'हनुमान अंश' के शूट से पहले क्यों बिखरी ओरिजिनल टीम? फिर नीम करोली बाबा के भक्तों ने ऐसे संभाली जिम्मेदारी
'हनुमान अंश' की शूटिंग से ठीक पहले फिल्म की ओरिजिनल टीम अलग हो गई थी. ऐसे में नीम करोली बाबा के भक्तों ने जिम्मेदारी संभाली और फिल्म को पूरा करने में अहम भूमिका निभाई.
फिल्म 'हनुमान अंश' की रिलीज से करीब आठ महीने पहले फिल्ममेकर विशाल चतुर्वेदी इस प्रोजेक्ट को बंद करने का मन बना चुके थे. इसकी सबसे बड़ी वजह थी फिल्म की टीम का धीरे-धीरे साथ छोड़ना. एक के बाद एक टीम के सदस्य बीच में ही प्रोजेक्ट से अलग होते गए. उन्हें लगने लगा था कि जितने बजट में फिल्म बनाई जानी थी, उसमें इस प्रोजेक्ट को पूरा करना संभव नहीं होगा.
मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. शूटिंग शुरू होने से ठीक एक दिन पहले फिल्म के लीड एक्टर की तबीयत अचानक काफी खराब हो गई. बताया गया कि उन्होंने 40 से ज्यादा बार उल्टियां कीं. उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हें डर लगने लगा कि कहीं उनका हेपेटाइटिस बी दोबारा न हो गया हो. इस घटना के बाद फिल्म को लेकर विशाल चतुर्वेदी की मुश्किलें और बढ़ गईं. टीम पहले ही बिखर चुकी थी और अब लीड एक्टर की तबीयत भी चिंता का कारण बन गई थी. ऐसे हालात में फिल्म को आगे बढ़ाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था.
शूट से पहले क्यों बिखरी ओरिजिनल टीम?
फिर भी, जैसा कि टीम के कई सदस्य का मनना है कि ऐसा लगा कि यह प्रोजेक्ट किसी दैवीय शक्ति से चल रहा था. ठीक जब ऐसा लगा कि यह खत्म हो गया है, तो अक्सर आखिरी समय में नीम करौली बाबा के भक्त इस प्रोजेक्ट से जुड़ने लगे. आज यह फिल्म 300 करोड़ रुपये की सफल फिल्म बन गई है. हालांकि, मुश्किलें शुरू से ही आनी शुरू हो गई थीं. लोगों ने 'हनुमान अंश' में दिलचस्पी तो दिखाई, लेकिन कोई भी इसमें पैसे लगाने को तैयार नहीं था.
कहानी तब शुरू हुई जब विशाल चतुर्वेदी ने नीम करौली बाबा पर एक किताब लिखना शुरू किया और बाद में इसे फिल्म में बदलने की इच्छा जताई. उन्होंने यह आइडिया अपनी पुरानी दोस्त नम्रता सिंह के साथ शेयर किया, जो संयोग से नीम करौली बाबा की भक्त भी थीं. इसके बाद दोनों ने रागिनी को बुलाया, जो बाबा में विश्वास रखती थीं और तीनों ने मिलकर फिल्म की घोषणा करने का फैसला किया. द इंडियन थिंग को दिए एक इंटरव्यू में विशाल ने बताया कि लोगों ने दिलचस्पी दिखानी शुरू कर दी. कई लोगों ने फ़ोन किया और उसी दौरान हमने 43 दिन का हनुमान चालीसा संकल्प लेने का फ़ैसला किया. हमने सोचा कि अगर हम कुछ इतना पवित्र शुरू करना चाहते हैं, तो हमें ऐसा करना चाहिए.'
फिर फाइनेंसर हट गए पीछे
हालांकि, जब तक संकल्प पूरा हुआ विशाल को एहसास हुआ कि जिन लोगों ने फिल्म में फाइनेंस करने में दिलचस्पी दिखाई थी. वे अचानक अब दिलचस्पी नहीं ले रहे थे. उन्होंने कहा, 'टीम बनाने के लिए पैसे बहुत जरूरी हैं. आख़िरी समय में जिस फ़ाइनेंसर पर हम बहुत ज़्यादा निर्भर थे, वह पीछे हट गया. अचानक हमारा बजट उतना ही रह गया जो हमने शुरू में तय किया था.'
इसके बाद विशाल ने नम्रता और रागिनी को बुलाया और उन्हें पूरी स्थिति समझाई. खर्च कम करने के लिए उन्होंने अपनी फीस न लेने और प्रोडक्शन की पूरी ज़िम्मेदारी खुद उठाने का फैसला किया. उन्होंने बताया, 'मैं लोकेशन की संख्या कम कर सकता हूं. हम फ्लाइट के बजाय ट्रेन से जा सकते हैं. लेकिन फिल्म तो बननी ही चाहिए. मेरे रागिनी और नम्रता के बीच एक MOU साइन हुआ. उन्होंने पैसे ट्रांसफर किए और एक टीम बनाई गई.' फिर जैसे ही लोकेशन रेकी शुरू हुई. तब भी नई-नई परेशानियां सामने आने लगीं.
एक-एक करके छोड़ने लगी ओरिजिनल टीम
उन्होंने बाते कि 'हमने एक बहुत करीबी दोस्त को फिल्म के लिए बुलाया, जो एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर काम करते हैं. जब उन्होंने बजट देखा तो तीसरे दिन ही यह कहकर चले गए कि इतने कम बजट में फिल्म बनाना नामुमकिन है. फिर कुछ दिनों बाद, एक और असिस्टेंट ने भी काम छोड़ दिया.'
लोग फिल्म से हटते जा रहे थ, क्योंकि उन्हें लगता था कि इसे बनाना नामुमकिन है. जब आस-पास के सभी लोग कह रहे थे कि यह फ़िल्म बनाना नामुमकिन है, तब विशाल चतुर्वेदी और उनकी लीड टीम एक ही सोच के साथ आगे बढ़ती रही कि मैं यह कर सकता हूं.