पर्दे पर राजपाल यादव की पिटाई से बॉक्स ऑफिस पर होती है पैसों की बारिश! एक्टर ने खुद को बताया 'लकी चार्म'
एक्टर राजपाल यादव ने अपनी फिल्मों से जुड़ा एक मजेदार खुलासा किया है. उनका कहना है कि जिन फिल्मों में पर्दे पर उनकी पिटाई होती है, वे अक्सर बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित होती हैं. एक्टर ने इस दिलचस्प संयोग को अपनी किस्मत से जोड़ते हुए खुद को फिल्मों का 'लकी चार्म' भी बताया है.
कॉमेडी एक्टर राजपाल यादव ने अपनी हिट फिल्मों के पीछे के एक अनोखे 'लकी चार्म' का खुलासा किया. हाल ही में फैमिली फुल हाउस विद रोहित शर्मा' शो में एक्टर की होस्ट के साथ एक मजेदार बातचीत हुई. होस्ट ने उनकी कई पॉपुलर फिल्मों में एक खास बात की ओर इशारा किया कि अपने को-स्टार से पिट जाना.
बातचीत के दौरान रोहित ने गौर किया कि 'भागम भाग', 'खट्टा मीठा' और 'भूल भुलैया' जैसी कई सफल फिल्मों में राजपाल को अक्सर फिजिकल कॉमेडी के तहत मार-पिटाई झेलनी पड़ी है. फिर उन्होंने मजाक में एक्टर से पूछा कि क्या मार खाना उनका 'लकी चार्म' बन गया है.
पिटना राजपाल यादव के लिए बना लकी!
रोहित ने पूछा, 'राजपाल सर, आपकी भागम भाग, खट्टा मीठा, भूल भुलैया और भी कई फिल्मों में एक चीज कॉमन रही है, आपकी पिटाई. क्या पिटाई आपका लकी चार्म है? इसपर रोहित की बात से सहमत होते हुए राजपाल ने अपने मजाकिया अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने कहा, 'हां, जिस फिल्म में मेरी पिटाई होती है, वह फिल्म हिट हो जाती है.' उनके इस जवाब ने सभी को हंसा-हंसा कर लोटपोट कर दिया और दर्शक खुशी से झूम उठे और तालियां बजाने लगे.
पिछले कुछ सालों में राजपाल यादव कई कॉमेडी फिल्मों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें उनके किरदार अक्सर बहुत ही मजेदार सिचुएशन में फंस जाते हैं. इनमें अक्सर फिजिकल कॉमेडी और मार-पिटाई वाले सीन शामिल होते हैं.
साल 2006 की फिल्म 'भागम भाग' में उनका किरदार 'गुलु', जो अक्षय कुमार और गोविंदा के साथ मिलकर कई उथल-पुथल भरी और मजेदार स्थितियों में फंस जाता है. वहीं, 2007 की फिल्म 'भूल भुलैया' में उनका 'छोटे पंडित' का किरदार काफी यादगार रहा, जिसमें वह कई अजीबोगरीब और मजदर हालात में फंसते नजर आते हैं.
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इसी तरह 2010 की फिल्म 'खट्टा मीठा' में आई, जिसमें अक्षय कुमार लीड रोल में थे. राजपाल फिल्म की स्लैपस्टिक कॉमेडी और अफरा-तफरी का हिस्सा रहे. 'हंगामा', 'वक्त: द रेस अगेंस्ट टाइम' और 'चुप चुप के' से लेकर 'ढोल', 'पार्टनर', 'दे दना दन' और 'फिर हेरा फेरी' तक राजपाल ने अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है.
राजपाल यादव का करियर
राजपाल यादव 'हंगामा' (2003), 'गरम मसाला' (2005), 'चुप चुप के' और 'फिर हेरा फेरी' (2006), तथा 'भूल भुलैया' (2007) जैसी फिल्मों में अपने हास्य किरदारों के लिए काफी मशहूर हुए. उन्होंने निर्देशक प्रियदर्शन के साथ लगभग आठ से दस फिल्मों में काम किया है. उन्हें 'बेस्ट वर्सेटाइल एक्टर' (सर्वश्रेष्ठ बहुमुखी अभिनेता) का पुरस्कार भी मिल चुका है.
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राजपाल को 2003 की फिल्म 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' में उनके काम के लिए उत्तर प्रदेश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'यश भारती पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था. यह सम्मान उनके कॉमेडी और गंभीर दोनों तरह के एक्टिंग के लिए था. उनसे पहले अमिताभ बच्चन और जया बच्चन जैसी जानी-मानी हस्तियों को भी यह पुरस्कार मिल चुका था. राजपाल को फिल्मफेयर और IIFA जैसे मंचों पर 'बेस्ट कॉमिक एक्टर' (सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता) के पुरस्कार के लिए भी नामांकित किया गया था, लेकिन वे जीत नहीं पाए.