द ग्रेट इंडियन म्यूजिक क्राइसिस: मंच पर बदसलूकी और डिजिटल ट्रोलिंग के दौर में क्या दम तोड़ रही आर्टिस्ट की डिग्निटी?
संगीत हमारी रूह को सुकून देता है, लेकिन कलाकारों का अपमान हम सभी को चिंता में डाल रहा है. मंच पर बदसलूकी, मिसमैनेजमेंट और सोशल मीडिया की बेतुकी ट्रोलिंग दिखाती है कि कलाकारों की गरिमा खतरे में है. एक समाज के रूप में हमें अपनी संवेदनशीलता बढ़ानी होगी.
जब भी हम म्यूजिक की बात करते हैं, तो हमारे जेहन में एक सुकून, ताल और रूहानी शांति से भरी जाती है. कई बार हमें लगता है कि स्टेज पर गाने वाला आर्टिस्ट केवल हमारे एंटरटेनमेंट के लिए है और शायद हम ये भूल जाते हैं कि वो भी एक इंसान है, जिसकी अपनी गरिमा और आत्मसम्मान है. हाल के दिनों में इंडियन म्यूजिक इंडस्ट्री से जिस तरह की तस्वीरें सामने आई हैं, वो बेहद हैरान और चिंता में डालने वाली हैं. मंच पर कलाकारों के साथ होने वाली बदसलूकी और सोशल मीडिया पर चलने वाला ट्रोलर्स का दौर ये चीख-चीख कर कह रहा है कि हमारे देश में आर्टिस्ट की डिग्निटी यानी कलाकारों का सम्मान आज एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है.
संगीत के इस गिरते हुए लेवल की सबसे बड़ी मिसाल हाल ही में पंजाबी पॉप किंग दलेर मेहंदी के साथ हुए वाकये से मिलती है. एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान मंच पर जिस तरह से उनके साथ बदसलूकी की गई, उसने पूरे देश के म्यूजिक लवर्स को झकझोर कर रख दिया था. एक ऐसा कलाकार जिसने सालों तक देश और दुनिया में अपनी एनर्जी से लोगों को एंटरटेन किया, उसे मंच पर अपमान का सामना करना पड़ा.
मीका ने दिया भाई का साथ, मंत्री ने मांगी माफी
दलेर मेहंदी के साथ हुई इस घटना के बाद उनके भाई और फेमस सिंगर मीका सिंह ने खुलकर उनका समर्थन किया और इस बेरुखी के खिलाफ अपनी आवाज उठाई. वो लगातार सोशल मीडिया पर सभी गायकों से इस मुद्दे पर समर्थन मांगते रहे और उत्तराखंड के सीएम से बातचीत की. इस मामले ने इतना तूल पकड़ा कि बाद में मंत्री जी ने खुद सामने से आकर दलेर जी से मांफी मांगी. ये घटना साफ दिखाती है कि अब मंच पर कलाकारों की इज्जत कितनी सुरक्षित रह गई है.
शिल्पा राव के शो में अव्यवस्था और अफरा-तफरी
मंच पर कलाकारों के अपमान की कहानी सिर्फ दलेर मेहंदी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है. अपनी मखमली और सुरीली आवाज से लाखों दिलों पर राज करने वाली मशहूर गायिका शिल्पा राव के शोज में जिस तरह की अव्यवस्था देखने को मिली, वो भी इसी बात का सबूत है. जब मुंबई में कॉन्सर्ट्स के दौरान मैनेजमेंट का ढीला रवैया और मिसमैनेजमेंट सामने आया, तो सीधे तौर पर परफार्म कर रहे कलाकार की सुरक्षा और गरिमा दांव पर लगा दिया.
अन्नू कपूर और उनकी बेटी को किया ट्रोल
मंच से बाहर निकलकर अगर हम डिजिटल दुनिया की बात करें, तो वहां हालात और भी ज्यादा खराब हो चुके हैं. दिग्गज सिंगर अन्नू कपूर और उनकी बेटी को हाल ही उसी मुंबई इवेंट के दौरान ज्यादा समय लेने के आरोप में सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल किया गया, जिसमें शिल्पा राव का समय काटा गया था. डिजिटल ट्रोलिंग का ये दौर अब किसी भी बात को राई का पहाड़ बनाने में जरा भी देर नहीं लगाता. लोग स्क्रीन के पीछे बैठकर बिना पूरी सच्चाई जाने किसी भी कलाकार की मेहनत, उसके एक्सपीरियंस और उसकी निजी जिंदगी पर कीचड़ उछालने लगते हैं.
अन्नू कपूर जैसे सीनियर और एक्सपीरियंस कलाकार को भी जब इस तरह की ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है, तो ये सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आज के डिजिटल एरा में बड़ों और कलाकारों के सम्मान की कोई कीमत नहीं बची है?. सोशल मीडिया पर लोगों ने शिल्पा राव की परफॉर्मेंस को कट करने के पीछे की वजह अन्नू मलिक की बेटी को ठहराया, जिन्होंने अपनी परफॉर्मेंस के लिए तय समय से कुछ मिनट ज्यादा ले लिए.
जब कलाकार को महज 'तमाशा' समझा
इन तमाम घटनाओं को अगर एक साथ जोड़कर देखा जाए, तो एक बहुत ही कड़वी सच्चाई सामने आती है. आज इवेंट प्लानर, मंच पर मौजूद नेता, और सोशल मीडिया के ट्रोलर्स मिलकर कलाकारों को सिर्फ एक ऐसी चीज या मशीन समझने लगे हैं, जो बटन दबाते ही मनोरंजन परोसने के लिए रेडी हो जाएंगे. उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उस कलाकार की अपनी कोई मेंटल कॉन्डिशन है या मंच पर उसकी सुरक्षा और सम्मान का क्या हाल है.
डिग्निटी बचाने की जिम्मेदारी
आखिर में यही कहा जा सकता है कि अगर हमने समय रहते इस तरह की चीजों को नहीं बदला, तो आने वाले समय में हमारे महान कलाकार इस तरह के मंचों पर जाने से कतराने लगेंगे. म्यूजिक हमें जोड़ना सिखाता है, न कि किसी की कला का अपमान करना. दलेर मेहंदी के साथ हुई बदसलूकी से लेकर शिल्पा राव के शोज की अव्यवस्था और अन्नू कपूर की ट्रोलिंग जैसी घटनाएं हमें चेतावनी दे रही हैं कि हमें एक ऑडियंस और समाज के रूप में अधिक संवेदनशील बनना होगा.