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ऐसे कई मामले हैं, जो अब सिर्फ केस नहीं रहे. बल्कि समय के साथ एक ऐसी कहानी बन चुके हैं. इसमें हर नया दस्तावेज, हर जांच और हर कोर्ट की सुनवाई के बाद फिर से सारे पुराने सवालों सामने आ जाते हैं. ऐसे है कुछ मामला है सुशांत सिंह राजपूत की मौत का.
बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत का शव 14 जून 2020 को मुंबई के बांद्रा स्थित उनके घर में मिला था. शुरुआती जांच में पुलिस ने मामले को आत्महत्या बताया. जबकि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ. लेकिन फिर पोस्टमार्टम हुआ, पुलिस ने जांच शुरू की और कुछ समय तक ऐसा लगा कि यह एक दुखद लेकिन सीधी मौत की जांच है. पुलिस ने सुशांत के साथ उसी घर में रहने वाले उनके क्रिएटिव मैनेजर सिद्धार्थ पीठानी, सामान लाने वाले दीपेश सावंत, दो रसोईया और चाभी बनाने वाले के साथ-साथ उनके पिता केके सिंह और दो बहनों का बयान दर्ज कर लिया है.
लेकिन फिर कहानी ने करवट ली...
इसके बाद फिर 28 जुलाई से बिहार पुलिस एक्टिव हुई. दरअसल, 25 जुलाई को सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने पटना के राजीव नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई. उन्होंने अपनी शिकायत में एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती पर बेटे को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कराया. इतना ही नहीं, यह भी आरोप लगाया कि एक्ट्रेस, उनके पिता इंद्रजीत, मां, संध्या, भाई शोविक, सुशांत की पूर्व मैनेजर श्रुति मोदी और हाउस मैनेजर रहे सैमुअल मिरांडा ने सुशांत के खाते से 15 करोड़ रुपए की हेराफेरी की.
हालांकि. इस एफआईआर की जानकारी 28 जुलाई को सार्वजानिक हुई. वो भी तब, जब पटना पुलिस की एक एसआईटी जांच के लिए मुंबई पहुंची. इसके बाद मुंबई पुलिस ने पूछताछ बंद कर दी. इसके बाद ही रिया के वकील सतीश मानशिंदे ने आनन-फानन में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और मामले को पटना से मुंबई शिफ्ट कराने की अपील की.
इस पूरे मामले में बिहार में दर्ज हुआ केस टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. इसकी वजह से मुंबई और बिहार पुलिस के बीच जांच को लेकर टकराव भी सामने आया. फिर मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा. बाद सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली. सीबीआई के आलवा इस केस में ईडी और एनसीबी भी जांच में शामिल हुई. फिर जब फॉरेंसिक रिपोर्ट सामने आई तो रिया चक्रवर्ती की गिरफ्तारी हुईं. इसे बाद ही बॉलीवुड में ड्रग्स का मामला उठा और टीवी स्टूडियो से लेकर सोशल मीडिया तक हत्या, साजिश और कई तरह की थ्योरी चलने लगी.
लेकिन आज छह साल बाद जब सीबीआई ने अपनी जांच पूरी करके क्लोजर रिपोर्ट सौंपी है, तो एजेंसी का निष्कर्ष इन तमाम चर्चाओं से काफी अलग है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इस केस में जांच के दौरान मिला क्या?किस एजेंसी ने किस एंगल की जांच की? और इसमें सबसे अहम सवाल 6 साल की लंबी जांच के बाद आज इस केस की कानूनी स्थिति क्या है? आइए समझते हैं इस केस फाइल की पूरी कहानी...
पहला दिन: जब मुंबई के एक फ्लैट से शुरू हुई कहानी
14 जून 2020, ये वही दिन है जब मुंबई के बांद्रा में सुशांत सिंह राजपूत अपने फ्लैट में मृत मिले. एक्टर के मौत की खबर कुछ ही घंटों में देशभर में फैल गई. सुशांत के नौकर ने घर में मौजूद सुशांत के स्टाफ को इस बात की जानकारी दी जिसके बाद पुलिस को बुलाया गया. पुलिस को सुशांत के घर से कोई भी सूइसाइड नोट बरामद नहीं हुआ. फिर पुलिस ने घटनास्थल की जांच की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. 15 जून को मुंबई पुलिस ने सुशांत के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया, जिसके बाद उसी दिन उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया. मुंबई पुलिस ने आत्महत्या और हत्या दोनों के एंगल से मामले की जांच शुरू की. हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सुशांत की मौत का कारण फांसी लगाकर आत्महत्या बताया गया था.
