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Ranbir Kapoor Ramayana Best Scene: नितेश तिवारी की 'रामायण' आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है, जो सिर्फ भव्य विजुअल्स, विशाल सेट और दमदार एक्शन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि फिल्म में कई ऐसे सीन भी हैं, जो कहानी के भावनात्मक पहलुओं को बेहद खूबसूरती से सामने लाते हैं. कहीं रावण के दस सिरों के जरिए उसके भीतर चल रहे अलग-अलग विचारों और अहंकार की झलक देखने को मिलती है. दर्शकों की आंखें जटायु ने नम कर दीं. राम और परशुराम का आमना-सामना हो या वनवास के दौरान अयोध्या से विदाई, फिल्म के कुछ सीन ऐसे हैं, जो दर्शकों के दिल को छू गए.
'रामायण' में यश ने रावण का किरदार निभाया है. उनके दस सिरों को दिखाने का सीन बेहद दिलचस्प और प्रभावशाली है. इस सीन को जब आप देखेंगे, तो बीच में रावण बैठा नजर आता है और उसके दस सिर एक के बाद एक अलग-अलग रूपों में सामने आते हैं. इतना ही नहीं, इसमें हर एक सिर की अपनी आवाज और अपनी सोच दिखाई देती है. कोई उसे एक तरफ की सलाह देता है, तो कोई दूसरी दिशा में उसे उकसाता है. ये सभी आवाजें मिलकर रावण के अंदर के विचारों से टकराती हैं और उसके अहंकार को दर्शाती हैं. इस सीन को दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है.
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फिल्म में जटायु का सीन भी काफी दमदार नजर आया है. इस एक सीन ने लोगों को काफी भावुक भी किया है. रावण से युद्ध करते हुए जटायु बेहद बुरी तरह घायल हो जाता है और कुछ देर बाद गिर जाता है. इसके बाद राम उसके पास पहुंचते हैं. जटायु उन्हें सीता के अपहरण की पूरी घटना के बारे में बताता है और फिर अंतिम सांस लेता है. इसके बाद का सीन काफी भावुक हो जाता है. इसमें आगे देखने को मिलता है कि कई पक्षी लकड़ियां लेकर वहां पहुंचते हैं. राम जटायु को पिता समान मानते हुए खुद उसका अंतिम संस्कार करते हैं और मुखाग्नि देते हैं.

फिल्म में जटायु और रावण के बीच युद्ध का सीन भी दर्शकों का दिल जीत रहा है. जब रावण सीता का हरण कर पुष्पक विमान से जा रहा होता है, उसी वक्त जटायु उसे रोकने के लिए पूरी ताकत लगा देता है. जटायु मां सीता को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करता है. एक सीन में जटायु पुष्पक विमान पर पहुंचकर बैठ जाता है और अपना पंजा सीता की तरफ आगे बढ़ाता है, मानो उन्हें रावण के चंगुल से छुड़ाना चाहता हो, लेकिन इससे पहले ही रावण उस पर हमला कर देता है.
फिल्म में राम के वनवास पर जाने का सीन भी लोगों को काफी भावुक कर रहा है. महल छोड़कर जाने से पहले राम कैकेयी से वादा लेते हैं कि जब वह लौटकर आएंगे, तो पहला निवाला उन्हीं के हाथों से खाएंगे. इसके बाद राम अयोध्या से निकलते हैं, तो जनता उन्हें रोकने के लिए रास्ते में खड़ी हो जाती है. जिसके बाद सीता आगे चलकर लोगों को समझाती हैं कि वह पत्नी धर्म निभाने के लिए राम के साथ जा रही हैं और लक्ष्मण धर्म के कारण उनके साथ जा रहे हैं. जिसके बाद धीरे-धीरे राम आगे रथ की तरफ बढ़ते हैं. इस सीन में पिता-पुत्र के रिश्ते की गहराई को दिखाया गया है.

दशरथ की मृत्यु वाला सीन हर किसी को अंदर से झकझोर कर रख देता है. एक तरफ दशरथ इस पीड़ा में होते हैं कि उनके पापों की सजा राम को भुगतनी पड़ रही है. उन्हें लगातार यह चिंता सताती है कि वन में उनका बेटा किस हाल में होगा. वहीं, राम नदी पार करते हुए इमोशनल हो जाते हैं. दशरथ अपनी आखिरी सांसें लेते हुए राम का ही नाम पुकारते हैं और उसी वक्त राम एक दम से पीछे मुड़कर देखने लग जाते हैं. मानो ऐसा लगता है जैसे उन्हें अयोध्या से पिता की आवाज सुनाई दे रही हो.