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Explainer: ट्रोलिंग, प्राइवेसी, पैपराजी...सलमान ही नहीं, बॉलीवुड भी परेशान; काटने दौड़ रहे सोशल मीडिया कमेंट्स!

सलमान खान के ट्रोलिंग पर दिए बयान ने बॉलीवुड और सोशल मीडिया के बदलते रिश्ते पर बहस छेड़ दी है. आज सितारे फिल्मों के साथ अपने लुक, निजी जिंदगी, परिवार और हर पोस्ट को लेकर निशाने पर रहते हैं. पैपराजी और ऑनलाइन कमेंट्स ने प्राइवेसी की चुनौती बढ़ा दी है.

Explainer: ट्रोलिंग, प्राइवेसी, पैपराजी...सलमान ही नहीं, बॉलीवुड भी परेशान; काटने दौड़ रहे सोशल मीडिया कमेंट्स!
Image Credit: PC: AI

हिंदी सिनेमा में एक ऐसा भी दौर था, जब किसी फिल्म स्टार की जिंदगी का मतलब उनकी फिल्में, इंटरव्यू और कभी-कभार किसी मैगजीन की कवर तक सीमित माना जाता था. उस दौर में जब भी स्टार की नई फिल्म आने वाली होती तो उनकी चर्चा होती, इंटरव्यू आते फिर गाने और फिर फिल्म रिलीज के बाद दर्शक अपना फैसला सुना देते. लेकिन, आज के दौर में जहां सोशल मीडिया है, इस पूरी तस्वीर को बदल दिया के रख दिया है.

आज किसी स्टार की जिंदगी में खबर बनने के लिए उनकी फिल्म जरूरी नहीं है. चाहे फिर वो एयरपोर्ट लुक हो, जिम लुक हो, वजन में बदलाव, नया हेयरस्टाइल, शादी, रिलेशनशिप, फैमिली, बच्चों के साथ फोटो, इंस्टाग्राम पोस्ट या फिर किसी पुराने बयान की कोई क्लिप वायरल हो जाना. ये सब चर्चा का विषय बन जाता है.

इसी माहौल को लेकर हाल ही में सलमान खान ने 'बिग बॉस 20' के 'वीकेंड का वार' में खुलकर बात की. इस दौरान उन्होंने अपने लुक, उम्र और वजन को लेकर होने वाली ट्रोलिंग पर रिएक्शन दिया. साथ ही सवाल उठाया कि हर सामाजिक या राजनीतिक मुद्दे पर सेलिब्रिटीज से उनकी राय क्यों मांगी जाती है? इतना ही नहीं, सलमान खान ने कथित 'पेड ट्रोलिंग' और फिल्म रिव्यू के बदले पैसे दिए जाने जैसे आरोपों का भी जिक्र किया.  

भाईजान के इस को सलमान का यह बयान सिर्फ एक एक्टर की सोशल मीडिया से नाराजगी की कहानी नहीं है. इसके पीछे आज के सेलिब्रिटी कल्चर का एक बड़ा बदलाव छिपा है. लेकिन आखिर में सवाल होता है कि ऐसा क्या बदल गया कि स्टार की फिल्म से ज्यादा अब उसका चेहरा, बॉडी, पर्सनल लाइफ और सोशल मीडिया पोस्ट भी खबर बनने लगी है?

बिग बॉस में सलमान खान ने ऐसा क्या कहा?

हाल ही में 'बिग बॉस 20' के 'वीकेंड का वार' में सलमान खान ने कैमरे के सामने अपनी टोपी और जैकेट उतारी और फिर अपनी शर्ट भी उतारकर उन लोगों को जवाब दिया, जो उनके शरीर को लेकर कॉमेंट्स करते हैं. साथ ही भाईजान ने सवाल किया कि आखिर किसी दूसरे इंसान के शरीर और उम्र को लेकर इस तरह टिप्पणी करने की जरूरत क्यों महसूस होती है? उन्होंने कहा, 'किसी की सेहत या फिटनेस को लेकर चिंता जताना एक बात है, लेकिन किसी को बॉडी सेम करना गाली का विषय बना देना अलग बात है.'

साथ ही उन्होंने महिलाओं को लेकर होने वाली टिप्पणियों का भी जिक्र किया. खास तौर पर प्रेग्नेंसी के बाद बॉडी में होने वाले बदलावों को लेकर हो रही ट्रोलिंग पर भी सवाल उठाया. हाल ही में, सोशल मीडिया पर कैटरीना कैफ के पोस्ट-प्रेग्नेंसी लुक को लेकर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं. हालांकि, सलमान ने अपने बयान में उनका नाम नहीं लिया. एक्टर ने कहा कि हर एक्टर को हर मुद्दे की पूरी जानकारी हो, यह जरूरी नहीं है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी राजनीतिक विषय पर टिप्पणी नहीं करना चाहता तो उसकी इच्छा का भी सम्मान होना चाहिए.

