थॉर के हथौड़े से भारी है ‘हनुमान जी’ की गदा: कैसे Artificial Intelligence बनने जा रहा भारतीय पौराणिक कथाओं का चेहरा; क्या है ये ‘हिस्ट्रीवर्स’ विजन?
Hanuman Gada Bigger Than Thor Hammer: मार्वल के सुपरहीरो बच्चों के फेवरेट बन चुके हैं, लेकिन अब भारत की पौराणिक गाथाएं नए रूप-रंग के साथ दुनिया के सामने पेश की जा रही है. कलेक्टिव आर्टिस्ट नेटवर्क के ग्रुप सीईओ विजय सुब्रमण्यम ने अपने एक हालिया इंटरव्यू में बताया कि कैसे वे AI की मदद से देश के गौरवशाली इतिहास को ग्लोबल स्केल पर ले जा रहे हैं.
जब टेक्नोलॉजी और क्रिएटिविटी एक साथ मिलते हैं, तो कहानियां सिर्फ कागजों या कम बजट के फ्रेम में सिमटकर नहीं रहतीं, बल्कि एक बड़ा आकार ले लेती हैं. Collective Artists Network के ग्रुप सीईओ विजय सुब्रमण्यम का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) किसी भी कहानी लिखने वाले या कलाकार को हटाने के लिए नहीं आया है. वे इसे एक ऐसे हथियार की तरह देखते हैं, जो फिल्ममेकर्स को खुलकर सोचने, तेजी से काम करने और ऐसे प्रोजेक्ट्स को हाथ में लेने की ताकत देता है, जिन्हें बनाना पहले नामुमकिन लगता था.
विजय सुब्रमण्यम ने हमेशा टैलेंट, क्रिएटर्स और नए कंटेंट को बढ़ावा दिया है. हाल ही में उन्होंने विक्रांत मैसी, वेदिका पिंटो और महिमा मकवाना जैसे कलाकारों के साथ फिल्म ‘मुसाफिर कैफे’ बनाई है, लेकिन इस समय उनका ध्यान इस बात पर है कि कैसे मॉर्डन टेक्नोलॉजी के दम पर भारत की पुरानी कहानियों, हमारे समृद्ध इतिहास और पौराणिक गाथाओं को आज की नई पीढ़ी और पूरी दुनिया तक पहुंचाया जाए. उनके विजन की लिस्ट में भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी युद्ध गाथा ‘महाभारत’ और ‘चिरंजीवी हनुमान’ जैसे प्रोजेक्ट्स शामिल हैं.
AI से कम होता है प्रोडक्शन का खर्, बढ़ता है काम का दायरा
हिंदुस्तान टाइम्स के साथ खास बातचीत में विजय ने AI के यूज, क्रिएटिव जॉब्स के फ्यूचर, भारत की संस्कृति और बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ने के पूरे प्लान पर खुलकर बात की. सिनेमा जगत में AI को लेकर चल रही बहस पर विजय का नजरिया एकदम सीधा और साफ है. वे AI को फिल्म प्रोडक्शन के लंबे इतिहास में आई नई तकनीकों की अगली कड़ी मानते हैं. उनका कहना है कि जिस तरह से एनीमेशन, VFX और अनरियल इंजन ने फिल्मों के कैनवास को बड़ा किया और बड़े लेवल के प्रोजेक्ट्स को मुमकिन बनाया, ठीक वैसा ही काम आज AI कर रहा है.
विजय ने कहा, ‘आजकल AI शब्द को लेकर काफी बातें हो रही हैं. लोगों को ये समझने की जरूरत है कि जब अनरियल इंजन आया, VFX की शुरुआत हुई या नई एनीमेशन तकनीकें सामने आईं, तो उन्होंने सबसे पहले फिल्मों के प्रोडक्शन खर्च को कम किया. इन तकनीकों ने डायरेक्टर्स को अपनी कहानियों को और बड़े तरीके से पर्दे पर उतारने की छूट दी. मामला इतना ही सीधा है. मैं AI को सिर्फ एक हथियार के रूप में देखता हूं. अगर कोई मुझसे पूछे कि इससे क्या बदल रहा है, तो मेरा जवाब होगा कि फिल्म प्रोडक्शन के बुनियादी नियम आज भी वही हैं’.
