Haryana में एक महीने से हड़ताल पर सफाई कर्मचारी, कचरा उठान प्रभावित; सरकार और कर्मचारियों में नहीं बनी सहमति
हरियाणा में सफाई और फायर कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है, जिससे गुरुग्राम के कई इलाकों में सफाई व्यवस्था प्रभावित होने और कचरा जमा होने की शिकायतें सामने आ रही हैं.
Haryana Sanitation Worker Strike: पूरे हरियाणा समेत गुरुग्राम में नगर निगम के सफाई कर्मचारियों और फायर डिपार्टमेंट के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को एक महीना पूरा हो गया है. हड़ताल के दौरान गुरुग्राम के कई रिहायशी इलाकों में सफाई में रुकावट की शिकायतें सामने आ रही हैं. सेक्टर 54 के सनसिटी टाउनशिप और सेक्टर 56 समेत कई इलाकों में कचरा जमा होने से स्थानीय लोगों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं.
कुछ कर्मचारी हर दूसरे दिन ड्यूटी पर आ रहे हैं
सेक्टर 54 के सनसिटी टाउनशिप में कुछ कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी अब भी काम कर रहे हैं. हालांकि, कर्मचारियों की संख्या काफी कम हो गई है और कई रेगुलर तौर पर काम पर नहीं आ रहे हैं. नाम न बताने की शर्त पर एक कर्मचारी ने कहा कि हड़ताल के दौरान काम करने वाले भी दबाव में हैं. उनका आरोप है कि कुछ प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर कर्मचारियों की परेशानी का फायदा उठा रहे हैं. उनके मुताबिक, हड़ताल से पैदा हुई कमी को पूरा करने के लिए और कर्मचारी रखे गए थे, लेकिन उनमें से भी कई समय पर सैलरी न मिलने के कारण काम पर नहीं आ रहे हैं.
सनसिटी में 25 में से लगभग 8 कर्मचारी ही काम कर रहे
सनसिटी टाउनशिप RWA ने कहा है कि सफाई बनाए रखने के लिए और कर्मचारी रखे जाएंगे. इसके बावजूद, सभी कर्मचारी रेगुलर काम पर नहीं आ रहे हैं. MCG के एक सुपरवाइजर के मुताबिक, सनसिटी की सफाई का काम लगभग 25 कर्मचारी देखते हैं, लेकिन अभी सिर्फ आठ ही काम पर आ रहे हैं. उनका कहना है कि कुछ इलाकों में समय पर कचरा न उठाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं.
सेक्टर 56 में सड़क किनारे जमा हो रहा कचरा
हड़ताल का असर सेक्टर 56 के सफाई सिस्टम पर भी पड़ रहा है. सड़कों के किनारे और खाली प्लॉट के आसपास घरेलू कचरे के ढेर जमा होने की शिकायतें हैं. स्थानीय RWA अधिकारियों के मुताबिक, पिछले एक महीने में हालात और खराब हो गए हैं, खासकर मार्केट एरिया के आसपास, जिससे रहने वालों को परेशानी हो रही है.
MCG के एक सुपरवाइजर ने बताया कि हाल ही में सफाई का कॉन्ट्रैक्टर बदलने और कर्मचारियों के पेमेंट में देरी से भी समस्या और बढ़ गई है. उनके मुताबिक, कुछ कर्मचारियों को कई महीनों तक अपनी सैलरी का इंतजार करना पड़ा, जिससे कई लोगों ने काम पर आना बंद कर दिया.
हड़ताल के 30वें दिन कर्मचारियों का विरोध
हड़ताल के 30वें दिन शुक्रवार को बड़ी संख्या में सफाई और फायर डिपार्टमेंट के कर्मचारी इकट्ठा हुए. उन्होंने अपनी मांगों को लेकर प्रोटेस्ट किया और शनिवार को कैबिनेट मिनिस्टर और लोकल MLA राव नरबीर सिंह के सिविल लाइंस घर तक मार्च निकालने का ऐलान किया.
यूनियन लीडर्स ने भी प्रोटेस्ट कर रहे कर्मचारियों की कथित गिरफ्तारी और उनके खिलाफ की गई कार्रवाई पर नाराजगी जताई. उन्होंने सस्पेंशन और बर्खास्तगी के ऑर्डर वापस लेने की मांग की.
कर्मचारियों ने सरकार पर लगाया आरोप
नगर निगम कर्मचारी यूनियन की गुरुग्राम यूनिट के प्रेसिडेंट बसंत कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार कर्मचारियों की मांगों को लेकर अलग-अलग आंकड़े बता रही है. उन्होंने कहा कि स्थिति साफ करने के लिए कर्मचारियों की मांगों के बारे में एक लिखित ऑर्डर जारी किया जाना चाहिए.