फिर सलमान खान ने कथित 'पेड ट्रोलिंग' का भी आरोप लगाया. सलमान ने कहा था, 'उनकी टीम और फैन क्लबों को पता रहता है कि उनके खिलाफ कौन ट्रोलिंग कर रहा है.' उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग पैसे लेकर किसी को नीचा दिखाने वाली मुहिम चला सकते हैं और कुछ फिल्म रिव्यू या रेटिंग भी पैसों से प्रभावित होने का दावा किया.

सोशल मीडिया ने बदल दिया स्टार और फैन का रिश्ता

पुराने दौर में दर्शक स्टार को पहले पर्दे पर देखते थे और जैसे ही फिल्म खत्म होती स्टार की जिंदगी फिर उनकी पर्सनल लाइफ हो जाती. लेकिन आज के दौर में स्थिति अलग है. आज एक एक्टर सुबह जिम जाता है तो वहां से वीडियो आ सकता है. एयरपोर्ट पर दिखता है तो उसका लुक खबर बन जाती है. कोई स्टार किसी पार्टी में जाता है तो वहां की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पहुंच जाती हैं. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि सेलिब्रिटी की पूरी डिजिटल जिंदगी धीरे-धीरे कंटेंट में बदल गई है.

हालांकि, यह बदलाव सिर्फ बॉलीवुड तक सीमित नहीं है. बल्कि पूरी दुनिया में सोशल मीडिया ने सेलिब्रिटी और ऑडियंस के बीच फैंस और स्टार्स का कांटेक्ट बढ़ा गया है. सोशल मीडिया पर स्टार खुद अपनी तस्वीर, वीडियो, स्टोरी और अपडेट सीधे फैंस तक पहुंचा सकता है. मेटा ने भी क्रिएटर्स के लिए रील्स, स्टोरीज और दूसरे ऐसे फीचर्स भी आ रहे हैं जिनसे वे अपने दर्शकों से सीधे जुड़ सकते हैं. यहीं से क्यूरियोसिटी कई बार स्क्रूटिनी यानी छानबीन में बदल जाती है.

ट्रोलिंग और क्रिटिसिज्म में आखिर फर्क क्या है?

ट्रोलिंग और क्रिटिसिज्म में काफी फर्क है, जिसे समझना बेहद जरुरी है. हर नेगेटिव टिप्पणी को ट्रोलिंग कहना भी सही नहीं होता है. इसके लिए ऐसे समझ लीजिए, जैसे किसी दर्शक को किसी एक्टर की नई फिल्म पसंद नहीं आई. अगर कोई क्रिटिक यह लिखता है कि एक्टिंग कमजोर था या फिल्म की कहानी अच्छी नहीं लगी. यह क्रिटिसिज्म है. लेकिन फिर अगर कोई कोई दर्शक किसी स्टार के पब्लिक बयान से असहमत है और उसके तर्क पर सवाल उठाता है, तो वह भी क्रिटिसिज्म के दायरे में आ सकता है. लेकिन बात तब बदल जाती है, जब फिल्म से हटकर सीधे व्यक्ति पर हमला शुरू हो जाए. किसी के वजन का मजाक उड़ाना, उम्र को लेकर कमेंट करना, परिवार को गाली देना, बच्चों को निशाना बनाना, पर्सनल रिश्तों पर अश्लील टिप्पणी करना या किसी पुराने निजी मामले को बार-बार निकालकर अपमानित करना आलोचना से अलग व्यवहार है. लेकिन आज के दौर में आज की सबसे बड़ी प्रॉब्लम शायद यही है कि सोशल मीडिया ने इन दोनों के बीच की पतली लाइन कई बार धुंधली कर दी है.

पैपराजी कल्चर ने इस खेल को कैसे बदला?

बॉलीवुड में पैपराजी कल्चर भी कोई नई चीज नहीं है. लेकिन सोशल मीडिया ने पैपराजी की तस्वीरों और वीडियो की खपत का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. 2000 के दशक में सेलिब्रिटी स्पॉटिंग होती थी, लेकिन उसका दायरा लिमिटेड होता था. तब मैगजीन और किसी प्रोग्राम में तस्वीरें आती थीं. फिर 2010 के दशक में एयरपोर्ट, रेस्टोरेंट और इवेंट स्पॉटिंग का चलन बढ़ा. आज के दौर में कैमरा सिर्फ रेड कार्पेट तक सीमित नहीं है.

-आज पैपराजी को कंटेंट चाहिए.

-सोशल मीडिया पेज को व्यूज चाहिए.

-प्लेटफॉर्म को यूजर एंगेजमेंट चाहिए.

-दर्शक को सेलिब्रिटी की झलक चाहिए.

-और मीडिया को ऐसी कहानी चाहिए जिसे लोग क्लिक करें.