कैसे फिल्मों के लिए मदगार साबित हो रहा AI?
उन्होंने आगे कहा, ‘राइटर, डायरेक्टर, प्रोडक्शन डिजाइनर, कॉस्ट्यूम डिजाइनर, कैमरामैन और बाकी सभी डिपार्टमेंट के हेड्स आज भी अपनी जगह मौजूद हैं. चाहे आप लाइव-एक्शन फिल्म बना रहे हों या एनीमेशन, इन इंसानों की जरूरत हमेशा रहेगी. तकनीक चाहे जितनी भी आ जाए, आपको अपने काम में माहिर होना ही पड़ेगा’. उन्होंने समझाते हैं कि आज के दौर में हाइब्रिड पाइपलाइन पर काम किया जा रहा है. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हर एक चीज पूरी तरह से सिर्फ AI के भरोसे छोड़ दी गई है. 3डी मॉडल्स और VFX को आज भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
उन्हें AI पाइपलाइन के जरिए प्रोसेस किया जाता है. मोशन कैप्चर, इमेज ट्रांसफर और चेहरों के इमोशन ट्रांसफर जैसी चीजें अब बड़े स्तर पर इसलिए हो पा रही हैं, क्योंकि तकनीक ने इन्हें किफायती बना दिया है. विजय अपनी बात रखते हुए कहते हैं, ‘अगर मुझे ‘महाभारत’ बनानी हो, उसकी ओरिजनलिटी के साथ न्याय करना हो और उसे ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ के लेवल पर दिखाना हो, तो नॉर्मल तरीके से इस पर 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा और इसे बनाने में 7-8 साल का लंबा वक्त लग जाएगा. इसलिए हमारे लिए ये फैसला बहुत आसान था. मैं भारत की गाथाएं सुनाना चाहता था’.
क्या AI खा जाएगा इंसानों की नौकरियां?
उन्होंने आगे कहा, ‘मैं अपने देश के इतिहास को बड़े पर्दे पर पेश करना चाहता था और वो भी उसी भव्यता के साथ जिसके वे हकदार हैं’. आज के दौर में AI से जुड़ा सबसे बड़ा डर नौकरियों को लेकर है. खास तौर पर एनीमेशन, VFX, इलस्ट्रेशन और डिजाइनिंग से जुड़े लोगों के मन में ये सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या तकनीक उनके हाथों से काम छीन लेगी? विजय ने इस डर को सिरे से खारिज कर दिया. उनका मानना है कि क्रिएटिव फील्ड में इंसानों की जगह कोई मशीन पूरी तरह नहीं ले सकती. अपनी बात को समझाने के लिए उन्होंने अपने प्रोजेक्ट्स का उदाहरण दिया.
उन्होंने बताया कि उनकी टीम में ऐसे कई लोग काम कर रहे हैं, जो इस बात का सबूत हैं कि AI सिर्फ उनकी मदद कर रहा है, उन्हें बाहर नहीं कर रहा. विजय कहते हैं, ‘मेरी टीम में ऐसे इंजीनियर्स हैं जो क्रिएटिव फील्ड में योगदान दे रहे हैं. हमारे साथ VFX सुपरवाइजर, स्केच आर्टिस्ट और स्टोरीबोर्ड आर्टिस्ट कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं. नौकरी जाने की बातों को जरूरत से ज्यादा तूल दिया जा रहा है. हो सकता है कि दूसरे सेक्टर्स में जहां रूटीन काम होता है, वहां कुछ नौकरियां प्रभावित हों, लेकिन आर्ट और क्रिएटिविटी की दुनिया में AI इंसान की सोच को सिर्फ और सिर्फ निखारने का काम कर रहा है’.
