सुभाष चंद्रा फाउंडेशन बॉक्सिंग ट्रेनिंग सेंटर के अंकुश पंघाल ने रचा इतिहास, एशियन गेम्स में जीता गोल्ड
Haryana: सुभाष चंद्रा फाउंडेशन बॉक्सिंग ट्रेनिंग सेंटर, गांव गंगवा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले अंकुश की यह जीत हरियाणा के बॉक्सिंग खेल के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है. 21 साल की उम्र में एशियन गेम्स का स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ा अध्याय जोड़ दिया है.
हरियाणा के हिसार के रहने वाले 21 वर्षीय मुक्केबाज अंकुश पंघाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों के 80 किग्रा भारवर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. जापान में चल रहे एशियन गेम्स में अंकुश ने फाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग को 4-0 से हराया. अंकुश सुभाष चंद्रा फाउंडेशन बॉक्सिंग ट्रेनिंग सेंटर, गांव गंगवा से प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ी हैं. कम उम्र में ही उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है.
अंकुश का जन्म 13 अगस्त 2005 को हरियाणा के हिसार के बेरिया में हुआ था. वह पुरुषों के 80 किग्रा भारवर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं. रिंग में उनकी तेज मूवमेंट, काउंटर अटैक और मुकाबले के दौरान रणनीति बदलने की क्षमता को उनकी बड़ी ताकत माना जाता है. एशियन गेम्स का स्वर्ण उनके तेजी से आगे बढ़ते अंतरराष्ट्रीय करियर में एक और बड़ी उपलब्धि है.
शानदार रहा सफर.. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमके
अंकुश ने 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में 80 किग्रा वर्ग में हिस्सा लिया था. नई दिल्ली में हुई इस प्रतियोगिता में उन्होंने रजत पदक जीता. फाइनल में उन्हें इंग्लैंड के ओलादेमिजी शिट्टू के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा. हालांकि, रजत पदक के साथ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता का मजबूत परिचय दिया.
इसके बाद 2026 में अंकुश ने अपने प्रदर्शन को और बेहतर किया. जुलाई में उन्होंने चेकिया के उस्ती नाद लाबेम ग्रां प्री में 80 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक जीता. इसके बाद उनके करियर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी, जब उन्होंने ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 80 किग्रा वर्ग का स्वर्ण पदक अपने नाम किया.
कॉमनवेल्थ में पिछड़कर की थी वापसी
कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में अंकुश का सामना इंग्लैंड के डाइमेजी शिट्टू से हुआ. मुकाबले की शुरुआत उनके लिए मुश्किल रही और वह पहले राउंड में 0-5 से पिछड़ गए. इसके बावजूद उन्होंने धैर्य नहीं खोया. अंकुश ने अगले दोनों राउंड में वापसी की और मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया. उन्होंने 4-1 के स्प्लिट डिसीजन से जीत दर्ज करते हुए 80 किग्रा वर्ग का कॉमनवेल्थ स्वर्ण पदक जीता.
एशियन गेम्स में शानदार सफर
एशियन गेम्स 2026 में भी अंकुश ने शुरुआत से ही मजबूत प्रदर्शन किया. क्वार्टर फाइनल में उन्होंने ताजिकिस्तान के नेकर्ज सलिमोव को 5-0 से हराया. इस जीत के साथ उन्होंने भारत के लिए मुक्केबाजी में पदक पक्का किया और सेमीफाइनल में जगह बनाई.
सेमीफाइनल में अंकुश के सामने उज्बेकिस्तान के फजलीद्दीन एरकिनबोएव थे. एरकिनबोएव 75 किग्रा वर्ग के मौजूदा विश्व चैंपियन रहे हैं. मुकाबले की शुरुआत में अंकुश कुछ पीछे रहे, लेकिन उन्होंने फिर अपनी रणनीति बदली और जोरदार वापसी की. उन्होंने 4-1 से मुकाबला जीतकर फाइनल में प्रवेश किया.
फाइनल में दिखाया दम
फाइनल में अंकुश के सामने दक्षिण कोरिया के किम मिनसियोंग थे. दोनों मुक्केबाजों के बीच मुकाबले में अंकुश ने शुरुआत से ही नियंत्रण बनाए रखा. उन्होंने अपने तेज मूवमेंट और सटीक पंचों के दम पर मुकाबला 4-0 से अपने नाम किया. इस जीत के साथ अंकुश ने 80 किग्रा भारवर्ग का एशियन गेम्स स्वर्ण पदक जीत लिया.
लगातार बड़ी जीत
अंकुश की हालिया उपलब्धियों को देखें तो उनका सफर लगातार ऊपर जाता नजर आता है. 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल्स में रजत पदक के बाद उन्होंने 2026 में उस्ती नाद लाबेम ग्रां प्री का स्वर्ण जीता. इसके बाद ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण और अब एशियन गेम्स में गोल्ड उनके खाते में जुड़ गया है.
सुभाष चंद्रा फाउंडेशन बॉक्सिंग ट्रेनिंग सेंटर, गांव गंगवा से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाले अंकुश की यह जीत हरियाणा के बॉक्सिंग खेल के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है. 21 साल की उम्र में एशियन गेम्स का स्वर्ण जीतकर उन्होंने अपने करियर में एक और बड़ा अध्याय जोड़ दिया है.