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कोई चमत्कार या रणनीति: बिना बड़े चेहरों और बजट के ‘हनुमान अंश’ और ‘मिर्जापुर’ ने कैसे काम लिए 100 करोड़? ट्रेड एक्सपर्ट ने खोल दिया राज

Hanuman Ansh and Mirzapur Movie Collection: बॉक्स ऑफिस पर बड़ा नाम ही सब कुछ नहीं होता. नीम करोली बाबा पर बनी सिर्फ 2 करोड़ की फिल्म ‘हनुमान अंश’ और ओटीटी से बड़े पर्दे पर आई ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने 100 करोड़ कमाकर तहलका मचा दिया है. ट्रेड एक्सपर्ट से जानिए कैसे बदला ऑडियंस का मिजाज.

Written By Vandana Saini
Published: Sep 09, 2026, 10:43 AM IST | Updated: Sep 09, 2026, 11:24 AM IST
Image Credit: बॉक्स ऑफिस पर छाई बिना बड़े चेहरों और बजट की दो फिल्में (स्क्रीनग्रैब AI)
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हिंदी सिनेमा में सालों से एक फॉर्मूला चला आ रहा था. अगर फिल्म में 100 करोड़ या 200 करोड़ का बिजनेस करना है, तो बड़े बजट का होना जरूरी है. उसमें तीनों खान या अक्षय कुमार जैसा कोई बड़ा सुपरस्टार का नाम शामिल था. साथ ही फिल्म के प्रमोशन में करोड़ों रुपये बहाए जाते थे, लेकिन हाल के दिनों में बॉक्स ऑफिस पर जो देखने को मिला, जिसने इस पुराने फॉर्मूले को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया. दो ऐसी फिल्में आईं, जिनके पास कोई बड़ा चेहरा, सुपरस्टार या बजट नहीं था. फिर भी दोनों ने बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ का जादुई आंकड़ा पार कर लिया.

पहली फिल्म है नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर बनी बेहद छोटे बजट में बनी ‘हनुमान अंश’. वहीं, दूसरी तरफ है ओटीटी प्लेटफॉर्म से सीधे बड़े पर्दे पर पहुंची धाकड़ फ्रेंचाइजी ‘मिर्जापुर: द मूवी’. सैकनिल्क की रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों ही फिल्मों ने 100 करोड़ क्लब में एंट्री मारकर पूरे फिल्म ट्रेड को हैरान कर दिया है. ट्रेड एनालिस्ट वेबसाइट सैकनिल्क और कोइमोई के आंकड़े भी यही गवाही दे रहे हैं कि दर्शक अब स्टार के नाम पर नहीं, बल्कि कहानी के दम पर सिनेमाघरों का रुख कर रहे हैं. सबसे बड़ी सरप्राइज हिट ‘हनुमान अंश’ रही.

बजट सिर्फ 2 करोड़ और कमाई 100 करोड़

‘हनुमान अंश’ को महज 2 करोड़ के छोटे से बजट में तैयार किया गया था. फिल्म 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. हालांकि, शुरुआत कोई भी इस फिल्म के बारे में नहीं जानता था. अमर उजाला और ईटीवी भारत की रिपोर्ट्स बताती है कि शुरुआत में इस फिल्म को बहुत ही कम स्क्रीन्स मिली थीं. पहले हफ्ते में ये फिल्म सिर्फ 1.08 करोड़ का कलेक्शन ही जुटा पाई. दूसरे हफ्ते में हालात और खराब हो गए, जब कमाई गिरकर करीब 40 लाख रुपये रह गई. कई सिनेमाघरों ने तो फिल्म के शो तक हटाने शुरू कर दिए थे, लेकिन तब किसी ने नहीं सोचा था क्या होने वाला है.

कैसे लाख रुपये कमाने वाली फिल्म ने रचा इतिहास?

खुद इस फिल्म के मेकर्स और स्टार कास्ट ने सपने में भी नहीं सोचा गोया कि ये फिल्म आगे चलकर इतिहास रचने वाली है. यहीं से शुरू हुआ असली खेल, जिसे ट्रेड की भाषा में ‘वर्ड ऑफ माउथ’ कहा जाता है. फिल्म का सबसे बड़ा हथियार बना इसका कंटेंट और आस्था. नीम करोली बाबा के जीवन के प्रसंगों और दिखाए गए चमत्कारों ने ऑडियंस के दिलों को छू लिया. सोशल मीडिया, इंस्टाग्राम रील्स, यूट्यूब रिएक्शन और व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर लोगों ने खुद-ब-खुद इस फिल्म का प्रमोशन करने लगे और देखते ही देखते तमाम सिनेमाघरों में लोगों भीड़ इस फिल्म को देखने के लिए जुटने लगी.

