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फिल्म में कमियां न ढूंढें... Ramayana के ‘लंकापति रावण’ ने क्यों कही ये बात; क्या महंगी टिकट खरीदने वाले को नहीं सवाल पूछने का हक?

2026 की मच अवेटेड फिल्मों में से एक ‘रामायण’ के भारी-भरकम बजट और VFX को लेकर बहस छिड़ गई है. इसी बीच फिल्म में ‘रावण’ का किरदार निभाने वाले कन्नड़ सुपरस्टार यश ने अपने फैंस और दर्शकों से छोटी-मोटी कमियों को नजरअंदाज करने की अपील की है. मगर बड़ा सवाल ये है कि क्या टिकट खरीदकर सिनेमा देखने वाले लोगों को प्रोड्यूसर के रिस्क के नाम पर सवाल पूछने का हक नहीं है?

Written ByVandana Saini
Published: Oct 22, 2026, 07:10 AM IST|Updated: Oct 22, 2026, 08:29 AM IST
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फिल्म में कमियां न ढूंढें... Ramayana के ‘लंकापति रावण’ ने क्यों कही ये बात; क्या महंगी टिकट खरीदने वाले को नहीं सवाल पूछने का हक?
Image Credit: ‘रामायण’ को लेकर फैंस के मन में ढेरों सवाल, लेकिन यश ने क्यों कही ये बात

About the Author

Vandana Saini

Vandana Saini

वंदना सैनी जी न्यूज में सब ए़डिटर हैं और पिछले 11 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद 2018 में उन्होंने इंडिया न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया और पिछले 8 साल से लगातार में एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट हिंदुस्तान, पत्रिका और न्यूज 24 जैसे संस्थान के साथ काम किया और पिछले 2 साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद IGNOU से हिंदी में मास्टर्स किया. उन्हें पत्रकारिता के साथ कहानियां लिखने का भी शौक है. आप Vandana.saini@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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हैदराबाद में ‘रामायण’ के प्री-रिलीज इवेंट में कन्नड़ सुपरस्टार यश ने अपने फैंस और दर्शकों से एक ऐसी अपील की, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. उन्होंने लोगों से कहा कि इस फिल्म को खुले दिल से देखें और इसके विजुअल इफेक्ट्स यानी VFX में छोटी-मोटी कमियां न ढूंढें. नितेश तिवारी के डायरेक्शन में बनी इस मेगा बजट पौराणिक फिल्म में यश लंकापति रावण का किरदार निभा रहे हैं. उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा की जमकर तारीफ की और कहा कि देश को ऐसे लोगों का साथ देना चाहिए, जो भारतीय सिनेमा को दुनिया के नक्शे पर ले जाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा रहे हैं.

यश ने अपनी बात रखते हुए साफ कहा कि जब कोई इतना बड़ा कदम उठाता है, तो वो अपना पैसा और नाम दोनों दांव पर लगाता है. अगर ऐसे लोगों का साथ नहीं दिया गया, तो इंडस्ट्री कई साल पीछे चली जाएगी. उन्होंने दर्शकों से गुजारिश की कि वे वीएफएक्स की बारीक और छोटी-मोटी गलतियों को भूलकर फिल्म का सपोर्ट करें. हालांकि, यश का ये बयान सामने आते ही एक नई बहस छिड़ गई. लोग पूछ रहे हैं कि जब किसी फिल्म का बजट लगभग 4 हजार करोड़ रुपये बताया जा रहा है, तो दर्शकों से उम्मीदें कम रखने की उम्मीद क्यों की जा रही है? मंहगी टिकट खरीदने वाले को राय रखने का पूरा हक है.

 
 
 
 
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आलोचना से ही सुधरे थे पहले टीजर के विजुअल्स

जब इस फिल्म से रणबीर कपूर का पहला लुक सामने आया था, तब लोगों ने खुलकर अपनी बात रखी थी. उस समय दर्शकों ने टीजर के VFX, कलर्स और गेसचर की कमी पर जमकर सवाल उठाए थे. ये नाराजगी इसलिए भी थी, क्योंकि इस प्रोजेक्ट के साथ डीनेग जैसी मशहूर कंपनी जुड़ी है, जिसने ‘इंसेप्शन’ और ‘इंटरस्टेलर’ जैसी हॉलीवुड फिल्मों पर काम किया. अच्छी बात ये रही कि नमित मल्होत्रा और उनकी पूरी टीम ने उस क्रिटिसिज्म को दिल पर लेने के बजाय उस पर कमा कियी और VFX को और बेहतर बनाया. ऐसे में जब दर्शकों के फीडबैक से सुधार हुआ, तो फिर अब कमियां बताने से रोकना कितना सही है?

