धान की फसल तैयार, लेकिन मंडी जाने को नहीं मिल रहा Gate Pass; Haryana में Portal Mismatch से किसान परेशान
हरियाणा में 'मेरी फसल मेरा ब्यौरा' पोर्टल और सैटेलाइट डेटा के मिसमैच के चलते करीब 25% किसानों का धान पंजीकरण अटका है, जिससे उन्हें मंडियों में फसल लाने के लिए गेट पास नहीं मिल पा रहा है.
Haryana News: हरियाणा प्रदेश में धान की आवक तेजी से शुरू हो चुकी है, लेकिन प्रदेश में हजारों एकड़ धान की फसल 'पोर्टल मिसमैच' के पेंच में फंसकर रह गई है. इस तकनीकी खामी के कारण किसानों को मंडियों में अपनी फसल लाने के लिए जरूरी ''गेट पास'' नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे अन्नदाता परेशान हैं. हालांकि, कृषि विभाग के अधिकारियों ने दावा किया है कि कर्मचारी इस त्रुटि को दूर करने में लगातार जुटे हैं और दो दिनों में यह समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी.
यमुनानगर जिले में भी इसी तरह के हालात है. इस तकनीकी समस्या की तह तक जाने पर यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा मामला सैटेलाइट से ली गई तस्वीरों और किसान द्वारा ''मेरी फसल मेरा ब्यौरा'' पोर्टल पर किए गए पंजीकरण के बीच आपसी मिलान (मैचिंग) न होने से जुड़ा है. यदि किसी किसान ने सरकारी पोर्टल पर अपनी जमीन पर धान की फसल दर्शाई है, लेकिन सैटेलाइट मैपिंग में वहां कोई अन्य फसल या स्थिति नजर आ रही है, तो सिस्टम उसे ''मिसमैच'' घोषित कर देता है. अक्सर भौतिक सत्यापन के दौरान यह साबित हो रहा है कि किसान द्वारा पोर्टल पर दी गई जानकारी बिल्कुल सही है, यानी तकनीकी रूप से सैटेलाइट इमेज या उसका डेटा ठीक से काम नहीं कर पा रहा है.
बता दें कि जिले में इस बार कुल 2,45,000 एकड़ भूमि में धान की फसल उगाई गई है, जिसका डेटा पोर्टल पर पंजीकृत हुआ था. इसमें से अभी तक 75 प्रतिशत किसानों का डेटा सफलतापूर्वक मैच हो चुका है, लेकिन लगभग 25 प्रतिशत किसानों का डेटा अभी भी मिसमैच की श्रेणी में अटका हुआ है.
उप कृषि निदेशक डॉ. आदित्य डबास ने बताया कि जिन इलाकों का डेटा मिसमैच बता रहा है, वे अधिकांशतः यमुना नदी के आसपास के सीमावर्ती क्षेत्र हैं, जहां नेटवर्क की भी समस्या बनी रहती है. राजस्व विभाग और कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मिलकर इस डेटा को दुरुस्त करने में जुटे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो दिनों में यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा.
दूसरी ओर, किसान नेता सतपाल कौशिक ने कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया 31 जुलाई को ही बंद हो चुकी थी. यदि पोर्टल और सैटेलाइट के डेटा में अंतर था तो इन दो महीनों के दौरान राजस्व और कृषि विभाग को इस पर काम करना चाहिए था. किसान नेता ने मुख्यमंत्री से मांग की कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कार्रवाई जाए.
तीन दिन पहले हरियाणा के खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेश नागर ने भी हरियाणा की मंडियों के साथ यमुनानगर की मंडी का दौरा करते हुए दावा किया था कि अगले दो दिन में इस समस्या का समाधान हो जाएगा, लेकिन अभी तक जमीनी हकीकत कुछ और है. अब भी अधिकारी दो दिन और लगने की बात कह रहे हैं.
मिसमैच का कारण जो भी हो, इसका खामियाजा तो किसानों को भोगना पड़ रहा है. किसान परेशान है. धान की फसल तैयार है. उसे मंडी में नहीं आने दिया जा रहा, क्योंकि किसानों के पास गेट पास नहीं है. गेट पास इसलिए नहीं है क्योंकि उनकी धान की फसल और पोर्टल मिसमैच में फंसा हुआ है.
कब मिलेगा इस समस्या से छुटकारा? कब अन्नदाता ला पाएंगे अपनी धान मंडी में? अब देखना होगा क्या है यह समस्या दो दिन में हाल हो जाएगी ?
(यमुनानगर से कुलवंत सिंह की रिपोर्ट)