दर्शकों ने खुद संभाली मार्केटिंग की कमान

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां बड़े प्रोड्यूसर प्रमोशन पर 30 से 50 करोड़ फूंक देते हैं, वहीं ‘हनुमान अंश’ के लिए इसको देखने वाले दर्शकों ने खुद मार्केटिंग टीम का काम किया. तीसरे हफ्ते में फिल्म की कमाई ने अचानक रफ्तार पकड़ी और इसने करीब 10.40 करोड़ रुपये जुटा लिए. सैकनिल्क के मुताबिक, चौथे हफ्ते में फिल्म ने सीधे 61 करोड़ रुपये का रिकॉर्डतोड़ बिजनेस कर डाला. थिएटर्स मालिकों को मजबूरन शो बढ़ाने पड़े और रात-रात के शोज हाउसफुल जाने लगे. फिल्म ने अपने 5वें वीकेंड में ताबड़तोड़ कमाई करते हुए 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर दिखाया.

‘मिर्जापुर’ ने भी 3 दिमों में काम लिए 100 करोड़

एक तरफ जहां ‘हनुमान अंश’ को 100 करोड़ तक पहुंचने में 30 दिन का लंबा सफर तय करना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ ‘मिर्जापुर: द मूवी’ ने रिलीज होते ही बॉक्स ऑफिस पर आंधी ला दी. इस फिल्म ने देश और विदेश की कमाई मिलाकर सिर्फ 3 दिनों के ओपनिंग वीकेंड में ही 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लिया. ओटीटी पर सालों से राज करने वाले किरदारों को जब दर्शकों ने बड़े पर्दे पर देखा, तो सिनेमाघरों में सीटियां और तालियां गूंज उठीं. कमाल की बात ये है कि आज इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर 6 दिन हो चुके हैं और इसकी कमाई भी 125.90 करोड़ रुपये हो चुकी है.

ट्रेड एनालिस्ट कोमल नहाटा से खास बातचीत

इस हैरान करने वाले ट्रेंड, स्टार पावर के भविष्य और दोनों फिल्मों के बिजनेस मॉडल पर जाने-माने फिल्म क्रिटिक और ट्रेड एनालिस्ट कोमल नहाटा ने हाल ही में जी न्यूज के साथ बातचीत में खुलकर अपनी राय रखी. जब उसे पूछा गया कि ‘मिर्जापुर’ को बॉक्स ऑफिस पर 3 दिन और ‘हनुमान अंश’ को 30 दिन हो चुके हैं. दोनों ही फिल्में 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुकी हैं. एक ट्रेड एनालिस्ट के तौर पर आप इसे कैसे देखते हैं? क्या भारतीय सिनेमा में अब स्टार पावर कम हो रहा है और कंटेंट का दम बढ़ रहा है? तो इसका जवाब देते हुए उन्होंने बताया, ‘कंटेंट का पावर तो बिल्कुल बढ़ रहा है. स्टार पावर अपनी जगह हमेशा मायने रखता है, ऐसा बिल्कुल नहीं है कि स्टार्स का महत्व खत्म हो गया है, लेकिन सिर्फ स्टार्स के दम पर ही फिल्म चल जाएगी, ये बात अब पूरी तरह गलत साबित हो रही है’.

सिनेमा की दुनिया में कैसे आया ये बड़ा बदलाव?

उन्होंने कहा, ‘बिना बड़े स्टार्स के भी फिल्म बहुत बड़ी हिट हो सकती है, बशर्ते आपने पब्लिक की नब्ज सही तरीके से पकड़ ली हो और कंटेंट में कुछ नयापन परोसा हो. जब कहानी और कंटेंट दमदार होता है, तो दर्शक बड़े स्टार्स को भूलकर सीधे फिल्म से जुड़ जाते हैं और उसे अपना बना लेते हैं’. जब उनसे पूछा गया कि पहले सलमान खान, शाहरुख खान या आमिर खान जैसे बड़े स्टार्स की फिल्मों का ही बोलबाला था. अब बिना बड़े चेहरों वाली लीग से हटकर बनी फिल्में भी ताबड़तोड़ कमाई कर रही हैं. इसके पीछे क्या वजह है? तो उन्होंने बताया, ‘इसके दो बड़े कारण हैं. पहला कोविड के बाद ऑडियंस की सोच में आया बदलाव. महामारी के बाद से सिनेमा देखने का तरीका बदला है. पहले स्टार्स का एकछत्र राज था, जो अब थोड़ा बैलेंस हुआ है’.

