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गोल्डन एरा या वही पुराने फॉर्मूले? OTT की दुनिया में घिसे-पिटे पैटर्न पर जीशान अय्यूब का तंज, बोले- 'प्रॉब्लम ये है कि हम हीरो की पूजा करते हैं’

Zeeshan Ayyub On OTT Trends: मोहम्मद जीशान अय्यूब ने हाल ही में इंडिया के मौजूदा ओटीटी प्लेटफॉर्म की कहानियों पर खुलकर बात की है. उन्होंने बताया कि स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर नए एक्सपेरिमेंट की गुंजाइश के बावजूद, कंटेंट अब भी पुराने फॉर्मूलों और स्टार सिस्टम से प्रभावित है. एक्टर ने सवाल उठाया कि ऑडियंस और इंडस्ट्री के बीच हीरो-सेंट्रिक वाली सोच आखिर कब बदलेगी.

Written By Jyoti Rajput
Published: Sep 25, 2026, 07:31 AM IST | Updated: Sep 25, 2026, 08:07 AM IST
Image Credit: OTT की दुनिया में घिसे-पिटे पैटर्न पर जीशान अय्यूब का बयान
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OTT के आने के बाद इंडियन एंटरटेनमेंट की दुनिया में काफी कुछ बदला है. अब ऐसे कई कलाकारों को भी वेब सीरीज में दमदार किरदार मिल रहे हैं, जिन्हें फिल्मों में लंबे समय तक बड़ी भूमिकानओं का इंतजार करना पड़ता था. इसी वजह से ओटीटी के दौर को कलाकारों के लिए गोल्डन एरा यानी सुनहरा दौर कहा जाने लगा है. लेकिन फिल्म 'रांझणा' फेम एक्टर मोहम्मद जीशान अय्यूब इस बात से पूरी तरह से सहमत नहीं हैं. उनके अनुसार, सिर्फ कुछ कलाकारों को लगातार काम मिल रहा है, इसलिए पूरे दौर को गोल्डन एरा कहना सही नहीं होगा. उन्होंने आगे कहा कि स्ट्रीमिंग के बावजूद इंडस्ट्री पूरी तरह पुराने ढर्रे से बाहर नहीं निकल पाई है.

जीशान अय्यूब फिलहाल अपनी वेब सीरीज 'हुंकार' को लेकर बात की, जो 25 सिंतबर को जियोहॉटस्टार पर रिलीज हो रही है. सीरीज की रिलीज से पहले उन्होंने HT, से बातचीत में स्ट्रीमिंग के बदलते दौर और कलाकारों को मिल रहे मौकों पर अपनी बात रखी. उनका मानना है कि पहले भी अच्छे किरदार लिखे जाते थे और ये कहना कि अच्छे रोल सिर्फ ओटीटी के आने के बाद ही मिलने शुरू हुए, सही नहीं होगा.

'हम हीरो की पूजा करते हैं...'

एक्टर जीशान अय्यूब ने इस बातचीत में कहा, 'पहले भी अच्छे रोल लिखे जाते थे. लोग मुझे ये कहने पर नेगेटिव सोचने वाला इंसान समझते हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग पर भी हमें एक नया स्टार सिस्टम देखने को मिल रहा है. यही हमारी आदत है. हमारी प्रॉब्लम ये है कि हम हीरो की पूजा करते हैं. इसलिए हम स्टार बनाते हैं.' जीशान की नजर में ओटीटी भले ही फिल्मों से अलग और ज्यादा इंडिपेंडेंट माना जाता हो, लेकिन यहां भी धीरे-धीरे कुछ तय पैटर्न बनते जा रहे हैं. उनका कहना है कि आजकल कई कहानियां एक जैसे फॉर्मूले के आसपास घूमती दिखाई देती हैं.

एक्टर ने आगे कहा, 'आजकल ओटीटी पर क्या चलता है, उसे देखिए. सबसे पहले तो वो थ्रिलर होनी चाहिए. नहीं तो, किसी गांव की कहानी होनी चाहिए. तीन-चार पैटर्न हैं. या तो पुलिस हीरो होती है और चोर को पकड़ती है, या फिर चोर हीरो होता है और पुलिस से बच निकलता है.' यानी जिस तरह फिल्मों में लंबे समय तक कुछ खास फॉर्मूले ऑडियंस के बीच चलते रहे, जीशान को लगता है कि ओटीटी भी अब उसी दिशा में बढ़ रहा है.

गोल्डन एरा या वही पुराने फॉर्मूले?

