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सांगली रियासत विवाद: भाग्यश्री की एक आरती से भड़के राजा साहब, गोद लिए बेटे आदित्यराजे को दी गद्दी; क्या है पारिवारिक कलह?

सांगली के पटवर्धन राजघराने में गणेशोत्सव के दौरान वारिस की जंग तेज हो गई है. जानिए कैसे बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री की एक आरती ने विजयसिंहराजे पटवर्धन, दत्तक पुत्र आदित्यराजे और दामाद हिमालय दासानी के बीच सालों पुराना विवाद बाहर ला दिया.

Written By Alkesh Kushwaha
Published: Sep 18, 2026, 10:08 AM IST | Updated: Sep 18, 2026, 11:07 AM IST
Image Credit: bhagyashree sangali
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Sangli Patwardhan Family Dispute: गणेशोत्सव का पावन मौका हो और किसी रियासत के मंदिर में वारिस को लेकर घमासान मच जाए, तो यह खबर आग की तरह फैलना लाजमी है. कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला महाराष्ट्र की ऐतिहासिक सांगली रियासत के पटवर्धन घराने में. 'मैंने प्यार किया' फेम बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री जब चार साल बाद अपने मायके सांगली पहुंचीं, तो किसी ने नहीं सोचा था कि वहां एक नया विवाद खड़ा हो जाएगा. मंदिर के गर्भगृह में आरती करने से शुरू हुई यह बात अब संपत्ति, उत्तराधिकारी और सालों पुराने पारिवारिक झगड़े तक पहुंच गई है.

सांगली के ऐतिहासिक श्रीमंत गणपति पंचायतन संस्थान में गणेश चतुर्थी के दिन बड़ा ड्रामा देखने को मिला. बॉलीवुड एक्ट्रेस भाग्यश्री अपने मायके सांगली पहुंची थीं. चार साल बाद आई भाग्यश्री ने गणपति की मुख्य आरती अपनी बहनों के साथ की. बस यहीं से सारा विवाद शुरू हुआ. राजा श्रीमंत विजयसिंह राजे पटवर्धन का कहना है कि आरती का पहला हक नए युवराज आदित्यराजे पटवर्धन का था. बड़ी बेटी भाग्यश्री ने नियमों को ताक पर रखकर जबरदस्ती आरती की. इससे मंदिर प्रशासन और राजा साहब दोनों काफी नाराज हो गए.

नियम तोड़ने का आरोप, राजा साहब ने जताया गुस्सा

विजयसिंह राजे पटवर्धन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके साफ-साफ कहा कि मंदिर के गाभारे में प्रवेश करने के सख्त नियम हैं. विजयसिंह राजे ने कहा, "गर्भ गृह में सिर्फ हमारे परिवार के लोग ही जा सकते हैं. ब्राह्मण और चितपावन कोकणस्थ लोगों को ही अंदर जाने की अनुमति है. उस नियम को तोड़कर वे चार अन्य लोगों को अंदर ले गईं, यह बिल्कुल सही नहीं है. लोगों को भी यह पसंद नहीं आया. कुछ लोगों ने मुझसे पूछा कि आपने इसकी इजाजत कैसे दी? मैंने कोई अनुमति नहीं दी थी, वे जबरदस्ती अंदर गईं. उनका मानना है कि 'मैं बेटी हूं तो कुछ भी कर सकती हूं', अब इसे आप जो समझना चाहें समझें."

राजा साहब ने यह भी साफ किया कि उन्होंने युवराज आदित्यराजे को गोद लिया है, इसलिए वही संस्थान के आधिकारिक वारिस होंगे. विजयसिंह राजे पटवर्धन ने अपील की है कि भाग्यश्री को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है. इसलिए भाग्यश्री और उनके पति हिमालय दासानी के साथ संस्थान की संपत्ति को लेकर कोई भी लेन-देन न करें. आदित्यराजे पटवर्धन ही संस्थान के असली उत्तराधिकारी हैं और सांगली की जनता को उनका साथ देना चाहिए.

भाग्यश्री की सफाई और राजा साहब का तीखा जवाब

भाग्यश्री ने कहा, "सांगली में मेरा आना काफी सालों बाद हुआ है. राजे साहब (पिता) की तबियत थोड़ी ठीक नहीं रहती, इसलिए सांगली की परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए हम तीनों बहनों में से किसी न किसी का यहां रहना जरूरी है." उन्होंने आगे कहा, "हम इसी मंदिर में रोज दर्शन करते हुए बड़े हुए हैं. मुंबई में भी ये यादें हमारे दिल के करीब हैं. ऐसा कभी नहीं हुआ कि हम सांगली या यहां के मंदिर को भूल गए हों. इसलिए इस साल सोचा कि चतुर्थी के दिन सांगली में ही रहूं. बप्पा के आशीर्वाद से ही हम बड़े हुए हैं."

कौन हैं 16 साल के दत्तक पुत्र आदित्यराजे?

इस पूरे विवाद के केंद्र में सांगली रियासत की गद्दी और उत्तराधिकार का मामला है. राजा विजयसिंह राजे के कोई बेटा नहीं है. इसलिए उन्होंने साल 2023-24 में जयदीप अभ्यंकर के 16 साल के बेटे आदित्य को गोद लिया था. आदित्य को कानूनी तौर पर गोद लेकर 'युवराज आदित्यराजे पटवर्धन' घोषित किया गया है. राजा साहब ने साफ कर दिया है कि 1940 के कानून और संस्थान की परंपरा के हिसाब से आदित्यराजे ही सांगली रियासत के इकलौते वारिस हैं.

पटवर्धन घराने का असली विवाद क्या है?

सांगली संस्थान का यह पारिवारिक और प्रशासनिक विवाद सालों पुराना है. साल 2013 से 2016 के दौरान श्रीमंत विजयसिंह राजे पटवर्धन ने संस्थान के कामकाज की जिम्मेदारी भाग्यश्री के पति हिमालय दासानी को सौंपी थी. हालांकि, दामाद पर संस्थान की जमीनों को बिना बताए बेचने का आरोप लगाते हुए विजयसिंह राजे ने उनसे सारे अधिकार छीन लिए. इसके बाद से भाग्यश्री और हिमालय ने सांगली आना बंद कर दिया था.

हिमालय दासानी ने 2013 से 2016 तक काम संभाला. इसके बाद 2016 से 2021 तक खुद विजयसिंह राजे ने कारभार देखा. 2021 में उन्होंने जयदीप अभ्यंकर को संस्थान की जिम्मेदारी दी. आगे चलकर 2023-24 में जयदीप अभ्यंकर के 16 साल के बेटे आदित्य को गोद लेकर विजयसिंह राजे ने उसे आधिकारिक उत्तराधिकारी (युवराज आदित्यराजे पटवर्धन) घोषित कर दिया.

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About the Author

अल्केश कुशवाहा एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 14 वर्षों से अधिक का गहन अनुभव है. वर्तमान में वे जी न्यूज हिंदी में चीफ सब-एडिटर के रूप में बॉलीवुड-वायरल सेक्शन संभाल रहे हैं. अल्केश की मुख्य विशेषज्ञता बॉलीवुड, एंटरटेनमेंट, वायरल सिनेमा ट्रेंड्स और सेलिब्रिटी एक्सक्लूसिव्स में है. साल 2012 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत करने वाले अल्केश ने दैनिक भास्कर, हिन्दुस्तान टाइम्स, राजस्थान पत्रिका और NDTV जैसे देश के अग्रिम मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. अल्केश ने अपने करियर में अर्जुन रामपाल, ऋचा चड्ढा और राजपाल यादव जैसी कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यूज किए हैं. फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस एनालिसिस, सेलिब्रिटी गॉसिप्स और एंटरटेनमेंट ट्रेंड्स का इन-डेप्थ डेटा एनालिसिस करना उनका मजबूत पक्ष है. वे पाठकों तक बॉलीवुड जगत की हर छोटी-बड़ी खबर सटीक, निष्पक्ष और विश्लेषणात्मक तरीके से पहुंचाते हैं. आप अल्केश कुशवाहा से सीधे alkesh.kushwaha@zeemedia.com पर संपर्क कर सकते हैं.
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