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मुंबई के पॉश इलाके जुहू के पुष्पा नारसी फुटबॉल ग्राउंड के बाहर तीन अज्ञात हमलावरों द्वारा हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता जैकी श्रॉफ के बेटे और एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुए जानलेवा हमले ने फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ पूरे देश को दहला दिया. वो पल एक्टर के लिए कितना भयानक रहा होगा जब उनके ऊपर चारों तरफ से गोलियां बरसाई जा रही थीं और आस-पास कई लोगों ने उस खौफनाक मंजर को अपनी आंखों देखा, कैमरे में कैद किया, जिसके ढेरों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इस हमले में टाइगर और उनके 48 साल के ड्राइवर फिरदौस इब्राहिम बलोच दोनों घायल हो गए.
हमले के तुरंत बाद घायल होते हुए भी टाइगर खुद गाड़ी चलाकर सीधे सांताक्रूज पुलिस स्टेशन पहुंचे. इसके बाद पुलिस दोनों को इलाज के लिए नानावती अस्पताल लेकर गई, जहां दोनों का इलाज किया गया. इस मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई हैरान करने वाले खुलासे हो रहे हैं. मुंबई पुलिस और द इंडियन एक्सप्रेस के सूत्रों के मुताबिक, ये हमला अचानक नहीं हुआ था, बल्कि इसके पीछे एक शार्प प्लानिंग थी. पुलिस ने जब ग्राउंड के आसपास लगे CCTV फुटेज खंगाली और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स की जांच की, तो पता चला कि ये तीनों हमलावर घटना से ठीक एक हफ्ते पहले यानी 11 अक्टूबर को भी उसी जगह मंडरा रहे थे.

पुलिस अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हमलावर 11 अक्टूबर को ही इस वारदात को अंजाम देने के इरादे से आए थे, लेकिन उस रविवार को टाइगर फुटबॉल खेलने ग्राउंड पर नहीं आए थे, जिसकी वजह से हमलावर वहां से खाली हाथ लौट गए थे. अब पुलिस इस मामले में हर एंगल से तहकीकात कर रही है. जांच में शामिल एक पुलिस अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हमलावरों को टाइगर के रूटीन की पूरी जानकारी थी.
टाइगर श्रॉफ को फुटबॉल खेलने का बहुत शौक है और वे हर रविवार शाम 5 से 7 बजे के बीच पुष्पा नारसी ग्राउंड पर आते हैं. हमलावरों को उनके इस फिक्स शेड्यूल की भनक थी. 11 अक्टूबर को भी तीनों आरोपी तय समय पर पहुंचे थे. जब टाइगर नहीं पहुंचे, तो उनका प्लान फेल हो गया और उन्हें लौटना पड़ा. इसके बाद 18 अक्टूबर यानी इस रविवार को आरोपी पूरी तैयारी के साथ शाम करीब साढ़े 4 बजे ही ग्राउंड के बाहर पहुंच गए.
CCTV फुटेज में साफ दिखाई दे रहा है कि वे बार-बार गेट तक जाते और अंदर झांककर देखते कि टाइगर वहां पहुंचे हैं या नहीं. वे करीब ढाई घंटे तक गेट के आसपास ही घूमते रहे और सही मौके का इंतजार करते रहे. पुलिस को पक्का शक है कि ग्राउंड के अंदर या आसपास कुछ और लोग भी मौजूद थे, जो शूटरों को टाइगर की हर मूवमेंट की खबर दे रहे थे.
टाइगर श्रॉफ जब अपना फुटबॉल खेलने का गेम खत्म करके शाम करीब 7 बजे ग्राउंड से बाहर निकले, तभी हमलावरों ने अपनी साजिश को अंजाम दिया. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि शूटरों का मकसद टाइगर श्रॉफ और उनके ड्राइवर दोनों को जान से खत्म करना था. इस हमले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब ग्राउंड के आसपास लगे सभी कैमरों के फुटेज और उस समय के मोबाइल टावर डेटा की बारीकी से जांच कर रही है, ताकि इन शूटरों तक जल्द से जल्द पहुंचा जा सके.
वारदात के वक्त ग्राउंड पर टाइगर के साथ मौजूद उनके एक दोस्त ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि शुरुआत में किसी को अंदाजा ही नहीं हुआ कि गोलियां चली हैं. उन्होंने बताया कि ग्राउंड में खेल रही एक दूसरी टीम ने कुछ ही मिनट पहले अपने साथी का जन्मदिन मनाने के लिए पटाखे फोड़े थे. इसी वजह से जब बाहर गोलियों की आवाज गूंजी, तो अंदर मौजूद लोगों ने समझा कि कोई दोबारा पटाखे चला रहा है. किसी ने सोचा भी नहीं था कि बाहर टाइगर पर हमला हो रहा है.