लोगों की सीच को निखार रहा AI
उन्होंने आगे कहा, ‘मेरे प्रोजेक्ट्स पर तीन-तीन नेशनल अवॉर्ड विनर डायरेक्टर काम कर रहे हैं. अगर टेक्नोलॉजी इंसानों को हटा रही होती, तो इतने बड़े कलाकार इसके साथ क्यों जुड़ते? मुझे लगता है कि क्रिएटिव फील्ड में नौकरियों के खत्म होने का हौव्वा बेवजह खड़ा किया गया है’. मीडिया और कंटेंट की दुनिया में आज एक ही इंसान से कई तरह के काम करने की उम्मीद की जा रही है. लिखने से लेकर एडिटिंग, रिसर्च और प्रोडक्शन तक कई काम अब एक ही शख्स तकनीक के सहारे संभाल लेता है. विजय इसे किसी नई परेशानी के तौर पर नहीं, बल्कि बदलाव की तरह देखते हैं.
उनका तर्क है कि ये किसी भी दूसरे इंडस्ट्रियल बदलाव जैसा ही है. उन्होंने एक और उदाहरण देते हुए समझाया कि दुनिया भर में लाखों डाकिया काम करते थे, लेकिन जब ईमेल का दौर आया तो काम करने का तरीका पूरी तरह बदल गया. जब पेट्रोल और डीजल से चलने वाले इंजन नहीं थे, तब लोग रथ और तांगे चलाते थे. इंजन आने के बाद इंसान एक जगह से दूसरी जगह बहुत तेजी से पहुंचने लगा. आज के समय में लोगों को कोल्ड ड्रिंक की बोतल चाहिए होती है तो वे किराना दुकान जाने की बजाय दस मिनट में घर पर डिलीवरी मंगा लेते हैं. विजय का साफ कहना है कि ये सब नई तकनीक हैं.
अपने घर से मिली पौराणिक गाथाओं की AI संरचना का आइडिया
पौराणिक गाथाओं को नए कलेवर में ढालने की इंस्पिरेशन विजय को अपने घर से ही मिली. अपने दोनों बच्चों को मार्वल के सुपरहीरो से जुड़ते देखकर उनके मन में ये बात आई कि जब हमारे पास कहानियों का इतना बड़ा खजाना मौजूद है, तो हमने अपने किरदारों को उस स्तर पर क्यों नहीं खड़ा किया. विजय अपने परिवार का जिक्र करते हुए कहते हैं, ‘मेरे दो बच्चे हैं, एक 13 साल का और दूसरा 10 साल का. दोनों को मार्वल यूनिवर्स बहुत पसंद है. अभी हाल ही में मैंने उनके साथ स्पाइडर-मैन देखी. मेरा बैकग्राउंड डिफेंस से जुड़ा रहा है, इसलिए मेरे दिमाग में सीधा सवाल आता है कि जिस देश के पास लोककथाओं और समृद्ध संस्कृति की इतनी बड़ी विरासत है, वहां हम अपनी कहानियों को बार-बार और नई पीढ़ियों के सामने बड़े पैमाने पर क्यों नहीं पेश कर रहे हैं?’.
‘थॉर के हथौड़े से भी भारी है हनुमान जी की गदा...’
विजय आगे कहते हैं, ‘जब भी हम ‘रामायण’ की बात करते हैं, तो आज भी हमारे जेहन में रामानंद सागर की बनाई ‘रामायण’ ही आती है. मैं ‘हनुमान जी’ पर प्रोजेक्ट इसलिए बना रहा हूं, क्योंकि जरा सोचिए, हनुमान जी की गदा मार्वल के थॉर के हथौड़े से कहीं ज्यादा भारी और ताकतवर है. फिर हम इन गाथाओं को दुनिया के सामने उतनी ताकत से क्यों नहीं रख रहे हैं? मैं ये बात किसी धर्म के चश्मे से नहीं कह रहा हूं. हम अक्सर बाहर जाकर भारतीय खान-पान या बड़ी शादियों की बातें करते हैं, लेकिन असलियत ये है कि भारत से जो चीज पूरी दुनिया में अपनी छाप छोड़ती है, वह हमारी संस्कृति और हमारा हजारों साल पुराना इतिहास है. हमारी सभ्यता ने सदियों के हमलों और लूटपाट को झेला है और आज भी मजबूती से खड़ी है’.
