'कब तक पूछेंगे लड़की ने क्या पहना था?', जमुई केस के बीच कृति सेनन का फूटा गुस्सा; कहा-मर्दों को क्यों नहीं सिखाते?
जमुई केस को लेकर जारी विवाद के बीच एक्ट्रेस कृति सेनन ने सोशल मीडिया पर रिएक्शन दिया है. उन्होंने पितृसत्तात्मक का जिक्र करते हुए महिलाओं के प्रति सोच और समाज में मौजूद दोहरे रवैये पर सवाल उठाए. कृति का बयान चर्चा में है.
बॉलीवुड एक्ट्रेस कृति सेनन ने जमुई मामले को लेकर जारी गुस्से और बहस के बीच जेंडर इनइक्वैलिटी पर अपनी बात रखी है. एक्ट्रेस ने साफ किया कि यह मुद्दा 'पुरुष बनाम महिला' की लड़ाई नहीं है. उनके मुताबिक असली समस्या समाज में गहराई तक जड़ जमा चुकी पितृसत्तात्मक सोच है. एक्ट्रेस ने पितृसत्तात्मक और महिलाओं को कमतर समझने वाली मानसिकता रखने वाले पुरुषों पर भी सवाल उठाए.
उन्होंने कहा कि बहस को महिला और पुरुष के बीच बांटने के बजाय उन लोगों पर ध्यान देना चाहिए, जो ऐसी सोच और व्यवहार का बचाव करते हैं. एक्ट्रेस ने इस पूरे मुद्दे में जवाबदेही को अहम बताया. उनका कहना है कि समस्या को समझने और उसका सामना करने के लिए समाज में मौजूद लैंगिक भेदभाव और उसे बढ़ावा देने वाली मानसिकता पर बात करना जरूरी है. उनका यह पोस्ट ऐसे समय में आया है जब बिहार के जमुई में 10वीं कक्षा की एक छात्रा और उसके पुरुष सहपाठी के कथित उत्पीड़न को लेकर ऑनलाइन आक्रोश फैल गया है. हालांकि, कृति ने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर इस घटना का ज़िक्र नहीं किया.
जमुई केस के बीच कृति सेनन का फूटा गुस्सा
कृति की री-शेयर की गई पोस्ट में लिखा था, 'दोस्तों, यह पुरुषों बनाम महिलाओं की लड़ाई नहीं है.' उन्होंने आगे लिखा, 'यह लड़ाई महिलाओं बनाम पितृसत्तात्मक सोच वाले पुरुष और उन महिलाओं के बीच है, जो पितृसत्ता को एक संस्कार मानती हैं.'
कृति आगे लिखती हैं, 'आखिर कब तक महिलाओं को ही यह सिखाया जाता रहेगा कि वे खुद को यौन हिंसा से कैसे बचाएं? पुरुषों को यह क्यों नहीं सिखाया जाता कि वे महिलाओं के साथ छेड़छाड़, यौन शोषण और जबरदस्ती न करें? जब किसी नाबालिग के साथ बलात्कार होता है, तो सवाल यह क्यों नहीं पूछा जाता कि ऐसा करने वाला इंसान किस तरह की सोच रखता है? इसके बजाय आज भी लोग यही पूछते हैं कि लड़की ने क्या पहना था? वह कहां थी? किसके साथ थी? बाहर क्यों गई थी और उसके परिवार ने उसे ऐसा करने की इजाजत क्यों दी?'
बॉलीवुड एक्ट्रेस ने लिखा, 'औरतों को हर बार यह समझाना बंद कीजिए कि वे खुद को सेफ रखने के लिए ज्यादा सावधान रहें. जरूरत मर्दों को यह सिखाने की जरूरत है कि वे महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आएं और अपनी मर्यादा में रहें. लड़कों को सहमति और सम्मान का मतलब सिखाइए. उन्हें अपने व्यवहार की जिम्मेदारी लेना सिखाइए. जो पुरुष गलत व्यवहार करते हैं, उनकी गलती का बोझ महिलाओं पर डालना बंद कीजिए.'
इसके अलावा कृति ने एक और पोस्ट भी लाइक किया, जिसमें यह सवाल उठाया गया था कि महिलाओं के ख़िलाफ हिंसा पर अक्सर उतना गुस्सा क्यों नहीं आता? जितना एक्ट्रेसेस के पहनावे की आलोचना पर होता है. इंस्टाग्राम यूज़र 'सरकास्टिक मोहतरमा' के शेयर किए गए इस पोस्ट में लिखा था, 'यह बात कि किसी त्योहार के विज्ञापन में अभिनेत्री के क्लीवेज दिखाने पर जितना गुस्सा आता है, उतना रेप, घरेलू हिंसा और दहेज के कारण होने वाली मौतों पर नहीं आता. यह हमारी प्राथमिकताओं के बारे में बहुत कुछ बताता है.'
हालांकि, कृति ने अपनी सोशल मीडिया एक्टिविटी के साथ कोई बयान नहीं दिया. लेकिन इन पोस्ट्स ने लोगों का ध्यान खींचा है क्योंकि ये महिलाओं की सुरक्षा और महिला सेलिब्रिटीज की सार्वजनिक जांच-पड़ताल को लेकर फिर से शुरू हुई चर्चाओं के बीच आई हैं.
जमुई की घटना से आक्रोश
बता दें कि यह विवाद बिहार के जमुई से सामने आई एक घटना पर मचे आक्रोश के बाद हो रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 19 सितंबर को 10वीं कक्षा की एक छात्रा और उसके पुरुष क्लासमेट को कथित तौर पर कुछ युवकों के एक समूह ने रोक लिया. दोनों के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी की गई, और इस घटना का एक वीडियो भी बनाया गया जिसे बाद में सोशल मीडिया पर फैला दिया गया. वीडियो के वायरल होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और इस मामले में गिरफ्तारियां भी की गईं.
कृति ने अपनी पोस्ट में जमुई की घटना का ज़िक्र नहीं किया, लेकिन पितृसत्ता पर उनकी टिप्पणियां और उनके द्वारा पसंद की गई दूसरी पोस्ट तब सामने आईं जब इस मामले पर बड़े पैमाने पर चर्चा हो रही थी.
एक्ट्रेस एबिगेल पांडे ने भी दिया रिएक्शन
टीवी एक्ट्रेस एबिगेल पांडे ने भी कृति के एक फेस्टिव विज्ञापन से जुड़े हालिया विवाद की तुलना करते हुए इस बड़ी बहस का ज़िक्र किया. उन्होंने लिखा, 'हमारे देश में इतने सारे रेप हो रहे हैं, फिर भी कृति सेनन के विज्ञापन वाले कपड़ों पर जितना गुस्सा दिखा था, उसका आधा भी नहीं दिख रहा. या फिर पुरुषों को खुद पर काबू रखने के लिए कहने के बजाय किसी महिला को यह बताना ज़्यादा आसान है कि उसे क्या पहनना चाहिए?'