यहीं से गोल्डन एरा वाली बहस दिलचस्प हो जाती है. एक तरफ ओटीटी ने कई नए चेहरों और कलाकारों को अपनी पहचान बनाने का मौका दिया है, तो दूसरी तरफ जीशान का कहना है कि स्टार सिस्टम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. उनके मुताबिक, पहले फिल्मों में स्टार के नाम पर कहानी आगे बढ़ती थी और अब स्ट्रीमिंग में भी पॉपुलर चेहरों के आसपास प्रोजेक्ट तैयार होने लगे हैं. उनका सवाल यही है कि अगर एक प्लेटफॉर्म पुराने स्टार सिस्टम से निकलकर नए स्टार सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है, तो फिर इसे पूरी तरह बदलाव का दौर कैसे माना जाए?

फिल्मों में भी दिखा चुके हैं अपनी रेंज

जीशान अय्यूब ने फिल्मों और वेब सीरीज, दोनों तरह के कंटेंट में काम किया है और अपने अलग तरह के किरदारों के लिए पहचाने गए. ‘रांझणा’, ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’, ‘आर्टिकल 15’ और ‘रईस’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं. वो सिर्फ एक तरह के रोल तक सीमित रहने वाले कलाकार नहीं रहे हैं. फिल्मों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उन्होंने काम किया है, इसलिए स्ट्रीमिंग के बदलाव को उन्होंने काफी करीब से देखा है. यही वजह है कि जब वो ओटीटी के मौजूदा फॉर्मूलों या स्टार सिस्टम की बात करते हैं, तो उनके एक्सपीरियंस में सिनेमा और स्ट्रीमिंग दोनों की दुनिया शामिल है.

'मैं खुशकिस्मत हूं, लेकिन क्या उन्हें भी ऐसा लगता है'

जब जीशान से पूछा गया कि क्या वो भी मौजूदा दौर को बाकी कलाकारों की तरह गोल्डन पीरियड मानते हैं, तो उन्होंने अपने एक्सपीरियंस को दूसरे एक्टर्स की स्थिति से अलग करके देखने की बात कही. वो मानते हैं कि उन्हें लगातार काम मिल रहा है और इस लिहाज से वो खुद को खुशकिस्मत समझते हैं. लेकिन उनके मुताबिक, इस सवाल का जवाब सिर्फ उन कलाकारों से नहीं पूछा जाना चाहिए जिनके पास लगातार प्रोजेक्ट हैं. 

उन्होंने कहा, 'मैं मानता हूं कि मैं बहुत भाग्यशाली हूं. हम सभी हैं. बात ये है कि ये सवाल हमसे पूछे जाते हैं, जिन्हें काम मिल रहा है. चूंकि मुझे काम मिल रहा है, इसलिए मुझे लगता है कि ये गोल्डन एरा है. इस सवाल का जवाब उन लगभग एक लाख लोगों को देना चाहिए, जो अभी भी काम पाने के लिए स्ट्रगल कर रहे हैं. मेरे पास इतना काम है कि मैं खाली नहीं बैठ सकता, इसलिए मुझे लगता है कि ये सबसे अच्छा समय है. लेकिन क्या उन्हें भी ऐसा ही लगता है?'.

सवाल सिर्फ काम मिलने का नहीं, मौके मिलने का भी है

जीशान की बात का सबसे अहम हिस्सा यही है कि किसी भी दौर को सिर्फ उन लोगों के एक्सपीरियंस से नहीं देखा जाना चाहिए, जिन्हें लगातार काम मिल रहा है. ओटीटी ने कई कलाकारों के लिए नए रास्ते जरूर खोले हैं, लेकिन इसके साथ ही कुछ नए फॉर्मूले और स्टार सिस्टम भी उभरते दिखाई दे रहे हैं. जीशान के मुताबिक, असली बदलाव तब माना जाएगा, जब ज्यादा से ज्यादा कलाकारों को अपना टैलेंट दिखाने के मौके मिलें और कहानियां कुछ तय पैटर्न से आगे बढ़ाएं. फिलहाल 'हुंकार' के जरिए जीशान एक बार फिर डिजिटल दुनिया में नजर आने वाले हैं, लेकिन उनकी बातें ओटीटी के मौजूदा दौर और उसके बदलते मिजाज पर एक बड़ा सवाल जरूर छोड़ जाती हैं.
 

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About the Author

ज्योति सिंह राजपूत जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले 1 साल से ज्यादा से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. दैनिक जागरण प्रिंट और सहारा न्यूज नेटवर्क में ट्रेनिंग लेने के बाद अब Zee News में काम कर रही हैं. कुछ समय तक लाइफस्टाइल की खबरों में काम करने के बाद अब एंटरटेनमेंट में काम कर रही हैं. वहीं हॉलीवुड की खबरों और फिल्मों पर पैनी नजर रखती हैं. उन्होंने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी (MCU) से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री हासिल की है. आप Jyoti.Rajput@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं.
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