कैसे बदली लोगों की सोच?

उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब ये कतई नहीं कि बड़े स्टार्स की फिल्में नहीं चलेंगी, बल्कि बिना स्टार्स वाली अच्छी फिल्मों की गिनती और उनकी कामयाबी का दायरा बहुत बढ़ गया है. दूसरा बड़ा कारण है वर्ल्ड सिनेमा की हर घर तक पहुंच. ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वजह से अब हर भाषा का बेहतरीन सिनेमा हमारे रिमोट के एक क्लिक पर मौजूद है. आज लोग कोरियन, स्पैनिश और मलयालम सिनेमा देख रहे हैं. वहां वे किसी कलाकार का नाम तक नहीं जानते, फिर भी सिर्फ कहानी और स्क्रीनप्ले के दम पर पूरी सीरीज देख जाते हैं. इसने ऑडियंस के देखने के नजरिए को पूरी तरह बदल दिया है’. जब उनसे पूछा गया कि इन दोनों फिल्मों का बजट काफी सीमित था, लेकिन मुनाफा बहुत बड़ा रहा. क्या बड़े स्टार्स की 100-150 करोड़ की फीस के बिना ऐसी फिल्में बनाना प्रोड्यूसर्स के लिए ज्यादा सेफ और फायदेमंद मॉडल है?

आखिर कैसे बदला बॉक्स ऑफिस पर हाल?

इसके जवाब में कोमल नहाटा ने बताया, ‘फायदेमंद तो ये मॉडल जरूर है, लेकिन इसका एक बहुत बड़ा रिस्क भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. अगर ऐसी बिना स्टार्स वाली फिल्म की कहानी में जरा भी चूक हुई, तो वो बॉक्स ऑफिस पर पानी भी नहीं मांगती. पहले ही दिन खाली थिएटर्स मिलते हैं और मेकर्स को सीधा भारी नुकसान झेलना पड़ता है. बड़े स्टार्स का कम से कम ये फायदा जरूर होता है कि वे अपने नाम के दम पर पहले दिन या पहले वीकेंड पर अच्छी-खासी भीड़ सिनेमाघरों तक खींच लाते हैं. ‘मिर्जापुर’ के पास तो अपनी एक पुरानी ब्रांड वैल्यू थी, लेकिन ‘हनुमान अंश’ की शुरुआती दो हफ्तों की हालत देखकर किसी भी प्रोड्यूसर को दिल का दौरा पड़ सकता था. कई सिनेमाघरों ने तो फिल्म के पोस्टर तक उतार दिए थे’.

क्यों बॉक्स ऑफिस पर छाई ‘मिर्जापुर’?

उन्होंने आगे कहा, ‘जब माउथ पब्लिसिटी फैली और लोगों ने कहा कि फिल्म में बहुत दम है, तब जाकर थिएटर्स में भीड़ लौटी. अगर फिल्म में कोई जाना-माना चेहरा होता, तो पहले ही दिन से लोग आते. इसलिए इस मॉडल के फायदे और नुकसान दोनों साथ चलते हैं’. जब उनसे पूछा गया कि ‘मिर्जापुर’ ने सिर्फ तीन दिनों में देश और दुनिया मिलाकर 100 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया. इतनी जबरदस्त ओपनिंग की असली वजह क्या रही? तो उन्होंने बताया, ‘इसका पूरा श्रेय ओटीटी की जबरदस्त पॉपुलैरिटी को जाता है. ‘मिर्जापुर’ पिछले कुछ सालों में भारत के घर-घर में पहचाना जाने वाला नाम बन चुका था. इसके किरदार जैसे कालीन भईया, मुन्ना भईया या गुड्डू पंडित लोगों की जुबान पर चढ़े हुए थे, जिसको लेकर लोगों के अंदर भारी एक्साइटमेंट थी’.

‘मिर्जापुर’ में किसने की दमदार एक्टिंग?

