Haryana में यहां 400 साल पुराना मां काली का मंदिर, जहां रौद्र नहीं शीतल स्वरूप में होते हैं देवी के दर्शन, जानें क्या है इतिहास
हरियाणा के हांसी स्थित करीब 400 साल पुराने श्री काली देवी मंदिर में नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है, जहां मां काली विकराल नहीं बल्कि अपने अनोखे शीतल स्वरूप के लिए प्रसिद्ध हैं. माता का ऐसा स्वरूप भारत के बहुत कम मंदिरों में देखने को मिलता है. ऐसे मंदिरों की गिनती करना भी मुश्किल है.
Hansi News: नवरात्र के पावन दिनों में हांसी के ऐतिहासिक श्री काली देवी मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिल रही है. करीब 400 साल पुराने इस प्रसिद्ध मंदिर में मां काली के दर्शन के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त पहुंच रहे हैं. काली देवी चौक स्थित इस मंदिर की मान्यता केवल देश तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में रहने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी मंदिर के प्रति गहरी आस्था है.
आपको बता दे कि मंदिर की सबसे खास बात यहां मां काली का स्वरूप है. आमतौर पर अन्य मंदिरों में मां काली के रौद्र रूप के दर्शन होते हैं, जहां माता की जीभ बाहर निकली हुई दिखाई देती है. वहीं हांसी के इस ऐतिहासिक मंदिर में मां काली शीतल स्वरूप में विराजमान हैं. यही विशेषता मंदिर को अलग पहचान देती है और श्रद्धालुओं की आस्था को और गहरा करती है.
क्या है श्री काली देवी मंदिर का इतिहास?
हांसी में श्री काली देवी मंदिर की स्थापना को लेकर वहां के लोगों में अलग-अलग मान्यताएं हैं. माना जाता है कि करीब 300-400 साल पहले देवी काली का एक भक्त उन्हें यहां लाया था और अपनी इच्छा के अनुसार उन्हें स्थापित किया था. एक और मान्यता यह है कि एक संत ने महाकाली को लोगों की भलाई के लिए हांसी की रानी के रूप में देखा था.
मंदिर की स्थापना को लेकर एक और कहानी भी सुनी जाती है. इसके अनुसार, कभी इस इलाके में एक आर्मी कैंप था, जहां बंगाली सैनिक तैनात थे. ये सैनिक देवी काली की पूजा करना चाहते थे. कहा जाता है कि इन्हीं आर्मी अफसर में से एक मेजर ने श्मशान घाट में श्री काली देवी मंदिर की स्थापना की और पूजा शुरू की. हालांकि, मंदिर की स्थापना से जुड़ी इन कहानियों के बारे में कोई साफ ऐतिहासिक सबूत मौजूद नहीं है.
नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. भक्त मां के दरबार में पहुंचकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं. कई श्रद्धालु ऐसे भी हैं, जो वर्षों से लगातार नवरात्र में मां के दर्शन करने पहुंचते हैं.
मंदिर के पुजारी श्याम पांडे ने बताया कि मां काली के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है. दूर-दूर से भक्त माता के दर्शन करने आते हैं. उन्होंने कहा कि अन्य स्थानों पर मां काली की प्रतिमा में जीभ बाहर दिखाई देती है, जबकि हांसी के मंदिर में माता का स्वरूप अलग है और वह शीतल रूप में विराजमान हैं.
भक्त भारत भूषण भयाना ने बताया कि उन्हें मां काली के प्रति गहरी आस्था है और वह लगातार कई वर्षों से माता के दर्शन करने आ रहे हैं. नवरात्र के दौरान मां के दरबार में आकर उन्हें विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है.
वहीं अन्य भक्तजन रामावतार बंसल ने बताया कि वह मुंबई से विशेष रूप से मां काली के दर्शन करने पहुंचे हैं. उन्होंने कहा कि उनकी माता के प्रति गहरी श्रद्धा है और वह हर साल नवरात्र के अवसर पर मां के दर्शन करने आते हैं.
हांसी का श्री काली देवी मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी ऐतिहासिक पहचान और मां काली के अनूठे शीतल स्वरूप के लिए भी प्रसिद्ध है. नवरात्र के दिनों में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाकर सुख-शांति और खुशहाली की कामना कर रहे हैं.
DISCLAIMER: ये लेख सामान्य जानकारी और लोगों द्वारा बताई गई कहानियों पर आधारित है, इसकी ज़ी मीडिया पुष्टि नहीं करता है.
(हांसी से नवीन शर्मा की रिपोर्ट)