दोस्त ने आगे बताया कि कुछ ही सेकंड में बाहर चीख-पुकार मच गई. लोग चिल्लाने लगे कि दो लड़कों ने टाइगर पर गोलियां चला दी हैं और उनके ड्राइवर को गोली लग गई है. ये सुनते ही वे दौड़कर गेट की तरफ भागे. उन्होंने देखा कि टाइगर अपनी सीट से हटकर ड्राइविंग सीट पर बैठ चुके थे. दोस्त ने कहा कि इससे पहले कि वे टाइगर से कुछ बात कर पाते या उनका हाल पूछ पाते, टाइगर ने गाड़ी आगे बढ़ा दी और तेजी से वहां से निकल गए.

दोस्त ने आगे बताया कि टाइगर स्वभाव से बेहद शांत और मिलनसार इंसान हैं. उनकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं हो सकती. घटना के बाद वे दो और साथियों के साथ सीधे नानावती अस्पताल पहुंचे, जहां टाइगर को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया था. उन्होंने बताया कि घटना के करीब एक घंटे बाद टाइगर की मां, उनकी बहन और कुछ बेहद करीबी पारिवारिक दोस्त भी अस्पताल पहुंच गए थे. उस वक्त अस्पताल में सभी लोग काफी डरे हुए और परेशान नजर आ रहे थे.
इस मामले में FIR टाइगर के ड्राइवर फिरदौस इब्राहिम बलोच की शिकायत पर दर्ज की गई है. 48 साल के फिरदौस जोगेश्वरी के रहने वाले हैं और पिछले 28 सालों से श्रॉफ परिवार के साथ वफादारी से काम कर रहे हैं. FIR के मुताबिक फिरदौस बीएमडब्ल्यू कार चला रहे थे. जैसे ही कार ग्राउंड के गेट से बाहर निकलकर बाईं तरफ मुड़ी, सामने और बाईं तरफ खड़े दो शूटरों ने अचानक कार पर सामने से और साइड से अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं.
FIR में फिरदौस ने हमलावरों का पूरा हुलिया भी पुलिस को बताया है. उन्होंने बताया कि गोली चलाने वाले दोनों युवकों ने सफेद जूते और काली पैंट पहन रखी थी. इनमें से एक ने सफेद फूलों वाली शर्ट और दूसरे ने हल्के नीले रंग की पूरी आस्तीन वाली शर्ट पहनी थी. वहीं, उनका तीसरा साथी थोड़ी दूरी पर एक मोटरसाइकिल स्टार्ट करके खड़ा था. उसने सफेद धारी वाली चॉकलेट रंग की टी-शर्ट और ग्रे पैंट पहनी थी. फायरिंग के बाद दोनों शूटर उसी बाइक पर बैठकर फरार हो गए.
इस ताबड़तोड़ गोलीबारी में 48 साल के ड्राइवर फिरदौस की बाईं कलाई में गोली लगी, जो उनकी कलाई को चीरती हुई बाजू में जाकर फंस गई. इसके अलावा उनके सीधे हाथ की उंगली में भी फ्रैक्चर हुआ है. वहीं, शिकायत के मुतबाकि टाइगर श्रॉफ के सीने और सीधे हाथ पर चोटें आई हैं. गोलीबारी रुकते ही घायल टाइगर ने खुद को संभाला, फौरन स्टेयरिंग अपने हाथ में ली और गाड़ी सीधे सांताक्रूज थाने ले गए. पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश में स्पेशल टीमें लगा दी हैं.
जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्ध हमलावरों को राजस्थान के कोटा से हिरासत में लिया. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावर वारदात के बाद बाइक से फरार हुए और फिर ट्रेन के जरिए भागने की कोशिश कर रहे थे. कोटा पुलिस और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) ने मिलकर कार्रवाई की. पकड़े गए आरोपियों में ऋतिक कुमार (बिहार), रेहान (हरियाणा) और एक नाबालिग शामिल बताया गया है. बाद में उन्हें मुंबई पुलिस के हवाले किया गया.
जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े तार भी खंगाले जा रहे हैं, जबकि पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए कई टीमें गठित की हैं. हमले के कुछ ही समय बाद अनिल पंडित और हरमन संधू के नाम से सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो मैसेज सामने आए, जिनमें कथित तौर पर हमले की जिम्मेदारी ली गई. ऑडियो में खुद को अनिल पंडित बताने वाले शख्स ने कहा, ‘आज मुंबई में टाइगर श्रॉफ के साथ जो हुआ, उसकी जिम्मेदारी मैं और मेरे बड़े भाई हरमन संधू लेते हैं’.