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‘काय को मर रही’ नहीं! ‘हनुमान अंश’ के ‘पार्बती’ गाने में लोग गा रहे ये लाइन गलत, जानें सही Lyrics

Hanuman Ansh Parvati Song: फिल्म 'हनुमान अंश' का गाना 'पार्बती' काफी तेजी से सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है. 'काय को मर रही' या 'काय को खुमर रही'? जानिए इस गाने के सही लिरिक्स, इसका सही अर्थ, ताकि आगे जब आप गाएं तो गलत शब्द नहीं, सही शब्द का इस्तेमाल करें.

Written By Kajol Gupta
Published: Sep 25, 2026, 10:04 PM IST | Updated: Sep 25, 2026, 10:33 PM IST
Image Credit: एआई फोटो
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Hanuman Ansh Parvati Song: फिल्म 'हनुमान अंश' बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त धमाल मचा रही है और इसका गाना 'पार्बती' ('जब जिद पे आ गई पार्वती') इन दिनों लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है. बच्चे से लेकर बड़े तक इस ब्यूटीफुल गाने की फेमस लाइनों को गुनगुना रहे हैं. हालांकि, इस गाने की एक लाइन के एक शब्द को लेकर लोगों के बीच काफी कन्फ्यूजन बना हुआ है और बहुत से लोग इसे गलत गा रहे हैं.

क्या हैं इस गाने के सही लिरिक्स?

दरअसल, बड़ी संख्या में लोग गाने की लाइन 'काय जिद कर रही, काय को मर रही' गा रहे हैं. जबकि इसके सही और असली लिरिक्स 'काय जिद कर रही, काय को खुमर-रही, ऐसे वर के लाने' हैं. सोशल मीडिया रील्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए गाना तेजी से लोकप्रिय होने की वजह से कई लोगों ने इसे सुनने के हिसाब से गलत समझ लिया और वह गलत वर्जन आगे शेयर होने लगा.

पीएम मोदी क्यों गुनगुनाते यह गाना?

इस गाने की चर्चा ऐसे समय में और बढ़ गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसे गुनगुनाते नजर आए. पीएम मोदी 25 सितंबर को दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय पार्क में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती पर आयोजित 'भजन क्लबिंग' कार्यक्रम में शामिल हुए थे. इस दौरान वे युवाओं के साथ बैठकर हाथों में खंजरी थामे गुजराती और हिंदी भजनों की धुन पर झूमते दिखे और उन्होंने 'पार्वती' गाना भी गुनगुनाया.

क्या है 'खुमर रही' शब्द का असली मतलब?

दरअसल, बता दें कि 'खुमर रही' एक बुंदेली भाषा का शब्द है. बुंदेलखंडी लोक बोली में 'खुमर रही' शब्द का भाव बहुत ही गहरा और प्यारा है. गाने के पूरे संदर्भ में इसका साफ भाव भी स्पष्ट होता है. गाने में जब ऋषि माता पार्वती को समझाने पहुंचते हैं, तो वे भगवान शिव के गले में सांप, सिर पर गंगा और उनके वैरागी रूप का वर्णन करते हैं. वे पार्वती जी से सवाल करते हैं कि वे ऐसे अवधूत वर को चुनने के लिए इतनी जिद क्यों कर रही हैं. 'खुमर रही' शब्द का मतलब तीव्र चाह और जिद होता है.

क्यों एक शब्द से बदल जाता है गाने का अर्थ?

'खुमर रही' को अगर कोई गलती से 'को मर रही' सुनता या लिखता है, तो पूरी लाइन का अर्थ अलग नजर आने लगता है. वहीं, मूल लिरिक्स में इस्तेमाल हुआ लोकभाषा का यह देसी शब्द गीत को उसके पारंपरिक और प्रामाणिक रंग से जोड़ता है. फिल्म 'हनुमान अंश' का यह गाना भक्ति, लोक संस्कृति और सिनेमाई संगीत का एक बेहतरीन संगम है.

यहां देखें पूरे गाने के बोल-

जब जिद पे आ गई पार्वती पार्वती पार्वती
समझाने पहुंचे सप्तऋषि सप्तऋषि सप्तऋषि

काय जिद कर रही, काय खुमर रही
काय जिद कर रही, काय खुमर रही
ऐसे वर के लाने,

काय जिद कर रही, 
काय खुमर रही,
ऐसे वर के लाने,

जाके सीस पे गंगा और गले में, डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में, डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

जाके सीस पे गंगा और गले में, डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहां
बस रोवत रहत लड़इया

ना खपरा ना छपरा
ना फूस की धरे मड़इया
का खावे को धरो वहां
बस रोवत रहत लड़इया

भेष धरे अवधूत फिरे
अब तुमसे का कहे बिन्नू
डोरा डांगर ले घूमें
वे इनके कछुए नइयां
वे इनके कछुए नइयां

काय जिद कर रही
काय तप कर रही
काय जिद कर रही
काय खुमर रही
ऐसे वर के लाने
हां ऐसे वर के लाने

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

शंभु.. शिव शंभु, भोलेनाथ
जटा लटा न कबहुं संवारे
दीसत महा भयंकर
मूड़ पे आधो चंदा और
बेला पे घूमे शंकर

जटा लटा न कबहुं संवारे
दीसत महा भयंकर
मूड़ पे आधो चंदा और
बेला पे घूमे शंकर

राम नाम के रसिया हैं वे
और उन्हें क्या चाहने
कामदेव के मर्दनहारी
घर-गृहस्थी क्या जाने
वे घर-गृहस्थी क्या जाने

काय जिद कर रही
काय खुमर रही
अरे काय जिद कर रही
काय तप कर रही
ऐसे वर के लाने
तेन्नू ऐसे वर के लाने

जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
जाके सीस पे गंगा और गले में
डाले फिर रहे सांप
इतने सीधे-सादे हैं
सब कहते भोलेनाथ, भोलेनाथ

भोले बम भोले
भोले बम भोले
भोले बम भोले
जय जय शिवशंभु

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About the Author

काजोल गुप्ता जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले साढ़े 3 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, बिहार-झारखंड और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद बीते 2 साल से उन्होंने जी न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया. अभी फिलहाल वह एंटरटेनमेंट बीट पर ही एक्टिव हैं. जी न्यूज से पहले उन्होंने सुदर्शन चैनल, इनखबर वेबसाइट और फ्रीलांस काम किया है. पिछले साढ़े तीन साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने मास कम्युनिकेशन में सिंघानिया यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में ही पोस्ट ग्रेजुएशन की है. पत्रकारिता के साथ उन्हें कहानियां लिखने का भी काफी शौक है. आप काजोल के साथ kajol.gupta@India.com पर या एक्स और इंस्टाग्राम हैंडल्स पर कनेक्ट कर सकते है. सीधे ईमेल पर इनसे जुड़ सकते हैं.     
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