उन्होंने सफाई और सीवर कर्मचारियों की रेगुलर भर्ती की मांग की, यह सवाल उठाया कि दूसरे कैडर में रेगुलर नियुक्तियों के बावजूद इन कर्मचारियों को लंबे समय के कॉन्ट्रैक्ट पर क्यों रखा जा रहा है.
फायर कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से भी विवाद बढ़ा
हरियाणा सरकार द्वारा 1 सितंबर को कुछ फायर सर्विस कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस और सस्पेंशन ऑर्डर जारी करने के बाद कर्मचारियों और प्रशासन के बीच तनाव बढ़ गया. यूनियन ने इसे कर्मचारियों पर दबाव बनाने की कार्रवाई बताते हुए सरकार से बातचीत के जरिए समाधान की मांग की.
MCG का दावा: दूसरे इंतजामों से सफाई का काम हो रहा
दूसरी ओर MCG कमिश्नर प्रदीप दहिया ने दावा किया कि हड़ताल से शहर के सफाई सिस्टम पर कोई खास असर नहीं पड़ा है. उनके मुताबिक, जहां भी कचरा जमा होने या सफाई न होने की शिकायतें मिलती हैं, वहां तुरंत एक टीम भेजकर समस्या का समाधान किया जाता है.
MCG का कहना है कि रोजाना की सफाई और कचरा उठाने के लिए दूसरे स्टाफ और दूसरे इंतजाम किए जा रहे हैं. कुछ सेक्टर के कुछ खास इलाकों में दिक्कतों को मानते हुए, अधिकारियों ने कहा कि ऐसे इलाकों को प्रायोरिटी के आधार पर कवर किया जा रहा है.
म्युनिसिपल अधिकारियों के मुताबिक, डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए नए टेंडर प्रोसेस के पूरा होने के बाद सफाई से जुड़ी कई दिक्कतें हल होने की उम्मीद है. उन्होंने यह भी कहा कि विरोध कर रहे कर्मचारियों से बातचीत और उनकी मांगों पर बातचीत जारी है.
कर्मचारियों ने शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल से सिविक सेवाओं में लगातार रुकावट के बारे में सवाल किए, वहीं उन्होंने सोशल जस्टिस एंड एम्पावरमेंट मंत्री कृष्ण बेदी की भी आलोचना की कि उन्होंने यूनियन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के बीच बातचीत कराने का अपना वादा पूरा नहीं किया.
स्ट्रक्चरल सुधारों की मांग करते हुए, बसंत कुमार ने पूछा, जब दूसरे कैडर रेगुलर तौर पर भर्ती किए जाते हैं तो सफ़ाई और सीवर कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्ट पर क्यों रखा जाता है?
द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बसंत कुमार ने कहा कि अगर कर्मचारियों की हालत नहीं सुधरी तो गुड़गांव पेरिस जैसा नहीं बन सकता. उन्होंने कहा, प्रदर्शन कर रहे वर्कर क्या मांग रहे हैं. उन्हें अभी जो 9,000-10,000 रुपये मिल रहे हैं, उससे बेहतर सैलरी और रेगुलराइजेशन? सिविक बॉडी फोटो खिंचवाने के लिए कुछ जगहें चुनकर शहर को साफ-सुथरा बता सकती है, लेकिन हम आपको भरोसा दिला सकते हैं कि एडमिनिस्ट्रेशन की लापरवाही से सफाई की हालत खराब हो रही है और बीमारियां फैल रही हैं.
MCG कमिश्नर प्रदीप दहिया ने दावा किया कि हड़ताल का शहर में कचरा और सफाई की हालत पर ज्यादा असर नहीं पड़ा है. द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी हमें कचरा जमा होने या सफाई न होने की शिकायत मिलती है तो हम तुरंत एक टीम भेजते हैं. हम रोजाना की सफाई और कलेक्शन के लिए हड़ताल कर रहे म्युनिसिपल वर्कर पर निर्भर नहीं हैं; हमारे पास एक मजबूत अल्टरनेटिव वर्कफोर्स और इंतजाम मौजूद हैं. जहां कुछ सेक्टर कुछ दिनों में प्रभावित होते हैं, हम उन मुद्दों को प्रायोरिटी पर सुलझा रहे हैं. एक बार डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन का टेंडर मिल जाने के बाद, उन मुद्दों को भी सुलझा लिया जाएगा.
MCG के सीनियर अधिकारियों ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे वर्कर से बातचीत चल रही है.