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'पंचायत' के प्रधान जी ने संभाली कहानी की कमान, तो अनीत पड्डा ने मारी जबरदस्त Hunkkaar; सना-अय्यूब ने भी छोड़ी गहरी छाप

Hunkkaar Review:'सैय्यारा' फेम एक्ट्रेस अनीत पड्डा ने अपनी शानदार एक्टिंग से साबित किया है कि उनमें स्टारडम के साथ अदाकारी की गहराई भी है. वहीं मंझे हुए कलाकार रघुबीर यादव की एक्टिंग ने इस कहानी को एक मजबूत आधार दिया. थ्रिलर, सस्पेंस और बेहतरीन परफॉर्मेंस से सजा ये शो ऑडियंस का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब हो रहा है.

Written By Jyoti Rajput
Published: Sep 26, 2026, 06:39 AM IST | Updated: Sep 26, 2026, 07:15 AM IST
Image Credit: 'हुंकार: द रोअर' रिव्यू
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रिव्यू: 'हुंकार'

रेटिंग: 4/5

निर्देशक: करण डी कपाडिया, नित्या मेहरा

कलाकार: अनीत पद्दा, फातिमा सना शेख, मोहम्मद जीशान अय्यूब, रघुबीर यादव, अर्जुन माथुर, जोया हुसैन, राम कपूर, राजेश शर्मा, चारु शंकर और सीमा बिस्वास

कई बार कुछ कलाकार अपनी मौजूदगी से पर्दे पर जगह बनाते हैं, जबकि कुछ अपनी एक्टिंग से किरदार को लोगों की याद का हिस्सा बना देते हैं. 'हुंकार' में अनीत पड्डा का परफॉर्मेंस इसी दूसरी कैटेगरी में नजर आता है. 'सैयारा' के बाद पॉपुलैरिटी हासिल कर चुकीं अनीत यहां मीनु रावत के किरदार में सिर्फ एक पॉपुलर चेहरा बनकर नहीं आतीं, बल्कि अपनी एक्टिंग की रेंज दिखाती हैं. 17 साल की स्टूडेंट के डर, असहायता, गुस्से और भीतर पल रहे साहस को उन्होंने बेहद गहराई से पेश किया है. खास बात ये है कि उनकी एक्टिंग जरूरत से ज्यादा नाटक होने के बजाय कंट्रोल में रहती है, जिससे किरदार का दर्द और भी वास्तविक महसूस होती है.

अनीत पड्डा 'हुंकार' की नई एनर्जी हैं, तो रघुबीर यादव उसके एक्सपीरियंस ढांचे की तरह नजर आते हैं. 'पंचायत' के प्रधान जी के रूप में घर-घर पहचाने जाने वाले रघुबीर यहां बिल्कुल अलग रंग में दिखाई देते हैं. सुनील चकोसी उर्फ बापजी जैसे असरदार और खुद को धर्मगुरु बताने वाले किरदार में उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका संयम है. वो हर डायलॉग को ऊंची आवाज या तेज हावभाव के सहारे प्रभावशाली बनाने की कोशिश नहीं करते. उनकी शांत निगाहें, ठहराव और बोलने का अंदाज किरदार में एक अलग तरह की बेचैनी पैदा करता है.

कहानी में कानून है, लेकिन सवाल समाज से है

'हुंकार' को केवल एक कानूनी ड्रामा मानना इसकी कहानी को सीमित कर देना होगा. सीरीज एक गंभीर आरोप से शुरू होकर धीरे-धीरे उन सामाजिक परिस्थितियों को सामने लाती है, जहां प्रभाव, आस्था और सत्ता के सामने सच बोलना आसान नहीं होता. मीनु के आरोप की जांच की जिम्मेदारी युवा आईपीएस अधिकारी एसीपी जसलीन के कंधों पर आती है, जिसका किरदार फातिमा सना शेख ने निभाया है.  उनके साथ मोहम्मद जीशान अय्यूब का किरदार न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाता है. दोनों के सामने सिर्फ कानूनी पेचीदगियां नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव और व्यवस्था में होने वाली मुश्किलें भी हैं. यही वजह है कि कहानी अदालत से बाहर निकलकर समाज के उस हिस्से तक पहुंचती है, जहां न्याय और प्रभाव के बीच लोग अक्सर स्ट्रगल करते दिखाई देते हैं.  