यानी यह सिर्फ पपराजी बनाम सेलिब्रिटी की कहानी नहीं है. बल्कि यह एक पूरी कंटेंट इकोनॉमी बन चुकी है.

सेलिब्रिटी की प्राइवेसी आखिर कहां खत्म होती है?

यही सबसे मुश्किल सवाल खड़ा होता है. अगर कोई सेलिब्रिटी एयरपोर्ट पर है, तो क्या उसका वीडियो बनाना सिर्फ इसलिए सही है क्योंकि वह पब्लिक प्लेस में है? या कोई स्टार अपने बच्चे के साथ बाहर निकली है, तो क्या बच्चे की तस्वीर भी उसी तरह पब्लिक कंटेंट मानी जानी चाहिए? इन सवालों का जवाब आसान नहीं है. दर्शकों का कहना होता है कि सेलिब्रिटी पब्लिक लाइफ का हिस्सा हैं. ऐसे में लोग उनकी फिल्मों, काम और जिंदगी में दिलचस्पी रखते हैं. यही उनकी पॉपुलैरिटी और करियर का भी हिस्सा भी है.

जबकि दूसरी ओर सेलिब्रिटी का कहना होता है कि पब्लिक फिगर होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी जिंदगी का हर पर्सनल पल पब्लिक संपत्ति बन जाए. सोशल मीडिया ने इस बहस को और जटिल बना दिया है. अब एक फोटो सिर्फ फोटो नहीं रहती. वह रील बन सकती है, मीम बन सकती है, हैडलाइन बन सकती है और लाखों लोगों तक पहुंच सकती है.

सोशल मीडिया ने बॉलीवुड के 'स्टार सिस्टम' को कैसे बदला?

'पेड़ ट्रोलिंग' का दावा-क्या है सच?

यह मुद्दा सोशल मीडिया की दुनिया में लंबे समय से चर्चा में रहा है. लेकिन यहां सबसे ज्यादा सावधानी की जरूरत है. किसी एक्टर का यह कहना कि उसके खिलाफ पेड़ ट्रोलिंग हो रही है, अपने आप में उस आरोप का प्रमाण नहीं है. दरअसल, सलमान खान ने हालिया 'वीकेंड का वार' में आरोप लगाया कि कुछ लोग पैसे लेकर किसी को नीचे दिखाने वाली मुहिम चला सकते हैं. उन्होंने कुछ फिल्म रिव्यू या रेटिंग को भी पैसे से प्रभावित किए जाने का दावा किया.

सेलिब्रिटीज खुद भी इस कल्चर को बढ़ावा देते हैं?

अगर इस कहानी में सिर्फ ऑडियंस और पैपराजी को ब्लेम कर दिया जाए तो तस्वीर अधूरी रह जाएगी. आज सेलिब्रिटी ब्रांडिंग का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर टिका है. इसमें इंस्टाग्राम फोटोज, रिलेशनशिप अनाउंसमेंट, प्रेगनेंसी अनाउंसमेंट, एअरपोर्ट लुक्स,  BTS वीडियो, फैमिली कंटेट, ब्रांड कोलेबरेशन, प्रमोशनल रील्स. इनमें से बहुत-सी चीजें खुद सेलिब्रिटीज या उनकी टीम पब्लिक करती हैं. दरअसल, सोशल मीडिया के जरिए उन्हें सीधे ऑडियंस मिलती है, अपनी फोटो को कंट्रोल करने का मौका भी मिलता है और फिल्मों या ब्रांड का प्रमोशन भी होता है. लेकिन यह एक सवाल भी होता है कि .अगर सेलिब्रिटी अपनी लाइफ का कुछ हिस्सा खुद पब्लिक करता है, तो उस पब्लिक स्पेस की सीमा कहां खत्म होती है? इन सवालों का जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग है. लेकिन यह भी साफ है कि सोसिला मीडिया ने पब्लिक लाइफ और प्राइवेट लाइफ के बीच की रेखा को काफी धुंधला कर दिया है.

बॉलीवुड के लिए फायदा भी है, नुकसान भी


बॉलीवुड के लिए फायदा भी है, नुकसान भी

सोशल मीडिया ने स्टार और दर्शक को करीब तो कर दिया है है. लेकिन किसी फिल्म का ट्रेलर कुछ मिनटों में करोड़ों लोगों तक पहुंच सकता है. कोई स्टार अपनी बात बिना किसी इंटरमीडियरी के रख सकता है. नए स्टार के लिए भी ऑडियंस तक पहुंचने के रास्ते बढ़े हैं. लेकिन उसी रास्ते से क्रिटिक्स और पर्सनल अटैक भी तेजी से फैलते हैं. यानी भले ही टेक्नोलॉजी ने सेलिब्रिटी को फैंस के करीब ला दिया है. वहीं, इसके उलट उसे लगातार पब्लिक छानबीन में भी रख सकती है.

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About the Author

Swati Singh

Swati Singh

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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