वहीं, कहानी का बड़ा मोड़ जुलाई 2020 में आया. जब सुशांत के पिता केके सिंह ने पटना में केस दर्ज कराई. इसमें रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार के सदस्यों समेत कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए. एफआईआर में आत्महत्या के लिए उकसाने से लेकर पैसों से जुड़े आरोप तक शामिल थे.
यहां से दो राज्यों की पुलिस के बीच टकराव देखने को मिला. इस केस में एक तरफ मुंबई पुलिस पहले से काम कर रही थी. फिर बिहार पुलिस ने पटना में दर्ज FIR के आधार पर अपनी जांच शुरू की. ऐसे में यहां से सवाल इससे कि सुशांत की मौत कैसे हुई से लेकर ये सवाल बन गया था कि इसकी जांच कौन करेगा? यहां मामला जब ज्यादा जटिल हो गया तो केस सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. और यहां से सीबीआई की एंट्री हुई.
यहां से सीबीआई ने कमान संभाली तो सबसे पहले घटनास्थल की दोबारा पड़ताल की. टीम ने घटनाओं री-क्रिएट भी किया. इसके घर में मौजूद लोगों से पूछताछ की गई. पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों के बयान दर्ज किए गए. सुशांत जहां ठहरे थे, उन जगहों की भी पड़ताल की गई.
सीबीआई जांच के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा फॉरेंसिक जांच को लेकर हुई. सीबीआई ने AIIMS के विशेषज्ञों की भी मदद ली. सुशांत के पोस्टमार्टम और मौजूदा मेडिकल रिकॉर्ड का भी रिव्यू किया. दरअसल, अक्टूबर 2020 में एम्स के मेडिकल बोर्ड ने अपनी मेडीको-लीगल ओपिनियन सीबीआई को दी. इसमें बोर्ड ने एक्टर के मौत को हैंगिंग और आत्महत्या बताया. साथ ही एम्स की बोर्ड ने मर्डर की आशंका को खारिज कर दिया. बोर्ड का कहना था कि शरीर पर हैंगिंग के अलावा कोई भी ऐसी चोटें नहीं है, जो जो संघर्ष की तरफ इशारा करें.
अब केस सिर्फ मौत का नहीं रहा

एक तरफ जहां मामले में सीबीआई मौत के पहलुओं को लेकर जांच कर रही थी. वहीं, दूसरी ओर बाकी और भी एजेंसियां की एंट्री हुई. जो पूरे मामले में अलग-अलग एंगल की पड़ताल में जुट चुकी थीं. सबसे पहले ईडी ने आर्थिक लेन-देन से जुड़े आरोपों की जांच शुरू की. दरअसल, एफआईआर में सुशांत सिंह के परिवार ने पैसों को लेकर सवाल उठाए गए थे. उनका आरोप था कि सुशांत के बैंक अकाउंट से बड़ी रकम गायब हुई. हालांकि, सीबीआई जांच में भी फोरेंसिक ऑडिट हुआ. लेकिन साल 2020 में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक इस ऑडिट में ऐसा संदिग्ध ट्रेल नहीं मिला. जो साबित करे कि सुशांत को आर्थिक फायदे के लिए आत्महत्या के लिए उकसाया गया था. इसके बाद आया एनसीबी का नंबर. यहां से एक बार फिर केस की कहानी ने एक अलग मोड़ ले लिया.
26 अगस्त को नारकोटिक कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया चक्रवर्ती और अन्य के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज किया. दरअसल, पिछले दिनों ईडी ने रिया चक्रवर्ती के दो फोन को क्लोन करके उससे डिलीट डाटा रिकवर किया था. इसका खुलासा एक ऐसे लेटर में हुआ, जो ईडी का आधिकारिक डॉक्यूमेंट बताया जा रहा था. क्लोनिंग के बाद रिया के चैट के रिकॉर्ड सामने आए और उसमें ड्रग्स कनेक्शन का खुलासा हुआ.
ईडी टीम ने यह डाटा सीबीआई और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो से भी शेयर किया था. फिर मामले में एनसीबी ने ड्रग पैडलर अब्दुल बासित परिहार और जैद विलात्रा को गिरफ्तार किया. वहीं से अब्दुल का कनेक्शन रिया के सहयोगी सैमुअल मिरांडा के साथ बताया गया, जो एक्ट्रेस के भाई शोविक के इशारे पर काम कर रहा था. पूछताछ में जैद से पता चला है कि वह अब्दुल बासित परिहार और सूर्यदीप मल्होत्रा के कांटेक्ट में भी था. ये दोनों शोविक के कांटेक्ट में थे. वहीं, इससे पहले 27 और 28 अगस्त को ड्रग डीलर अब्बास लखानी और करण अरोड़ा की गिरफ्तारी हुई थी. दोनों के पास से गांजा भी बरामद हुआ था.
इसी बीच सोशल मीडिया पर भी यूजर्स कई बॉलीवुड सेलेब्स के ड्रग टेस्ट की मांग उठा रहे थे. इसी दौरान एक्ट्रेस कंगना रनौत ने खुलकर रणबीर कपूर, रणवीर सिंह और विकी कौशल से ड्रग टेस्ट कराने की अपील की थी. उन्होंने यह भी दावा किया था कि अगर उन्हें पुलिस प्रोटेक्शन मिले तो वे बॉलीवुड के ड्रग्स कनेक्शन को उजागर करने में एनसीबी की मदद कर सकती हैं.
ड्रग्स एंगल: सुशांत केस से खुला दूसरा दरवाजा
एक्टर की मौत के मामले की जांच करते-करते कुछ ड्रग रिलेटेड चैट समाने आए. यही से नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एनडीपीएस से जुड़ी जांच शुरू की. इन सवालों की जांच करते हुए एनसीबी ने कई लोगों से पूछताछ की.
इसी मामले में एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती को सितंबर 2020 में एनसीबी ने गिरफ्तार किया. फिर अक्टूबर में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें बेल दे दी. इन सब के बीच सुशांत की मौत का राज, ड्रग्स और टीवी और सोशल मीडिया पर एक कहानी बन कर रह गया.
जांच और टीवी स्टूडियो के बीच की धुंध
आए दिन टीवी और सोशल मीडिया पर सुशांत केस को लेकर नए-नए दावे होने लगे. आए दिन कोई नया चैट, नया वीडियो या फिर किसी पुराने बयान का नया मतलब. यही सब टीवी पर दिखाया जाने लगा. ये सब इतना बढ़ गया कि इस कवरेज को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिकाएं भी पहुंचीं. कोर्ट में मीडिया ट्रायल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की कवरेज को लेकर सवाल उठने लगे. केंद्र ने कोर्ट के सामने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को रेग्युलेट करने के लिए पर्याप्त व्यवस्था मौजूद है. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि ये केस सिर्फ सबूतों पर नहीं. बल्कि साथ ही परसेप्शन पर भी चलने लगा.
दिशा सालियान और सुशांत सिंह की मौत का कनेक्शन

सुशांत की मौत से कुछ दिन पहले उनकी पूर्व मैनेजर दिशा की भी मौत हुई थी. दिशा और सुशांत का कनेक्शन पर्सनली नहीं, बल्कि प्रोफेशनल था. दिशा की कंपनी ने सुशांत सिंह राजपूत के लिए भी टैलेंट मैनेजमेंट का काम किया था. ऐसे में दिशा ने सुशांत के साथ काम किया था और दोनों का पेशेवर संपर्क था. दिशा की मौत 8-9 जून 2020 की रात हुई. फिर सुशांत सिंह राजपूत की मौत 14 जून 2020 को हुई. ऐसे में दिशा की मौत को सुशांत की मौत से जोड़कर सवाल उठने लगे. हालांकि, सिर्फ समय का टाइम और प्रोफेशनल रिलेशन को लेकर अपने आप दोनों मामलों के बीच कनेक्शन साबित नहीं किया जा सकता था.
साल 2020 में सुशांत मामले की जांच के दौरान भी दिशा से जुड़ा पहलू चर्चा में आया था. मौजूद रिकॉर्ड में ऐसा कोई निष्कर्ष नहीं है कि उस समय सुशांत मामले की जांच ने दिशा की मौत में कोई ऐसा लिंक था, जिससे दोनों मामलों को एक ही अपराध का हिस्सा माना जा सके. लेकिन मात्र छह दिन का यह अंतर बाद में कई तरह की अटकलों का आधार बना. हालांकि, अब 6 साल बाद साल 2026 में दिशा सालियान की कहानी ने फिर नया मोड़ लिया.
दरअसल, 2 सितंबर 2026 को बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को दिशा सालियान की मौत की जांच करने का आदेश दिया. कोर्ट ने कहा कि पुलिस की जांच लगभग छह साल तक चली और सिर्फ सेक्शन 174 CrPC के तहत हुई कार्रवाई इस मामले की परिस्थितियों में काफी नहीं थी. कोर्ट के मुताबिक, कॉग्निजेबल ऑफेंस की जांच के लिए एफआईआर दर्ज कर सब्सटेंटिव इन्वेस्टिगेशन की जरूरत थी. लेकिन कोर्ट ने एक बेहद अहम सुरक्षा भी रखी. कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को आरोपी नहीं माना जाए, जब तक जांच में उसके खिलाफ रीजनेबल सस्पिसियस के लिए काफी सबूत सामने न आए. यानी कोर्ट ने किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना.
छह साल बाद CBI की फाइल में क्या निकला?
