SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

नकली बीज से बर्बाद हुई फसल, 3 साल काटे कोर्ट के चक्कर, फैसला आया तो रह गया हैरान

हरियाणा के फरीदाबाद से एक मामला सामने आया है, जहां एक किसान की पूरी फसल बर्बाद हो गई. 3 साल कोर्ट के चक्कर काटने के बाद भी इंसाफ नहीं मिला. फसल ऐसी थी कि मार्केट में कोई खरीदने को तैयार नहीं हुआ.

Written By Akanchha Singh
Published: Oct 18, 2026, 10:00 AM IST | Updated: Oct 18, 2026, 10:08 AM IST
Join

फरीदाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो किसानों के साथ-साथ न्याय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है. नकली बीज से एक किसान की पूरी फसल तो बर्बाद हुई हो गई. 3 साल तक कोर्ट के धक्के खाने के बाद इंसाफ मिला भी तो वो नाइंसाफी से कम नहीं था. पीड़ित किसान ने अब खुद ही कहा है कि कोर्ट जाना घाटे का सौदा है.

मूली क्यों किसी ने मार्केट में नहीं खरीदा?  
किसान रामेश्वर शर्मा का फरीदाबाद में खेत हैं. यहां पर 2023 में मूली की फसल बोई गई थी, लेकिन फसल ऐसी थी कि मार्केट में कोई खरीदने को तैयार नहीं हुआ. किसान रामेश्वर शर्मा ने नवंबर 2023 में फरीदाबाद के भारत बीज भंडार से टाइकोन वैरायटी का मूली का बीज खरीदा था. साथ ही 60 हजार रुपये में एक एकड़ खेत किराए पर लिया था. इसके बाद खाद, जुताई और बीज का खर्चा अलग किया. किन बोने के 20 दिन बाद ही फसल में से बालियां निकलने लगीं, मूली बनी ही नहीं.  मूली बाजार में ले गए तो कोई पूछता नहीं था.

फरीदाबाद उपभोक्ता फोरम में केस दायर किया
दुकानदार और कंपनी के सर्वेयर ने खुद माना कि 90 प्रतिशत मिलावट है, किसान ने दुकानदार से समझौता करने के बजाय उसे सबक सिखाने के लिए फरीदाबाद उपभोक्ता फोरम में केस दायर कर दिया.  रामेश्वर ने फसल के नुकसान, मानसिक परेशानी और वकील के खर्च को मिलाकर 2 लाख रुपए मुआवजे की मांग की. लेकिन ये इतना आसान नहीं था. 2023 से 2026 तक, 3 साल में 15 से 20 तारीख लगीं, वकील को 10-20 हजार रुपए फीस दी और अंत में जब फैसला आया तो किसान के होश उड़ गए.

ये भी पढ़ें- Haryana में सर्दी ने दी दस्तक, 5 डिग्री तक गिरा तापमान; जानें अगले 7 दिन का मौसम 

कितना मिला मुआवजा? 
कोर्ट ने दुकानदार को दोषी तो माना, लेकिन मुआवजा सिर्फ 50 हजार दिया. किसान का कहना है की अब 50 हजार में क्या होगा 3 साल कोर्ट के धक्के खाए, इससे अच्छा तो मैं कंपनी के 40-50 हजार ले लेता. फैसले से दुखी रामेश्वर ने अब पंचकूला में अपील करने से भी इनकार कर दिया है. किसान के अनुसार,  400 किलोमीटर दूर जाने में ही 50 हजार और लग जाएंगे. साथ ही किसान ने न्याय व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं, किसान का कहना है की लगता है कहीं न कहीं ज्यूडिशरी भी कंपनियों के दबाव में है, मैं किसानों को कहूंगा कि अगर कंपनी पैसा दे दे तो ले लो, कोर्ट जाने की जरूरत नहीं, ये घाटे का सौदा है. 

(फरीदाबाद से जय प्रकाश की रिपोर्ट)

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

जी-न्यूज में ट्रेनी सब एडिटर. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर हरियाणा डिजिटल टीम में दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा की राजनीति, हाइपर लोकल, क्राइम की खबरों पर नजर. यूटिलीटी की खबरों में दिलचस्पी है. 2023 में संस्थान से जुड़े. माखन लाल चतुर्वेदी भोपाल से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES