‘जिसने हमारे घर में लक्ष्मी लाई, वो चला गया...’ नाना पाटेकर को याद कर भावुक हुई महिला, एक्टर ने बदली थी जिंदगी
Nana Patekar Social Work: हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर ने न सिर्फ पर्दे पर अपने दमदार किरदारों से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है, बल्कि उन्होंने हमेशा गरीबों और वंचित लोगों के दर्द को समझा है. उनके निधन की खबर से वो महिलाएं टूट गई है, जिनकी नाना ने मदद की थी. एक महिला ने दर्द भरे शब्दों में कहा, 'जिसने हमारे घर लक्ष्मी लाई, वो चला गया....'
'जिसने हमारे घर लक्ष्मी लाई, वो चला गया....' य दर्द भरे शब्द उस महिला के हैं, जिसकी जिंदगी हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर ने बदली थी. नाना पाटेकर का चेहरा न केवल पर्दे पर बल्कि पर्दे के पार भी आम लोगों के दिलों में भी बसा हुआ है. फिल्मों के बाहर उन्होंने ऐसी भूमिका निभाई है, जिसे आम लोग कभी नहीं भूल सकते हैं. नाना पाटेकर ने 8 अक्टूबर की सुबह दुनिया को अलविदा कह दिया है. उनके निधन से सिनेमा जगत से लेकर सियासी गलियारों और आम लोगों तक के बीच शोक की लहर दौड़ गई है.
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में मुरुड-जंजीरा इलाके में हुआ था. उन्हें घर-परिवार में विश्वनाथ पाटेकर का नाम दिया गया था. उनके निधन की खबर सुनने के बाद से फिल्मी सितारों से लेकर आम जनता तक के लोगों को काफी झटका लगा है. उनकी सादगी पर हर कोई फिदा था. नाना कभी किसी का मजहब देखकर मदद नहीं करते थे, बल्कि हमेशा गरीबों और वंचितों के दर्द को समझते थे और उन्हें दूर करने में उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया.
नाना पाटेकर में मुश्किल दौर में बदली थी महिला की जिंदगी
दिग्गज एक्टर के निधन के बाद महाराष्ट्र के बीड की ऐसी कई महिलाओं की कहानियां सामने आ रही हैं, जिनकी एक्टर ने मुश्किल दौर में मदद की और उनकी जिंदगी ही बदल दी. दरअसल, बीड के सूखाग्रस्ट इलाकों में जब आत्महत्या की घटनाओं और भूखममरी ने परिवारों को अंदर तक तोड़ दिया था, तब नाना पाटेकर उनके मसीहा बने थे. उन्होंने अपने और मकरंद अनासपुरे के 'नाम फाउंडेशन' ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई मशीनें, चक्कियां और मवेशी मुहैया करवाई थी. जिससे लोगों को मदद मिल सके और अपना परिवार चला सकें.
10 साल पहले महिला को मिली मदद
दरअसल, करीब 10 साल पहले नाना पाटेकर और मकरंद अनासपुरे के 'नाम फाउंडेशन' से मिली सिलाई मशीन को याद करते हुए महिला राजश्री की आंखें नम हो गई. राजश्री के पति एक मजदूर थे जो ऊंचाई से गिरकर बिस्तर पर पहुंच गए थे, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी राजश्री पर आ गई थी.
बीड की राजश्री महिला उन्हीं महिलाओं में शामिल हैं, जिन्हें नाम फाउंडेशन से मदद मिली थी और इस मदद के बाद उनकी जिंदगी ही बदल गई थी. परिवार की जिम्मेदारी जब महिला के कंधों पर आई थी तो ऐसे समय में उन्हें नाना पाटेकर के फाउंडेशन से सिलाई मशीन की मदद मिली थी. इस मशीन से ही राजश्री ने सिलाई का काम शुरू किया और धीरे-धीरे अपनी कमाई का एक नया जरिया बनाया. महिला ने बताया कि वह इस काम से रोजाना करीब 400-500 रुपये तक कमा पाती हैं. उनके लिए यह मदद सिर्फ एक मशीन नहीं थी, बल्कि अपने परिवार को संभालने के लिए बेहद खास मौका था.
नाना पाटेकर की मदद से संभाला परिवार
इसी वजह से नाना पाटेकर की निधन की खबर ने राजश्री के अंदर तक झकझोर कर रख दिया. उनके लिए नाना पाटेकर किसी बड़े सेलिब्रिटी से कम नहीं थे. नाना एक ऐसे इंसान थे, जिनके वजह से राजश्री मुश्किल के दौर में कुछ कदम उठा पाई और परिवार को संभालने का रास्ता मिल पाया.