'किरदारों पर होनी चाहिए चर्चा', 4000 करोड़ की 'रामायण' के दावे पर बोले सलमान खान; बिग बजट के नैरेटिव पर ऐतराज?
सलमान खान ने रणबीर कपूर की फिल्म 'रामायण' को लेकर 4000 करोड़ रुपये के बजट की चर्चा पर अपनी राय रखी है. उनका मानना है कि किसी फिल्म की पहचान उसके बजट से नहीं, बल्कि उसके किरदारों से होनी चाहिए. उन्होंने बिग बजट नैरेटिव पर भी सवाल उठाए.
रणबीर कपूर और यश स्टारर फिल्म 'रामायण' रिलीज हो चुकी है और इसे काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है. इसके एक दिन बाद धनतेरस के मौके पर सलमान खान ने अपनी आने वाली फिल्म 'मातृभूमि' का ट्रेलर लॉन्च किया. लेकिन सलमान खान का मानना है कि बहुत से लोग फिल्म के बजट और VFX पर चर्चा कर रहे हैं, जो कि सही नहीं है. अपनी आने वाली फिल्म 'मातृभूमि' के ट्रेलर लॉन्च के दौरान सलमान खान ने इस साल की सबसे बड़ी रिलीज़ 'रामायण' के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि लोगों को अपना ध्यान VFX और विज़ुअल्स से हटाकर फिल्म की कहानी पर लगाना चाहिए.
मुंबई में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए सलमान खान ने कहा, 'मुझे लगता है कि रामायण का चर्चा रामायण पर होना चाहिए ना कि वीएफएक्स और उत्पादन की लागत बराबर है. मुझे लगता है कि यह कथा 4000 (रामायण का बजट) और वीएफएक्स, वीएफएक्स, वीएफएक्स है. मुझे नहीं लगता कि यह सही है.' उन्होंने आगे कहा, 'मैं बस यही सोचता हूं कि रामायण की चर्चा रामायण के ऊपर ही होनी चाहिए-राम, रावण, सीता.'
भारत में पहले दिन 64.85 करोड़ रुपये (नेट) की शानदार कमाई के साथ रणबीर कपूर स्टारर 'रामायण' ने 'पठान' और 'एनिमल' जैसी कई बड़ी बॉलीवुड फिल्मों के पहले दिन के कलेक्शन के आंकड़ों को पीछे छोड़ दिया है. यह फिल्म 2026 में अब तक की दूसरी सबसे बड़ी बॉलीवुड ओपनिंग बन गई है, जो केवल 'धुरंधर: द रिवेंज' से पीछे है.
स्क्रिप्ट बदलने के सरकारी दबाव की खबरें झूठी
साथ ही सलमान खान ने उन अफवाहों को खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि भारत सरकार उन पर अपनी आने वाली वॉर ड्रामा फिल्म मातृभूमि की स्क्रिप्ट बदलने के लिए दबाव डाल रही है. शुक्रवार को सलमान ने मुंबई के अंधेरी वेस्ट इलाके में फिल्म के अपने सह-कलाकारों के साथ एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने मीडिया से कहा कि यह बात कि हम चीन के खिलाफ जा रहे हैं या हमारी सरकार ने हम पर स्क्रिप्ट बदलने और उसे फिर से लिखने का दबाव डाला है यह सब बकवास है. इसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है. हमने सैनिकों, उनके परिवारों और वे किन हालात से गुजरते हैं दोनों तरफ के सैनिकों के अनुभवों पर एक फिल्म बनाई है. इसलिए, इसमें कोई नेगेटिव ताकतें शामिल नहीं हैं.
उन्होंने कहा, 'ये सिर्फ परिस्थितियां हैं. परिस्थितियां पॉजिटिव हैं, लेकिन ऐसे समय में इन सैनिकों के लिए उनका देश सबसे पहले आता है. वे एक-दूसरे को पसंद करते हैं, लेकिन जब ऐसी स्थिति आती है तो राष्ट्र सर्वोपरि हो जाता है और दोनों पक्ष इस मुद्दे का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं.'
बदला गया था फिल्म का टाइटल
इस फिल्म का टाइटल पहले 'गलवान' था. यह 15 जून 2020 को भारत और चीन के बीच हुए 'गलवान गतिरोध' पर आधारित है. यह घटना भारत में कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान हुई थी. पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिक आपस में भिड़ गए थे. यह लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर चल रहे एक बड़े सीमा विवाद का हिस्सा था. जब दोनों पक्षों ने विवादित इलाकों में गश्त करने की कोशिश की तो यह टकराव हिंसक हो गया.
इस झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए, जबकि चीन को भी नुकसान उठाना पड़ा. चार दशकों से भी अधिक समय में यह भारत और चीन के बीच सबसे घातक टकराव था. इससे तनाव काफी बढ़ गया, जिसके बाद दोनों देशों ने अपनी सेना की तैनाती बढ़ा दी और आगे के संघर्ष को टालने के लिए राजनयिक बातचीत शुरू की. फिलहाल भारत और चीन ने अपने संबंधों को सुधार लिया है और कूटनीति के तहत कई रास्ते खोले हैं.