विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना की फिल्म रणबाली थिएटर में रिलीज हो चुकी है. 16 अक्टूबर को रिलीज फिल्म को लेकर लोगों में मिला-जुला रिस्पॉन्स मिल रहा है. इस बीच फिल्म मेकर्स ने हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी. इस दौरान उन्होंने फिल्म को मिले प्यार के बारे में बात की. वहीं रश्मिका मंदाना ने पति विजय देवरकोंडा की एक्टिंग की तुलना पुष्पा 2 द रूल में अल्लू अर्जुन कपूर की एक्टिंग से की है.
रश्मिका ने रणबाली में विजय की एक्टिंग के बारे में बात करते हुए कहा- जब मैं रणबाली देख रही थी तो विजय और रणबाली के बीच काफी अंतर था. लेकिन शूटिंग के दौरान, सेट पर और शूटिंग के अलावा जब मैं उनसे बात करती थी, तो उनमें रणबाली वाली झलक दिखती थी. मुझे लगता था कि विजू कहां है? समझ रहे हैं ना
इस बात को समझने में समय लगा कि वह अपने किरदार में इतनी गहराई से उतर चुके हैं, मुझे समझने में थोड़ा समय लगा, फिर मुझे समझ आया कि वह कितने सीरियस और किस लेवल पर एक्टिंग कर रहे थे. जब आप कुछ किारदार निभाते हैं, तो वो आपको पूरी तरह से अपने अंदर समा लेते हैं. आपके शरीर का हर एक हिस्सा उन इमोशनल और अभिनय को महसूस करने लगता है. जब मैंने ये देखा तो मेरे लिए यह एकदम नया अनुभव था.
रश्मिका ने पति की तारीफ में आगे बताया कि रणबाली का किरदार देखकर उन्हें पुष्पा 2 से अर्जुन की याद आ गई. पुष्पा 2 के समय भी उन्हें ऐसा ही महसूस हुआ था. जब बनी सर अल्लू अर्जून काम कर रहे थे. एक तरफ बनी सर थे और दूसरी तरफ पुष्पा के रूप में बनी सर, ये दोनों बिल्कुल अलग-अलग इंसान लग रहे थे.इसके बाद एक्ट्रेस ने बताया है कि रणबाली में विजय का काम उनके पिछले काम से अलग था.
एक्ट्रेस ने बोला मैंने विजू को घर पर भी देखा है, सेट पर उनको देखना एकदम नया अनुभव था. जो एक्टर्स परफॉर्म करते हैं वह इस एहसास को समझ सकते हैं. सच बोलू तो हम दोनों ने गीता गोविंदम में साथ काम किया था, लेकिन रणबाली और जयम्मा के रोल ने मुझेपर काफी गहराई से प्रभाव डाला है.
रणबाली फिल्म एक पीरियड ड्रामा फिल्म है. यह फिल्म द ग्रेट मद्रास अकाल पर आधारित है. साल 1876 से 1878 के बीच साउथ बारत में बारिश न होने की वजह से फसल बर्बाद हो गई थी. अकाल की वजह से लाखों लोगों की जान गई थी. इसके अलावा अकाल के दौरान मद्रास में ब्रिटिश शासन की आर्थिक नीतियों की वजह ये ज्यादा नुकसान हुआ था. अकाल के समय में भी अनाज देश से बाहर जा रहा है. जिस वजह से अनाज काफी महंगा हो गया था. अकाल के दौरान अनाज की जमाखोरी एक बड़ी समस्या बन चुकी थी.