एक ही दर्द को बार-बार जीने की पीड़ा

सीरीज का सबसे असरदार हिस्सा वो है, जब मीनु को अपने साथ हुई घटना की कहानी बार-बार दोहरानी पड़ती है. अदालत में उसका ये एक्सपीरियंस सिर्फ एक कानूनी प्रोसेस नहीं रह जाता, बल्कि लोगों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि पीड़ित से सच साबित कराने का प्रोसेस आखिर कितनी बार वही दर्द दोहराने की मांग कर सकता है? निर्देशक करण डी कपाडिया और नित्या मेहरा इस हिस्से को सनसनीखेज बनाने के बजाय दोहराव और रिएक्शन के जरिए प्रभाव पैदा करते हैं. यौन हिंसा को सीधे और दर्दनाक सीन दिखाने के बजाय सीरीज उसके मानसिक और सामाजिक असर पर ध्यान देती है. यही संयम इसे महज चौंकाने वाली कहानी बनने से बचाता है.

रघुबीर यादव की खामोशी में छिपा असर

रघुबीर यादव की परफॉर्मेंस पर अलग से बात करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि उनका किरदार कहानी के तनाव को लगातार बनाए रखता है. ‘पंचायत’ के आसान और जमीन से जुड़े प्रधान जी की छवि से बिल्कुल अलग, यहां वो ऐसी शख्सियत का किरदार निभाते हैं जिसके आसपास प्रभाव और डर का माहौल है. उनकी एक्टिंग में एक खास ठहराव है, जो वो किरदार को समझाने के लिए हर भाव को खुलकर नहीं दिखाते हैं. कई सीन में उनका चेहरा और आवाज ही काफी लगते हैं. यही ताकत उनकी परफॉर्मेंस को दिलचस्प बनाती है. वहीं अनीत पड्डा की कच्ची लेकिन असरदार एनर्जी और रघुबीर यादव का एक्टिंग एक्सपीरियंस एक-दूसरे के बिल्कुल अलग होते हुए भी सीरीज के लिए मजबूत बैलेंस तैयार करता है.

फैसला सिर्फ अदालत का नहीं, ऑडियंस की सोच का भी

कुल मिलाकर, हुंकार की सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि ये सीरियस टॉपिक को केवल इमोशनल रिएक्शन तक लिमिटेड नहीं रखती है. कहानी कानून, आस्था, सामाजिक प्रभाव और इंसानी व्यवहार के बीच उलझे सवालों को सामने लाती है. अनीत पड्डा अपनी एक्टिंग से ये दिखाती हैं कि पॉपुलैरिटी के पीछे एक गंभीर कलाकार भी मौजूद है, जबकि रघुबीर यादव अपने सधे हुए परफॉर्मेंस से एक बार फिर अपनी एक्टिंग की क्षमता का परिचय देते हैं. वहीं फातिमा सना शेख, मोहम्मद जीशान अय्यूब और राजेश शर्मा जैसे कलाकार भी कहानी को मजबूती देते हैं. 'हुंकार' हर सवाल का आसान जवाब देने के बजाय लोगों को मुश्किल सवालों के साथ छोड़ती है और शायद इसी वजह से इसकी कहानी क्रेडिट खत्म होने के बाद भी दिमाग में बनी रहती है.
 

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About the Author

ज्योति सिंह राजपूत जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले 1 साल से ज्यादा से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. दैनिक जागरण प्रिंट और सहारा न्यूज नेटवर्क में ट्रेनिंग लेने के बाद अब Zee News में काम कर रही हैं. कुछ समय तक लाइफस्टाइल की खबरों में काम करने के बाद अब एंटरटेनमेंट में काम कर रही हैं. वहीं हॉलीवुड की खबरों और फिल्मों पर पैनी नजर रखती हैं. उन्होंने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी (MCU) से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री हासिल की है. आप Jyoti.Rajput@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं.
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