तकनीक और गजब के मानसिक धैर्य का परिचय दिया. दबाव के क्षणों में भी मनीषा का आत्मविश्वास नहीं डगमगाया और उन्होंने मुकाबले के अंतिम पलों तक दो अंकों की बढ़त बनाए रखकर तिरंगा लहरा दिया.
मनीषा की ये सफलता केवल एक व्यक्तिगत ट्रॉफी या मेडल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय महिला कुश्ती के लिए एक नए युग की शुरुआत है. इससे पहले किसी भी भारतीय महिला पहलवान ने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक का सूखा नहीं खत्म किया था. मनीषा ने अपनी सालों की कड़ी तपस्या, अनुशासन और अटूट लगन से इस लंबे इंतजार को खत्म कर दिखाया है.
मनीषा भानवाला की ये ऐतिहासिक उपलब्धि देश की लाखों युवा महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी. सीमित संसाधनों से निकलकर विश्व पटल पर भारत का नाम रोशन करने की उनकी ये कहानी साबित करती है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है. उनकी इस स्वर्णिम जीत से न केवल जींद और हरियाणा, बल्कि पूरा देश गौरवान्वित महसूस कर रहा है.
जींद में मनीषा की सफलता से खुशी का माहौल है. साथ ही परिवार, गांव के लोगों उत्साह है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए गोल्ड मेडल जीतना उनकी मेहनत और खेल के प्रति समर्पण को दिखाता है. उनकी इस उपलब्धि से कुश्ती में करियर बनाने का सपना देखने वाली युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी.
(जींद गुलशन चावला की रिपोर्ट)