साल 2025 में सुशांत सिंह राजपूत की मौत मामले में सीबीआई ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में फाइल की. इस रिपोर्ट में एजेंसी ने रिया चक्रवर्ती को क्लीनचीट दे दी. CBI की क्लोजर रिपोर्ट के मुख्य प्वाइंट...
साल 2025 में क्लोजर रिपोर्ट के मुताबिक सुशांत ने खुदकुशी की है. इस मामले में बॉलीवुड एक्ट्रेस रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार को पूरी तरह से क्लीनचिट दे दी. सीबीआई जांच के मुताबिक, सुशांत सिंह राजपूत ने आत्महत्या की है. जांच के मुताबिक 8 जून 2020 से 14 जून 2020 ( जिस दिन सुशांत की बॉडी बांद्रा के फ्लैट में पंखे से लटकी मिली ) के बीच कोई भी आरोपी बनाया गया शख्स सुशांत के साथ न रहता था और न इन दिनों कोई मौजूद था. वहीं, रिया और उसका भाई शौविक ने 8 जून को सुशांत का घर छोड़ दिया था. सुशांत ने शौविक से 10 जून को 1441 पर वॉट्सऐप पर बात की थी लेकिन रिया से सुशांत ने 8 से 14 जून के बीच कोई बात, चैट, कॉल नही किया. रिया या उनके परिवार से किसी तरह की सुशांत की मीटिंग के सबूत नही है. श्रुति मोदी ( सुशांत की मैनेजर ) ने सुशांत के फ्लैट पर फरवरी 2020 से जाना बंद कर दिया था, जब श्रुति को पैर में फ्रेक्चर हुआ था. इसके बाद एक्टर की की बहन मीतू सिंह 8 से 12 जून तक सुशांत के साथ रही थी. जांच में आरोपी बनाए गए किसी भी आरोपी ने सुशांत को खुदकुशी के लिए उकसाया, दबाव बनाया या धमकाया ऐसे कोई सबूत जांच एजेंसी को नही मिले है. इतना ही नहीं, सीबीआई ने जांच का फाइनेंशियल एंगल खूब खंगाला.
इसमें बताया गया कि जब रिया ने अपने भाई शौविक के साथ सुशांत का फ्लैट 8 जून को छोड़ा तो वो अपने साथ अपना एप्पल का लैपटॉप, एप्पल रिस्ट वॉच जो सुशांत ने गिफ्ट की थी वो लेकर गई थी.जांच में सुशांत की प्रॉपर्टी से सुशांत की जानकारी के बिना कोई समान ले जाने के सबूत नही मिले हैं. सुशांत रिया के साथ अप्रैल 2018 से जून 2020 तक लिव इन रिलेशनशिप में था. रिया और उनके परिवार ने सुशांत सिंह राजपूत को ना ही धमकाया या आत्महत्या के लिए मजबूर किया किया, ऐसे कोई सबूत नही मिले है. इस केस में सीबीआई ने 6 अगस्त 2020 को एफआईआर दर्ज की थी. फिर 4 साल 6 महीने 15 दिन बाद सीबीआई ने 2025 में फाइनल क्लोजर रिपोर्ट फाइल की.

क्या क्लोजर रिपोर्ट का मतलब केस खत्म?
क्लोजर रिपोर्ट का मतलब कभी भी केस का खत्म होना नहीं होता. इसका मतलब बस ये है कि जांच एजेंसी अपनी जांच पूरी करके कोर्ट के सामने रिपोर्ट रखती है. इसके बाद फिर कोर्ट मामले पर विचार करती है. अप्रैल 2025 में बांद्रा मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सीबीआई की रिपोर्ट से जुड़ी सुनवाई को सीबीआई कोर्ट में ट्रांसफर करने की इजाजत दी.
सुशांत सिंह राजपूत की बहन का दावा
हालांकि, इन सब के बावजूद सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने एक्टर के पोस्टमार्टम से जुड़ा बड़ा दावा किया है. उनका कहना है कि पोस्टमार्टम के समय सुशांत के पैर की हड्डी टूटी हुई, आंख के पास चोट के निशान थे और गले में स्टन गन के भी निशान बने हुए थे. श्वेता सिंह कीर्ति ने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से एक वीडियो जारी कर कहा, 'आप सब जानते हैं कि जो भाई के साथ हुआ वो गलत है. हमें कुछ समय पहले ही पता चला है कि भाई का पोस्टमार्टम करने वाले शख्स ने कहा है कि उस पर स्टन गन इस्तेमाल हुई थी. उसके पैर टूटे हुए थे. उस पर काफी सारा फोर्स लगाया गया था. आंखों में भी चोट आई थी.'
(आईएएनएस इनपुट)