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'प्रहार' में दिखी राजकुमार राव की शानदार एक्टिंग, जानें कैसी है कसाब को फांसी दिलाने की जंग?

अजमल कसाब को फांसी दिलाने वाली वकील उज्जवल निकल के जीवन पर बनी फिल्म प्रहार में मुंबई 26/11 आतंकी हमले की कहानी को कोर्टरूम के जरिए पेश किया गया है.

Written By Shilpa Singh
Published: Oct 15, 2026, 11:34 PM IST | Updated: Oct 15, 2026, 11:37 PM IST
Image Credit: इंस्टाग्राम
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मुंबई में हुए 26/11 हमले पर कई फिल्में बन चुकी हैं. इस बार पर्दे पर इस फिल्म की कहानी को वकील के चश्मे से दिखाया गया है. अजमल कसाब को फांसी दिलाने वाले वकील उज्जवल निकम की बायोपिक प्रहार में मुंबई में हुए 26/11 हमले को कोर्टरूम ड्रामा के द्वारा दिखाया गया है. अज्जवल निकम का किरदार राजकुमार राव ने निभाया है.

26/11 हमले आंतकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ा था. अजमल को फांसी की सजा दिलाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. इस कहानी को अब बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा. आइए जानते हैं प्रहार दा अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्जवल निकम कैसी है.

क्या है प्रहार फिल्म की कहानी

प्रहार द अनटोल्ट स्टोरी ऑफ उज्जवल निकम कहानी की शुरुआत मुंबई 26/11 हमले से होती है. इसके बाद आतंकी अजमल कसाब को गिरफ्तार कर लिया जाता है. इसके बाद कसाब को फांसी दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी. अजमल कसाब को फांसी दिलाने के लिए वकील उज्जवल निकल कानूनी लड़ाई शुरू करते हैं.

उनकी ये लड़ाई इतनी आसान नहीं थी. कसाब अपने बयानों से गुमराह करता है. कसाब कभी अपनी उम्र 17 साल बताता है तो कभी बोलता है कि वह मुंबई डॉक्टर बनने आया था. कसाब अपने बयानों से गुमराह करने की कोशिश करता है.

फिल्म में उज्जवल निकम के बेटे के साथ अनबन देखने को मिली थी. पर्सनल लाइफ की उथल-पुथल के बीच उज्जवल निकम कसाब को फांसी दिलाते हैं. फिल्म की कहानी उज्जवल निगम के इर्द-गिर्द घूमती है.

फिल्म का डायरेक्शन

फिल्म की कहानी काफी अच्छी है, पर्दे पर फिल्म को अच्छे तरीके से दिखाया जा सकता है. फिल्म का डायरेक्शन अविनाश अरुण धवारे ने किया है. फिल्म का पहला हाफ स्लो है. फिल्म के पहले हाफ में कोर्ट की प्रोसीडिंग दिखाई जाती है. दूसरे हाफ में मुंबई में हुए 26/11 हमले की घटना दिखाई जाती है. फिल्म दूसरे हाफ में सही ट्रैक पर चलती है. फिल्म के डायलॉग्स ठीक-ठाक है.

वामिका ने जीता दिल

फिल्म में राजकुमार राव की शानदार एक्टिंग की है. एक्टर ने उज्जवल निगम के किरदार को जिंदा किया है. स्क्रीन पर उनकी आंखों में गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है. उज्जवल निकम की पत्नी के किरदार में वामिका ने भी शानदार काम किया है. जयदीप अहलावत ने भी कमाल की एक्टिंग की है. स्क्रीन पर सिकंदर खेर जब-जब आते हैं एक्टिंग अपना प्रभाव छोड़ जाते हैं.

कैसी है फिल्म

अगर आपको कोर्ट रूम ड्रामा पसंद हैं तो आप फिल्म देख सकते हैं. फिल्म का पहला हाफ काफी स्लो है. वहीं फिल्म की कहानी में इमोशन्स कम देखने को मिल रहे हैं.

 

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About the Author

मैं शिल्पा सिंह, पिछले 6 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हूं. मैं 4 साल से ज़ी न्यूज़ हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम कर रही हूं. ज़ी न्यूज़ में मैं एंटरटेनमेंट बीट पर भी काम कर रही हूं. मैंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंडिया न्यूज़ डिजिटल से की थी. इसके बाद वन इंडिया डिजिटल और जागरण न्यू मीडिया जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी काम किया है. इस दौरान मैंने एंटरटेनमेंट बीट पर लेखन के साथ-साथ सेलेब्रिटी इंटरव्यू, वीडियो स्टोरी, फिल्म रिव्यू और रिसर्च-बेस्ड कंटेंट की कवरेज की है. मैंने जामिया मिलिया इस्लामिया से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. मेरा उद्देश्य किसी भी बीट पर काम करते हुए पाठकों तक सही, उपयोगी और भरोसेमंद जानकारी देना है.
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