न भारी VFX, न देवी-देवताओं का भव्य संसार... फिर भी ‘हनुमान अंश’ ने मचा दिया तहलका, क्या बदल रहा है भक्ति फिल्मों का फॉर्मूला?
Hanuman Ansh: फिल्म ‘हनुमान अंश’ महज 2 करोड़ रुपये के बजट और बिना किसी बड़े स्टार के बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है. फिल्म 100 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है. फिल्म की शुरुआत बेहद धीमी रही, लेकिन तीसरे हफ्ते से दर्शकों के वर्ड ऑफ माउथ ने इसकी किस्मत बदल दी. जानिए इस चमत्कारिक सफलता की पूरी कहानी.
Hanuman Ansh: भक्ति पर फिल्म बनाना हिंदी सिनेमा में कोई नया प्रयोग नहीं है, लेकिन आमतौर पर जब बड़े पर्दे पर धार्मिक या आध्यात्मिक कहानियां आती हैं, तो उनके साथ बड़े बजट, भव्य सेट, दमदार स्टारकास्ट और वीएफएक्स की चर्चा भी जुड़ जाती है. ऐसे में करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी और बिना किसी बड़े स्टार के रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ का सफर कई सवाल खड़े करता है.
फिल्म ने करीब 10 लाख रुपये की ओपनिंग की, पहले हफ्ते में भी इसकी रफ्तार में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला, लेकिन इसके बाद कहानी अचानक बदल गई और चौथे हफ्ते फिल्म ने करीब 86 करोड़ रुपये की शानदार कमाई की. अब यह कमाई का आंकड़ा 100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.
क्या स्टार पावर से ज्यादा मजबूत होती है सच्ची कहानी?
लेकिन इस कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा बॉक्स ऑफिस का आंकड़ा नहीं, बल्कि यह है कि आखिर ऐसा क्या था जिसने दर्शकों को फिल्म से जोड़ दिया? ‘हनुमान अंश’ की कहानी आध्यात्मिक गुरु नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी भक्ति, प्रेम और सेवा की सोच से प्रेरित है. फिल्म ने किसी काल्पनिक भव्य धार्मिक संसार को खड़ा करने के बजाय एक इंसान की आध्यात्मिक यात्रा को केंद्र में रखा. यही शायद इसकी सबसे बड़ी खासियत बनी. फिल्म में कोई ऐसा सुपरस्टार नहीं था, जिसके नाम पर दर्शक पहले दिन सिनेमाघर पहुंच जाएं. लीड एक्टर शोभिनाव सतैया तो फिल्म में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे और बाद में उन्हें नीम करोली बाबा की मुख्य भूमिका मिली. यानी यहां स्टार पावर की जगह किरदार और कहानी को आगे रखा गया.
कैसे धीमी शुरुआत के बाद दर्शकों ने संभाली कमान?
7 अगस्त को बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई फिल्म ने पहले दिन सिर्फ करीब 10 लाख रुपये की कमाई की. पहले हफ्ते की कमाई करीब 1.08 करोड़ रुपये और दूसरे हफ्ते में लगभग 40 लाख रुपये रही. इस समय तक ऐसा कोई संकेत नहीं था कि फिल्म आने वाले दिनों में बॉक्स ऑफिस पर बड़ा उलटफेर करने वाली है. लेकिन तीसरे हफ्ते फिल्म ने करीब 10.40 करोड़ रुपये की कमाई कर ली और इसके बाद इसकी रफ्तार लगातार बढ़ती रही. यानी फिल्म का असली प्रमोशन रिलीज से पहले नहीं, बल्कि रिलीज के बाद दर्शकों के बीच हुआ. जिसने फिल्म देखी, उसने दूसरे व्यक्ति को इसके बारे में बताया. सोशल मीडिया पर चर्चा बढ़ी और धीरे-धीरे सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या तेजी से बढ़ने लगी.
प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने किसे दिया सफलता का श्रेय?
फिल्म की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर से जी मीडिया से बातचीत की. इस बातचीत में भी इसी बात की झलक मिलती है. उन्होंने माना कि शुरुआती दौर में टीम का मनोबल काफी नीचे चला गया था, क्योंकि फिल्म दर्शकों तक नहीं पहुंच पा रही थी. लेकिन फिर अचानक चीजें बदलने लगीं. अनुप्रिया के मुताबिक, दर्शकों और इन्फ्लुएंसर्स के वर्ड ऑफ माउथ ने फिल्म को फेनोमेनन बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. उनके शब्दों में, फिल्म का रातोंरात बदल जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था. यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज फिल्मों के प्रमोशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं. बड़े सितारों के इंटरव्यू, प्रमोशनल इवेंट्स, सोशल मीडिया कैंपेन और बड़े-बड़े पोस्टर रिलीज से पहले माहौल बनाने की कोशिश करते हैं. लेकिन ‘हनुमान अंश’ का सफर दिखाता है कि कभी-कभी दर्शक खुद किसी फिल्म के सबसे बड़े मार्केटिंग एजेंट बन सकते हैं.
क्या सीमित बजट ही बन गया फिल्म का सबसे बड़ा वरदान?
दिलचस्प बात यह है कि अनुप्रिया खुद मानती हैं कि फिल्म का सीमित बजट शायद उसके पक्ष में गया. उन्होंने कहा कि अगर फिल्म का बजट ज्यादा होता, तो संभव है कि इसका नतीजा भी अलग होता. शायद दर्शक भगवान को पर्दे पर देखने से ज्यादा आस्था को महसूस करना चाहते हैं. नीम करोली बाबा की कहानी, उनके विचार, सेवा और भक्ति को एक मानवीय नजरिए से दिखाने की कोशिश ने फिल्म को उन दर्शकों तक पहुंचाया, जो शायद किसी बड़े धार्मिक तमाशे के लिए थिएटर न जाते.
क्या बदल रहा है भक्ति फिल्मों का पारंपरिक फॉर्मूला?
‘हनुमान अंश’ की सफलता को देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि भक्ति फिल्मों का पूरा फॉर्मूला बदल गया है. लेकिन इतना जरूर है कि यह फिल्म एक संकेत देती है. दर्शक सिर्फ बड़े नाम या बड़े पर्दे का तमाशा नहीं खोज रहा. अगर कहानी उसके विश्वास, भावना या निजी अनुभव से जुड़ती है, तो वह उसे आगे बढ़ाने के लिए खुद भी तैयार है. इसीलिए ‘हनुमान अंश’ की असली कहानी 2 करोड़ से 100 करोड़ तक पहुंचने की नहीं है. असली कहानी यह है कि एक छोटी फिल्म ने पहले दर्शकों का भरोसा जीता और फिर उन्हीं दर्शकों ने उसे बड़ा बना दिया.