Drishyam 3: विजय सलगांवकर के सबसे बड़े राज होंगे बेनकाब? 'द कन्क्लूजन' में ऐसे हो सकता है कहानी का अंत
Drishyam: The Conclusion: विजय सलगांवकर की कहानी का आखिरी अध्याय हो सकती है. फिल्म में उसके सबसे बड़े राज, पुराने सबूत और अधूरे सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं. यह जानना दिलचस्प होगा कि आखिर विजय का परफेक्ट प्लान इस बार भी काम करता है या नहीं.
दृश्यम द कन्क्लूजन के ट्रेलर के साथ एक बार फिर अजय देवगन का किरदार विजय सलगांवकर सुर्खियों में है. इस बार भी वह एक नई जांच के बीच फंसा नजर आ रहा है. ट्रेलर में अजय देवगन के साथ कई नए चेहरे भी दिखाई दे रहे हैं. इनमें जयदीप अहलावत एसपी क्राइम ब्रांच राजवीर सिंह तोमर के किरदार में नजर आए हैं, जबकि प्रकाश राज की भी अहम भूमिका दिखाई दे रही है. फिल्म को हिंदी फ्रेंचाइजी की आखिरी कड़ी बताया जा रहा है. ऐसे में ट्रेलर की छोटी-छोटी डिटेल्स ने फैंस का ध्यान खींचा है. खासकर विजय सलगांवकर की पुरानी कहानी से जुड़े कुछ संकेत और विजुअल्स लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं.
ट्रेलर में 2 अक्टूबर की तारीख फिर से दिखाई देती है, जो 'दृश्यम' फ्रेंचाइजी में पहले से ही खास महत्व रखती है. इसके अलावा ट्रेलर में नजर आने वाला रहस्यमयी कब्रिस्तान भी चर्चा का विषय बना हुआ है. माना जा रहा है कि इन संकेतों का कनेक्शन विजय के पुराने राज और इस बार होने वाली जांच से हो सकता है. अब सवाल यह है कि क्या फिल्म इन सभी पुराने सुरागों को जोड़कर विजय सलगांवकर की कहानी को कोई अंतिम मोड़ देगी? फिल्म के रिलीज होने के बाद ही साफ होगा कि ट्रेलर में दिखाए गए ये संकेत कहानी के लिए कितने अहम हैं.
'दृश्यम' में 2 अक्टूबर इतनी अहम क्यों?
फिल्म बनाने वालों ने 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' की रिलीज के लिए 2 अक्टूबर, 2026 की तारीख बहुत सोच-समझकर चुनी है. पहली फिल्म से ही, विजय सलगांवकर की बहुत बारीकी से बुनी गई कहानी में यह तारीख अहम रही है. अगर पीछे मुड़कर देखें तो 'दृश्यम' में 2 अक्टूबर की रात को आईजी मीरा देशमुख के बेटे सैम की मौत विजय की बेटी अंजू के साथ हुई एक झड़प के दौरान हो गई थी. इसके बाद विजय ने 2 और 3 अक्टूबर के आस-पास एक झूठी टाइमलाइन तैयार की ताकि पुलिस को यकीन दिलाया जा सके कि जब सैम गायब हुआ था, तब उसका परिवार पणजी में था. परिवार ने उस कहानी को अच्छी तरह याद कर लिया, टिकट और बिल के जरिए उसे साबित किया और बार-बार घटना के उसी वर्शन पर अड़े रहे.
यह तारीख सिर्फ़ विजय के 'अलीबाई'का हिस्सा भर नहीं रही. यह 'दृश्यम' फ़्रैंचाइज़ी की सबसे पहचानी जाने वाली चीज़ों में से एक बन गई. डायरेक्टर अभिषेक पाठक ने 2 अक्टूबर को 'दृश्यम डे' भी कहा है. इसलिए फिल्म के आखिरी चैप्टर को इसी तारीख पर रिलीज करने का फैसला सोच-समझकर लिया गया है.
कब्रिस्तान वाला सीन: क्या इसका सैम से कोई कनेक्शन है?
नए ट्रेलर में सबसे दिलचस्प दृश्यों में से एक कब्रिस्तान का दिखना है, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या इसका उन राज़ों से कोई कनेक्शन है जिन्हें विजय ने सालों तक छिपाकर रखा है.यह फ़्रैंचाइज़ी हमेशा से लाशों, सबूतों और इस सवाल के इर्द-गिर्द घूमती रही है कि असल में सच कहां छिपा है. पहली फिल्म में विजय के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पक्का करना था कि सैम की लाश पुलिस को उसके परिवार तक न पहुंचा दे.'दृश्यम 2' में कहानी इस विचार को और आगे ले गई, जिसमें विजय ने सच को छिपाए रखने के लिए पुलिस की कार्यप्रणाली और जांच-पड़ताल की अपनी समझ का इस्तेमाल किया.
