'रामायण' के इस सीन पर मचा घमासान, क्या सच में राक्षसों से लड़ी थीं माता सीता; शास्त्रों में क्या लिखा है?
रणबीर कपूर की 'रामायण' में माता सीता को भगवान राम के साथ राक्षसों से युद्ध करते दिखाए जाने पर विवाद छिड़ गया है. इस सीन को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं. आखिर क्या सच में माता सीता ने राक्षसों से युद्ध किया था? आइए जानते हैं धर्मग्रंथों में इसका क्या उल्लेख मिलता है.
नितेश तिवारी की बिग बजट फिल्म सिनेमाघरों में 'रामायण' रिलीज हो गई है. एक तरफ जहां फिल्म की कहानी और एक्टिंग की तारीफ हो रही है. वहीं, दूसरी तरफ कुछ लोग एक सीन की जमकर आलोचना कर रहे हैं. इस सीन में साई पल्लवी माता सीता के रूप में भगवान राम के साथ जंगल में राक्षसों से लड़ती हुई नजर आई हैं. कई लोगों का मानना है कि यह तथ्यों में बदलाव है, क्योंकि उनके अनुसार माता सीता ने कभी भी भगवान राम के साथ मिलकर कोई युद्ध नहीं लड़ा था.
फिल्म के इस सीन पर रिएक्ट करते हुए एक यूजर ने लिखा, 'रामायण से एक और धोखा या यूं कहें कि 'स्कैमयाना' (घोटाला-रामायण). यहां हम माता सीता को लड़ते हुए और खर-दूषण की 14,000 राक्षसों की सेना के खिलाफ श्री राम की मदद करते हुए देख रहे हैं, जबकि शास्त्रों के अनुसार श्री राम ने लक्ष्मण और माता सीता को दूर भेजकर अकेले ही उन सभी से लड़ाई लड़ी थी.'
'रामायण' में सीता का ये रूप देख भड़के लोग
एक अन्य यूजर ने लिखा, 'अरे, भगवान राम ने अकेले ही पूरी सेना से लड़ाई लड़ी थी... रामायण में इस लड़ाई का वर्णन बहुत ही भीषण है. वे उन राक्षसों के खून से सने हुए थे. माता सीता अत्यंत कोमल थीं और भगवान राम उन्हें कभी भी युद्ध के मैदान में नहीं आने देते.'
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एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, 'भगवान राम ने शूर्पणखा के भाई खर द्वारा बदला लेने के लिए भेजे गए 14,000 राक्षसों को हराया था. राम ने अकेले ही राक्षसों की पूरी सेना को परास्त कर दिया था. रामायण फिल्म में इस तथ्य को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है, जिसमें दिखाया गया है कि सीता भी राम के साथ मिलकर लड़ रही थीं. आखिर ये लोग अपनी मर्जी से कुछ भी कैसे दिखा सकते हैं?'
क्या कहते हैं शास्त्र?
ऐसे में सवाल उठता है कि असल कहानी क्या है? क्या सीता ने कभी कोई युद्ध लड़ा था? आइए देखते हैं कि ग्रंथों में क्या लिखा है. वाल्मीकि रामायण के अनुसार, 14 साल के वनवास के दौरान राक्षसों के खिलाफ हुए किसी भी युद्ध में सीता ने राम के साथ मिलकर लड़ाई नहीं लड़ी. शूर्पणखा को लक्ष्मण ने हराया था. राम और लक्ष्मण ने राक्षस विराध से लड़ाई की थी. वहीं, राम ने अकेले ही खर और दूषण को उनकी पूरी सेना के साथ परास्त किया था.
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दूसरी ओर 'अद्भुत रामायण' में सीता को देवी शक्ति के एक शक्तिशाली रूप के रूप में दिखाया गया है. इस ग्रंथ के मुताबिक, जब राम को हजार सिरों वाले रावण (सहस्र रावण) से हार का सामना करना पड़ता है. तब सीता महाकाली का रूप धारण कर लेती हैं और खुद उस राक्षस से युद्ध करती हैं. हालांकि, 'अद्भुत रामायण' में सीता का एक उग्र रूप देखने को मिलता है, लेकिन इसमें घटनाओं का क्रम कुछ अलग है.
'रामायण' में सीता को योद्धा दिखाने पर क्या बोले नितेश तिवारी?
फिल्म के लॉस एंजिल्स प्रीमियर में अंतरराष्ट्रीय मीडिया से बात करते हुए फिल्म निर्माता ने कहा, 'तो, उनके हिस्से में भी एक्शन है. हम इस बात को लेकर बहुत साफ हैं कि कुछ चीजें और कुछ पात्र ऐसे हैं, जहां हम थोड़ी छूट ले सकते हैं. लेकिन कुछ पात्र ऐसे भी हैं, जहां हमें बिल्कुल भी कोई छूट नहीं लेनी चाहिए. जैसे कि भगवान राम हमारे देश में उनके जितने भी संस्करण मौजूद हैं, उन सभी में वे भगवान राम ही हैं.'
उन्होंने आगे कहा, 'जैसा कि आपने जिक्र किया. माता सीता का भी एक योद्धा वाला रूप है. 'अद्भुत रामायण' में उन्हें एक योद्धा राजकुमारी के रूप में दिखाया गया है. हमने वहीं से यह पहलू लिया है, जो उनके चरित्र में एक बेहतरीन आयाम जोड़ता है.'
कैसी है 'रामायण'?
जैसा कि प्रचार किया गया था, नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी यह 'रामायण' अब तक देखी गई किसी भी अन्य 'रामायण' से कहीं अधिक भव्य है. फिल्म के कलाकारों को अपनी लय पकड़ने में थोड़ा समय लगता है, लेकिन एक बार जब वे लय में आ जाते हैं, तो फिल्म पूरी रफ्तार पकड़ लेती है. बैकग्राउंड म्यूजिक में हंस जिमर और एआर रहमान की जोड़ी ने कमाल कर दिया है. फिल्म में भरपूर जादू-टोना, रोमांच और एडवेंचर है, जो कहीं-कहीं आने वाले नीरस पलों को हावी नहीं होने देता और बच्चों और बड़ों दोनों का भरपूर मनोरंजन करता है.
एक ऐसे विशाल महाकाव्य को जिसका सांस्कृतिक और धार्मिक प्रभाव सदियों से हमारे समाज और राजनीति को आकार देता रहा है, समेटना कभी भी आसान काम नहीं था. लेकिन इसके लिए निर्माताओं की तारीफ करनी होगी कि वे इस भारी-भरकम विषय के बोझ तले दबे बिना अपनी कहानी को प्रभावी ढंग से पेश करने में सफल रहे हैं. बेशक, फिल्म का पैमाना और भव्यता ऐसी है जो भारतीय सिनेमा में पहले कभी नहीं देखी गई. लेकिन साथ ही इसमें मेलोड्रामा और भावनाओं का वह ठेठ देसी मिश्रण भी है, जो ऐसी फिल्म के लिए बिल्कुल सटीक बैठता है जिसे हर तरह के दर्शकों को ध्यान में रखकर बनाया गया है.