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प्रोड्यूसर का दांव जनता की मजबूरी नहीं बन सकता

कन्नड़ सुपरस्टार यश का नमित मल्होत्रा के लिए सम्मान समझ आता है. उन्होंने सही कहा कि लॉस एंजेलिस छोड़कर भारत में इतना बड़ा रिस्क लेना हिम्मत की बात है. मगर इसका मतलब ये कतई नहीं है कि आम ऑडियंस फिल्म को बिना किसी सवाल के देखे. एक दर्शक जब सिनेमाघर जाता है, तो वो प्रोड्यूसर की कंपनी में हिस्सेदार बनने नहीं जाता. वो अपनी जेब से टिकट का पैसा देकर एक अच्छा एक्सपीरियंस पाने जाता है. अगर कोई फिल्ममेकर बड़ा रिस्क ले रहा है, तो ये उसका फैसला है. दर्शक का फर्ज सिर्फ अच्छा सिनेमा देखना है, किसी प्रोड्यूसर के फाइनेंशियल लॉस की भरपाई या उसकी ढाल बनना नहीं.

 
 
 
 
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महंगी टिकट खरीदने वाले को है हक

किसी भी फिल्म को खुले दिमाग से देखने की सलाह देना बहुत अच्छी बात है. इसका मतलब होता है कि पहले से कोई राय बनाए बिना कहानी को महसूस किया जाए, लेकिन यश की बातों से ऐसा लग रहा है मानो वे दर्शकों से अपनी उम्मीदें घटाने को कह रहे हों. किसी फिल्म को देखने से पहले ही ये मान लेना कि उसकी कमियों को माफ कर दिया जाए, बिल्कुल गलत है. जब ‘रामायण’ जैसी फिल्म की पूरी यूएसपी ही उसका ग्रैंड वीएफएक्स और दुनिया तैयार करना है, तो वहां की गई गलतियों को छोटी भूल कहकर नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है?

‘रामायण’ सिर्फ कहानी नहीं, बल्कि जनभावना है

जहां बात ‘रामायण’ की आती है तो, ये कोई ऐसी फिक्शनल कहानी नहीं है, जिसके बारे में किसी को कुछ पता न हो. ये हमारे दिल से जुड़ा वो महाकाव्य है, जिसकी तस्वीर हर भारतीय के दिल और दिमाग में पहले से बसी हुई है. जब दर्शक पहले से ही किरदारों और उनके वैभव से वाकिफ हैं, तो परदे पर पेश की जाने वाली तकनीक की कसौटी भी उतनी ही कड़ी होगी. अगर कहानी और एक्टिंग में दम होगा, तो शायद लोग हल्की-फुल्की गलतियों को भूल भी जाएं, लेकिन ये छूट फिल्म को अपने दम पर हासिल करनी होगी. रिलीज से पहले ही ऑडियंस से उदारता की भीख मांगना सही नहीं है.

हॉलीवुड लेवल का दावा, तो परख भी वैसी ही होगी

जब मेकर्स खुद दावा करते हैं कि ये फिल्म भारतीय सिनेमा का इतिहास बदल देगी, तो लोगों का ध्यान हर फ्रेम पर जाना तय है. बड़ी वीएफएक्स कंपनियों का नाम जुड़ने से दर्शकों की उम्मीदें सातवें आसमान पर पहुंच जाती हैं. दर्शक इतने समझदार हैं कि वे टीजर और फाइनल फिल्म के फर्क को पहचानते हैं. किसी प्रोमो पर राय रखना पूरी फिल्म को खारिज करना नहीं होता. अगर कोई दर्शक वीएफएक्स पर सवाल उठा रहा है, तो इसका मतलब ये नहीं कि वो फिल्म को फ्लॉप कराना चाहता है, बल्कि वो बेहतर काम देखने की उम्मीद कर रहा है.

फिल्म का काम बोलेगा न कि किसी की सफाई

नितेश तिवारी और यश का ये प्रोजेक्ट बहुत बड़ा है, इसमें कोई दोराय नहीं है. भारतीय सिनेमा को नए मुकाम पर ले जाने की सोच भी काबिले तारीफ है, लेकिन किसी एम्बिशन को बचाने के चक्कर में ऑडियंस की आवाज दबाना गलत होगा. अगर फिल्म का VFX वाकई शानदार होगा, तो जनता खुद उसकी तारीफ करेगी और पूरी दुनिया को दिखाएगी. किसी की जेब से लगे पैसे के आधार पर फिल्म अच्छी या बुरी नहीं बनती, बल्कि उसका कंटेंट सब तय करता है. ऑडियंस से सिनेमा को प्यार करने को कहें, लेकिन थिएटर के बाहर दिमाग रखकर आने की उम्मीद न करें.

 

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Ramayana
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