तारीख बनाम सबूत: विजय सालगांवकर ने कैसे रची ऐसी कहानी, जिसमें पुलिस भी उलझ गई? ‘दृश्यम 3’ से पहले दोनों पार्ट्स का रिकॉल
Drishyam 1 and 2 Recap: अजय देवगन की फिल्म ‘दृश्यम 3: द कन्क्लूजन’ इन दिनों सिनेमाघरों में है. अगर आप भी इसे देखने जाने का प्लान बना रहे हैं तो इससे पहले याद कर लीजिए कि पिछले दो पार्ट्स में क्या-क्या हुआ?
साल 2015 में एक ऐसी फिल्म आई, जिसमें अजय देवगन ने दर्शकों को एक अनोखी कहानी दिखाई. इसमें रोमांच के साथ-साथ परिवार को बचाने के लिए की गई जद्दोजहद भी थी. हम बात कर रहे हैं 'दृश्यम' की. इसमें अजय देवगन का किरदार साधारण से केबल ऑपरेटर विजय सालगांवकर ने अपनी समझदारी से पुलिस को ऐसा चकमा दिया कि हर कोई हैरान रह गया. फिर साल 2022 में फिल्म का दूसरा पार्ट ‘दृश्यम 2’ आया, जिसमें विजय की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गईं.
अब लगभग 9 साल बाद 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' के साथ यह कहानी का आखिरी पड़ाव आया है. ऐसे में अगर आपको पहली दोनों फिल्मों की कहानी ठीक से याद नहीं है. तो घबराइए नहीं, आज हम आपको याद दिलाएंगे कि आखिर विजय सालगांवकर और उसके परिवार के साथ क्या हुआ था.
गौर करने वाली बात यह है कि इस फिल्म में एक तरफ तारीख है, 2 अक्टूबर दूसरी और पुलिस के पास सबूत हैं. लेकिन अभी तक दोनों पार्ट में पुलिस के सबूतों को पछाड़ विजय सालगांवकर की तारीख पर बनाई पूरी कहानी ही भारी पड़ती है.
'दृश्यम' में हुआ वो हादसा, जिसने पूरी कहानी बदल दी
कहानी के नायक ‘विजय सालगांवकर’ (अजय) ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी और अब वह गोवा में अपना केबल टीवी का बिजनेस चलाता है लेकिन एक घटना जिसमें उसकी पत्नी ‘नंदिनी’ (श्रिया सरन) और बड़ी बेटी (नवोदित अभिनेत्री इशिता दत्ता) शामिल होती है, उनकी जिंदगी को बदलकर रख देती है. अब विजय का मकसद अपने चार सदस्यों के इस परिवार को हर हाल में बचाए रखना है. उसके परिवार में उसकी छोटी बेटी (मृणाल जाधव) भी शामिल है.
अंजू से गलती से पुलिस अधिकारी मीरा देशमुख के बेटे सैम की मौत हो जाती है. इसके बाद विजय अपनी बेटी और परिवार को बचाने का फैसला करता है. वह पुलिस से बचने के लिए एक ऐसी कहानी तैयार करता है, जिसे सच साबित करना आसान हो. विजय सैम की लाश को ठिकाने लगाकर उसे बन रहे नए पुलिस स्टेशन के नीचे दफना देता है.
2 अक्टूबर क्यों बनी विजय की सबसे बड़ी ढाल?
इसके बाद विजय 2 और 3 अक्टूबर को लेकर अपनी और परिवार की अलिबाई तैयार करता है. इसमें पणजी जाना, सत्संग, पाव भाजी, फिल्म देखना, होटल में रुकना जैसी चीजों को वह अपनी कहानी का हिस्सा बनाता है.
वो अपने परिवार को इस तरह तैयार करता है कि सभी लोग पुलिस के सामने एक ही कहानी बताएं. विजय ऐसा दावा करता है कि वह और उसका परिवार 2 अक्टूबर गोवा में थे ही नहीं. अपनी अलिबाई को मजबूत बनाने के लिए विजय ने होटल और दूसरी जगहों से जुड़े बिल और दूसरी चीजें भी तैयार कर ली थीं. परिवार के सभी सदस्यों को कहानी अच्छी तरह याद कराई गई थी. जिससे पूछताछ के दौरान किसी के बयान में अंतर न आए.
यहां सबूत vs तारीख
फिर आया 'दृश्यम 2' 7 साल बाद वही केस वापस
यहां फिर सात साल बाद की कहानी दिखाई जाती है. 'दृश्यम 2' में विजय और उसका परिवार सोचता है कि अब सबकुछ ठीक हो चुका है, लेकिन उनकी जिंदगी में एक बार फिर मुसीबत आती है. इस बार विजय के सामने आईजी तरुण आहलावत के रूप में नई चुनौती आती है. अक्षय खन्ना ने इस किरदार को निभाया है. तरुण क्रिमिनल साइकोलॉजी को अच्छी तरह समझता है और विजय के खिलाफ एक-एक करके सबूत जुटाने की कोशिश करता है.
ऐसे में विजय को भी अंदाजा हो गया होता है कि भविष्य में अगर सैम की लाश मिल गई तो उसके परिवार की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं. इसलिए वह पहले से ही एक प्लान तैयार करके रखता है. यहीं से फिल्म का फोकस तारीख से आगे बढ़कर सबूत पर आ जाता है.
अब सवाल 'कहां थे?' से बदलकर 'सबूत कहां है?' हो गया
'दृश्यम 2' में जांच का सबसे अहम हिस्सा यही है कि शक को सबूत में कैसे बदला जाए. यहां दिखाया जाता है कि किसी व्यक्ति के बयान पर शक करना अलग है. लेकिन कोर्ट में उस शक को साबित करना अलग. इसकी कहानी में दिखाया जाता है कि कैसे बरामद अवशेष और DNA से जुड़े सवाल जांच का हिस्सा बनते हैं. ऐसे में पुलिस के सामने एक ये भी चैलेंज है कि वह विजय की बनाई कहानी में ऐसी कड़ी खोजे, जिसे कोई लूप होल मिले और ठोस सबूत से जोड़ा जा सके.
विजय की सबसे बड़ी ताकत क्या थी-तारीख, कहानी या सबूतों की कमी?
अगर अब दोनों ही कहनियों को साथ रखकर देखें तो तो विजय की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसकी बनाई कहानी नहीं थी. उसने कहानी के साथ टाइमलाइन तैयार की और परिवार के लोगों को उसी के हिसाब से जवाब देने के लिए तैयार किया. हालांकि, सिर्फ तारीखें किसी केस को खत्म नहीं कर सकतीं. ऐसे में जांच आगे बढ़ने पर असली सवाल सबूतों का होता है. इसी लिए 'दृश्यम' की पूरी कहानी में तारीख और सबूत आमने-सामने दिखाई देते हैं. एक तरफ 2 अक्टूबर की याद है. दूसरी तरफ उस दिन असल में क्या हुआ, उसका सच है.
दृश्यम: द कन्क्लूजन' 2 अक्टूबर 2026 को रिलीज हुई है और यह विजय सालगांवकर की कहानी की अंतिम कड़ी है. अब ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ में विजय की कहानी किस मोड़ पर पहुंचेगी और क्या इस बार भी वह अपने परिवार को पुलिस से बचा पाएगा, यह फिल्म की देखने के बाद ही पता चलेगा.