उन्होंने बताया, ‘लोग ये देखना चाहते थी क जिस भौकाल को वे मोबाइल या टीवी स्क्रीन पर देखते थे, उसे 70 एमएम के बड़े पर्दे पर डॉल्बी साउंड के साथ देखने का मजा कैसा होगा. जब लोग पहले दिन थिएटर पहुंचे, तो फिल्म उम्मीदों पर पूरी तरह खरी उतरी. जितना दर्शकों ने सोचा था, मेकर्स ने पर्दे पर उससे कहीं ज्यादा मसाला दिया. यही वजह रही कि पहले ही वीकेंड पर टिकट खिड़की पर मेला लग गया’. जब उनसे पूछा गया कि ‘मिर्जापुर’ में उनको सबसे बेहतरीन एक्टिंग किसकी लगी, जिसे देखकर दर्शक थिएटर से निकलते वक्त सबसे ज्यादा बात कर रहे हैं? तो उन्होंने बताया, ‘फिल्म में सभी कलाकारों ने जान झोंकी है, लेकिन मुझे मुन्ना भईया का किरदार निभाने वाले दिव्येंदु शर्मा, कालीन भईया बने पंकज त्रिपाठी और बब्बन यादव के रोल में रवि किशन—इन तीनों का काम सबसे ज्यादा असरदार और लाजवाब लगा. इन तीनों के सीन्स पर हॉल में जमकर तालियां बजी हैं’.

‘हनुमान अंश’ से पहले रिलीज हुई थी ये फिल्म

जब उनसे पूछा गया कि ‘हनुमान अंश’ को शुरू में थिएटर्स से हटा दिया गया था, फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि ये इतनी बड़ी ब्लॉकबस्टर बन गई, जबकि इसके लीड एक्टर को भी कोई खास नहीं पहचानता था? तो उन्होंने बताया, ‘भले ही पर्दे पर कोई बड़ा सितारा नहीं था, लेकिन ये फिल्म सीधे तौर पर लोगों की गहरी आस्था से जुड़ी हुई थी. ऐसी फिल्में जब दिल के तार छूती हैं और पर्दे पर संतों के जीवन और उनके चमत्कारों को ईमानदारी से दिखाया जाता है, तो लोग दंग रह जाते हैं. इस फिल्म का असर इतना गहरा हुआ है कि आने वाले दिनों में उत्तराखंड के कैंची धाम में बाबा के दर्शन के लिए लाखों लोगों की भारी भीड़ उमड़ने वाली है’. उन्होंने ये भी कहा, ‘मजेदार बात ये भी है कि इसी साल मई में ‘नीम करोली बाबा’ नाम से एक और फिल्म बड़े पर्दे पर आई थी. वो फिल्म बुरी तरह फ्लॉप रही थी और दर्शकों को पता भी नहीं चला कि वो कब आई और कब सिनेमाघरों से उतर गई’.

क्या खत्म हो रहा बड़े स्टार्स का स्टारडम?

साथ ही उन्होंने ये भी कहा, ‘लेकिन ‘हनुमान अंश’ का कंटेंट इतना सच्चा और मजबूत था कि ऑडियंस की जुबानी तारीफ ने इसे एक ब्लॉकबस्टर फिल्म बना दिया’. जब ट्रेड एनालिस्ट कोमल नहाटा से पूछा गया कि क्या शाहरुख, सलमान, आमिर या अक्षय कुमार जैसे सुपरस्टार्स अब सिर्फ फेस्टिवल्स की बड़ी रिलीज तक सिमट कर रह गए हैं? तो उन्होंने कहा, ‘आज के दौर में ऑडियंस की पसंद पूरी तरह से बंट चुकी है. बड़े स्टार्स का कद आज भी बड़ा है और वे जब सही कहानी के साथ आते हैं, तो 1000 करोड़ का बिजनेस भी कर सकते हैं, लेकिन अब सिर्फ स्टार के चेहरे या नाम के सहारे टिकट बिकने का दौर खत्म हो चुका है. दर्शक अब बहुत समझदार हो चुके हैं. अगर आपकी कहानी में दम है, तो दर्शक नए कलाकारों, कम बजट की फिल्मों या छोटे चेहरों को भी सिर-आंखों पर बिठाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अब किसी सुपरस्टार का रुतबा नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ कंटेंट का सिक्का चल रहा है’.

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वंदना सैनी जी न्यूज में सब ए़डिटर हैं और पिछले 11 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद 2018 में उन्होंने इंडिया न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया और पिछले 8 साल से लगातार में एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट हिंदुस्तान, पत्रिका और न्यूज 24 जैसे संस्थान के साथ काम किया और पिछले 2 साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद IGNOU से हिंदी में मास्टर्स किया. उन्हें पत्रकारिता के साथ कहानियां लिखने का भी शौक है. आप Vandana.saini@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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