उन्होंने आगे कहा, ‘रामानंद सागर के बाद इतने बड़े लेवल पर इन सभी कड़ियों को एक साथ जोड़ने की कोशिश किसी ने नहीं की. मैं बस ये देखना चाहता हूं कि आज के डिजिटल दौर में अमर चित्र कथा कैसी दिखेगी. मेरे अंदर एक गर्व करने वाला भारतीय बैठा है, जो इन कहानियों को नई रोशनी में पूरी दुनिया को दिखाना चाहता है’. विजय का मानना है कि भारतीय कहानियों की सबसे बड़ी खूबी ये है कि हमारे देश का हर बच्चा और बुजुर्ग इनके बारे में पहले से जानता है. असली चुनौती ये है कि हम इन कहानियों को पेश किस तरह से करते हैं ताकि आज के दौर का युवा इनसे सीधे जुड़ सके.
क्रिस्टोफर नोलन का दिया उदाहरण
उन्होंने क्रिस्टोफर नोलन की बैटमैन सीरीज का उदाहरण देते हुए कहा कि कहानी का मेन हिस्सा हमेशा वही रहा कि ब्रूस वेन ने बचपन में अपने माता-पिता को खो दिया था, लेकिन नोलन ने उसे एक बिल्कुल नए और यूनिक स्टाइल में दुनिया के सामने रखा. हमारे यहां भी जोधा अकबर हो, रामायण हो या महाभारत, मूल घटनाएं वही रहेंगी, फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि आप उस कहानी को आज के ऑडियंस के हिसाब से कैसे ढालते हैं. विजय का सपना है कि भारत का ‘हिस्ट्रीवर्स’ विजुअल के मामले में मार्वल की फिल्मों से किसी भी तरह कम न हो, बल्कि उनसे बेहतर दिखे.
क्या है ये ‘हिस्ट्रीवर्स’ और आगे की तैयारी?
कलेक्टिव आर्टिस्ट नेटवर्क का ‘हिस्ट्रीवर्स’ प्रोजेक्ट भारतीय इतिहास और पौराणिक किरदारों पर केंद्रित एक बहुत बड़ा प्लान है. इस पहल के तहत 8 बड़े टाइटल तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें हनुमान, कृष्ण, शिव, छत्रपति शिवाजी महाराज, मां दुर्गा, मां काली और स्वामी समर्थ जैसे महान किरदारों और शक्तियों पर कहानियां गढ़ी जाएंगी. AI की मदद से तैयार की जा रही ‘महाभारत’ सीरीज इस पूरे मिशन का पहला बड़ा कदम है. इसके साथ ही ‘चिरंजीवी हनुमान - द इटरनल’ पर भी तेजी से काम चल रहा है.
मॉर्डन टेक्नोलॉजी, डीप रिसर्च और शानदार विजुअल्स के दम पर तैयार हो रहा ये प्रोजेक्ट आने वाले दिनों में भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का चेहरा बदलने का दम रखता है. ये दिखाता है कि अगर सही सोच और मॉर्डन टूल्स का तालमेल बैठ जाए, तो हमारी सदियों पुरानी गाथाएं दुनिया भर के दर्शकों के दिलों पर राज कर सकती हैं. अब देखना ये है कि Artificial Intelligence कैसे आने वाले दिनों में भारतीय सिनेमा के साथ-साथ भारतीय पौराणिक गाथाओं में बड़ा बदलाव लाता है.