कब्रिस्तान का दृश्य भी जान-बूझकर दिखाया गया एक विज़ुअल संदर्भ हो सकता है. हालांकि, ट्रेलर में यह साफ नहीं किया गया है कि यह किसकी कब्र है, इसलिए फैंस अभी तक यही मान रहे हैं कि यह दावा करना जल्दबाजी होगी कि यह सैम की कब्र है या किसी और किरदार की. इसके बजाय, यह इस केस से जुड़े किसी नए रहस्य का संकेत हो सकता है.
विजय का सबसे बड़ा हथियार हमेशा से उसकी कहानी
एक और अहम सुराग खुद विजय है. पहली दो फिल्मों में वह पुलिस को शारीरिक ताकत से नहीं हराता. उसका सबसे बड़ा हथियार एक ऐसी कहानी गढ़ने की काबिलियत है जिस पर आसानी से यकीन किया जा सके. यह काबिलियत उसे सिनेमा के प्रति अपने लगाव से मिलती है. विजय फिल्मों का बहुत बड़ा शौकीन है. वह फ़िल्मों को ध्यान से देखता है और उनसे सीखी बातों का इस्तेमाल करके यह अंदाजा लगाता है कि जांच करने वाले किस तरह सोच सकते हैं. 2-3 अक्टूबर की घटनाक्रम वाली उसकी बहुत सोच-समझकर तैयार की गई कहानी ही पहली फिल्म में उसके बचाव का आधार बनी थी. तीसरी फिल्म में यह सवाल उठाया गया है कि क्या वही तरीका एक बार फिर काम आ सकता है.
ट्रेलर से पता चलता है कि विजय ने पिछले सात साल अपने किए कामों के नतीजों का सामना करते हुए बिताए हैं. पोस्टर पर लिखा है, 'मेरा सच, मेरा सही, सिर्फ़ मेरी फ़ैमिली है' जिससे पता चलता है कि अपने परिवार की सुरक्षा ही उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. और यही सबसे बड़ा सुराग हो सकता है. बता दें कि पहली 'दृश्यम' (2015) में पुलिस को सैम की लाश कभी नहीं मिली. जब अनु ने बताया कि उसने विजय के परिवार को सैम को दफनाते हुए देखा था, तो पुलिस ने उनके घर के पीछे बने खाद के गड्ढे की खुदाई की. लेकिन सैम के अवशेषों के बजाय उन्हें एक जानवर की लाश मिली. विजय पहले ही लाश को कहीं और हटा चुका था.
क्या हम कुछ 'ईस्टर एग्स' (छिपे हुए संकेत) मिस कर रहे हैं?
फिर फिल्म के आखिर में पता चलता है कि उसने असल में उसे कहां रखा था. विजय ने सैम की लाश को नए पुलिस स्टेशन की नींव के नीचे तब दबा दिया था, जब वह बन ही रहा था. आज के सीन में विजय रजिस्टर पर साइन करने के लिए बने-हुए पुलिस स्टेशन जाता है. जब वह बाहर निकलता है, तो फिल्म फ़्लैशबैक में चली जाती है और दिखाती है कि वह फावड़ा लेकर अधूरी इमारत से निकल रहा था, जिससे पता चलता है कि पुलिस स्टेशन सैम की लाश के ऊपर ही बनाया गया था. आखिरकार पुलिस स्टेशन की खुदाई करती है और एक कंकाल बरामद करती है. लेकिन विजय को इसका अंदाज़ा था और उसने कब्रिस्तान में कब्र खोदने वाले से किसी और आदमी के अवशेष हासिल कर लिए थे. लाश बदल दी थी ताकि पुलिस स्टेशन के नीचे मिला कंकाल सैम के DNA से मैच न करे.
अगर 'दृश्यम: द कन्क्लूज़न' सच में विजय सलगांवकर की कहानी का आखिरी हिस्सा है. तो सवाल सिर्फ़ यह नहीं होगा कि क्या वह फिर से पुलिस को बेवकूफ बना सकता है. सवाल यह भी हो सकता है कि क्या वह कहानी जो उसने इतने साल पहले बनाई थी, अब उसके आस-पास बिखरने लगी है. इस हिंदी फिल्म को आधिकारिक तौर पर कहानी का आखिरी हिस्सा बताया गया है. लेकिन मेकर्स ने यह भी कन्फ़र्म किया है कि उन्होंने मलयालम वर्शन को हूबहू कॉपी करने के बजाय कहानी और स्क्रीनप्ले में बदलाव किए हैं.