Asian Games 2026: हरियाणा के हिमांशु ढिल्लों ने शूटिंग में जीते 2 सिल्वर मेडल, गांव में जश्न
हरियाणा के जींद के निशानेबाज हिमांशु ढिल्लों ने एशियन गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 मीटर एयर राइफल के टीम और व्यक्तिगत इवेंट में दो सिल्वर मेडल जीते. उनकी इस उपलब्धि से पैतृक गांव में खुशी का माहौल है.
Haryana News: जापान के नगोया में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में हरियाणा के जींद जिले के गांव डाहौला निवासी हिमांशु ढिल्लों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए निशानेबाजी में दो सिल्वर मेडल अपने नाम किए. हिमांशु ने 10 मीटर एयर राइफल के 'टीम इवेंट' और 'इंडिविजुअल (व्यक्तिगत) इवेंट' दोनों में यह दोहरी सफलता हासिल की. टीम इवेंट में हिमांशु ढिल्लों के साथ पार्थ राकेश माने और रुद्राक्ष बालासाहेब पाटिल ने सफलता हासिल की.
जैसे ही हिमांशु की इस जीत की सूचना उनके पैतृक गांव डाहौला पहुंची, पूरा गांव जश्न में डूब गया. ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के साथ परिजनों को बधाई देने वालों का तांता लग गया. ग्रामीणों ने घोषणा की है कि हिमांशु के गांव लौटने पर उनका भव्य नागरिक अभिनंदन किया जाएगा.
प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हिमांशु को बधाई देते हुए कहा कि हिमांशु की इस असाधारण उपलब्धि पर पूरे हरियाणा और देश को गर्व है.
हिमांशु की दादी बीरमति ने भावुक होकर खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, पोते ने मेरा बहुत बड़ा सपना पूरा कर दिया. रात 9 बजे से दिल थामकर टीवी के आगे बैठे थे कि छोरा जीतेगा या हारेगा. वह बेहद सीधा और देवता जैसा बच्चा है. बचपन से ही उसने दिन-रात मेहनत की है. अब हमारा एक ही सपना है, वह ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड मेडल लेकर आए.
वहीं उनके चाचा संदीप ढिल्लों ने उनकी इस प्रेरणादायक यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि शुरुआत में हिमांशु और उनके भाई को पुंडरी गुरुकुल भेजा गया था, जहां हिमांशु को कुश्ती का जुनून सवार हुआ. हालांकि, अभ्यास के दौरान चोट लग जाने के कारण उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी. इसके बाद हिमांशु ने शूटिंग को चुना. पुंडरी गुरुकुल में ही उनकी मुलाकात कोच कुलदीप जी से हुई. जब कोच कैथल के ''नैरा शूटिंग क्लब'' में शिफ्ट हुए तो हिमांशु भी कैथल आ गए. बाद में बेहतर प्रशिक्षण और राष्ट्रीय स्तर के कैंपों के लिए वे दिल्ली चले गए.
खेतीबाड़ी करने वाले चाचा संदीप ने बताया कि परिवार के पास कुल 6 किले जमीन है. सीमित साधनों के बावजूद परिवार ने हिमांशु के खेल और खर्चों में कभी कोई कमी नहीं आने दी. उन्होंने कहा, हमें इस दिन का वर्षों से इंतजार था. बेटे ने हमारी मेहनत और त्याग को सफल कर दिया.
उनकी चाची किरण ने बताया कि शूटिंग की ट्रेनिंग और पढ़ाई को सुचारू रखने के लिए उनका संयुक्त परिवार कैथल शिफ्ट हो गया था. उन्होंने कहा, मैच में बहुत कड़ा मुकाबला था और पॉइंट लगातार ऊपर-नीचे हो रहे थे, लेकिन हिमांशु की मेहनत रंग लाई. हिमांशु को खाने में दूध, दही, घी और हरियाणा का पारंपरिक चूरमा बेहद पसंद है. परिवार का कहना है कि अब उनका अगला और मुख्य लक्ष्य हिमांशु को ओलंपिक के मंच पर स्वर्ण पदक जीतते देखना है.
(जींद से गुलशन चावला की रिपोर्ट)