15 साल की उम्र में PM Modi ने देखी थी ये फिल्म, जिसने हमेशा के लिए बदल उनकी सोच; आज भी लाखों लोगों का फेवरेट हैं इसका 1 गाना
PM Modi Favorite Movie: फिल्मों से दूर रहने वाले पीएम नरेंद्र मोदी के दिल के करीब आखिर कौन सी फिल्म है? 15 साल की उम्र में उन्होंने देव आनंद की एक फिल्म देखी थी, जिसने उनकी सोच बदल दी. इस फिल्म ने उनके जीवन पर गहरा असर छोड़ा, जिसने वे आज तक भूल नहीं पाए. चलिए बताते हैं उनको वो अनसुना किस्सा.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं. वैसे वे अक्सर कहते हैं कि उन्हें फिल्में देखने का कोई खास शौक कभी नहीं रहा और न ही अपने बिजी शेड्यूल में उनके पास इसके लिए कभी वक्त निकल पाता है. बावजूद इसके भारतीय सिनेमा की एक ऐसी सदाबहार फिल्म भी है, जो उनके दिल और दिमाग को अंदर तक छू गई थी. प्रधानमंत्री मोदी खुद कई खास मौकों पर ये बात खुलकर बता चुके हैं कि देवानंद की इस क्लासिक फिल्म ने उनकी जिंदगी और सोच को एक नई दिशा देने में बहुत बड़ा रोल प्ले किया.
इस फिल्म का मैसेज उनके मन में हमेशा के लिए बस गया. हम यहां जिस यादगार फिल्म के बारे में बात कर रहे हैं वो कोई और नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता देव आनंद और वहीदा रहमान की आइकॉनिक फिल्म ‘गाइड’ है. 1965 में रिलीज हुई इस फिल्म को नरेंद्र मोदी ने तब देखा था जब उनकी उम्र सिर्फ 15 साल थी. कच्ची उम्र में पर्दे पर देखी इस कहानी ने उनके मन को अंदर तक झकझोर दिया था. इतने दशक बीत जाने के बाद भी इस फिल्म की सीख और इसका असर उनके जेहन में पूरी तरह ताजा बना हुआ है.
किताब से पर्दे तक का सफर
विजय आनंद के डायरेक्शन में बनी ये क्लासिक फिल्म राइटर आरके नारायण के साल 1958 के मशहूर नॉवेल ‘द गाइड’ पर बेस्ड थी. इस फिल्म की कहानी राजू नाम के एक सीधे-सादे टूरिस्ट गाइड और रोजी के इर्द-गिर्द बुनी गई है. रोजी अपनी नाखुश और बेमेल शादी के दर्द से निकलने की कोशिश कर रही होती है. इसी मोड़ पर दोनों की मुलाकात होती है और फिर उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है. धीरे-धीरे कहानी आगे बढ़ती है, जहां प्यार, आजादी, अपनी पहचान बनाने की चाहत और मानवीय रिश्तों की उलझनें बहुत ही सादगी से सामने आती हैं.
फिल्म का वो गहरा फलसफा
बाद में यही सफर इंसान को जिंदगी और अध्यात्म की एक गहरी समझ की तरफ ले जाता है. पीएम मोदी के मुताबिक, इस फिल्म की सबसे बड़ी खूबी इसकी दार्शनिक सोच थी. फिल्म का मूल संदेश ये था कि इंसान को सही मार्गदर्शन बाहर से नहीं, बल्कि हमेशा अपने अंतर्मन से ही मिलता है. उन्होंने जब इस विचार को लेकर अपने दोस्तों से बात की तो किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. इसके साथ ही फिल्म में दिखाए गए गांव के सूखे और पानी के संकट ने भी उनके दिल पर ग्रामीण भारत की जमीनी हकीकत का गहरा असर छोड़ा.
लद्दाख के छात्रों से बातचीत
साल 2018 में लद्दाख के स्कूली बच्चों का एक ग्रुप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके घर पहुंचा था. वहां बच्चों से बातचीत के दौरान एक छात्र ने उनसे उनकी मनपसंद फिल्म के बारे में पूछा था. इस पर पीएम मोदी ने बड़े ही सहज अंदाज में जवाब दिया कि बिजी सेड्यूल की वजह से अब उन्हें फिल्में देखने का वक्त बिल्कुल नहीं मिल पाता. हालांकि, उन्होंने ये भी शेयर किया कि अपने बचपन और जवानी के दिनों में उन्होंने जो फिल्में देखी थीं, उनमें ‘गाइड’ आज भी उनके दिल के सबसे करीब है. इसका गाना ‘आज फिर जीने की तमन्ना है’ आज भी लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है और बेहद पसंद किया जाता है.
देव आनंद को अनूठी श्रद्धांजलि
26 सितंबर 2023 को जब देव आनंद साहब के जन्म को 100 साल पूरे हुए, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बेहद अपनेपन के साथ याद किया था. पीएम मोदी ने कहा था कि देव साहब सच में एक ‘सदाबहार’ कलाकार थे, जिनकी सिनेमा के लिए दीवानगी का कोई मुकाबला नहीं था. उनकी फिल्में सिर्फ दिल बहलाने का जरिया भर नहीं थीं, बल्कि उन्होंने बदलते दौर के भारत के नए सपनों और समाज में आ रहे बड़े बदलावों को भी परदे पर बड़ी खूबसूरती से उतारा था. देव आनंद का अंदाज ऐसा अनोखा था कि वे आज भी हर पीढ़ी के दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं.