CBFC का नया फरमान: अधूरी फिल्मों को नहीं मिलेगी मंजूरी, रिलीज डेट की जल्दबाजी भी बेकार; सर्टिफिकेशन के लिए बदले नियम
CBFC ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन को लेकर नए निर्देश जारी किए हैं. अब अधूरी फिल्में मंजूरी के लिए जमा नहीं की जा सकेंगी. साथ ही, रिलीज डेट नजदीक होने का हवाला देकर सर्टिफिकेट जल्दी पाने की सुविधा भी नहीं मिलेगी. नए नियमों से फिल्ममेकर्स की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने अपनी फिल्मों के लिए प्रमाणन चाहने वाले फिल्ममेकर्स के लिए नई गाइडलाइंस जारी की हैं. एक नई एडवाइजरी में बोर्ड ने पांच अहम शर्तें बताई हैं. इनमें यह भी शामिल है कि पहले से घोषित रिलीज की तारीखों के आधार पर सर्टिफिकेशन प्रोसेस को जल्दी नहीं किया जाएगा. ना ही अधूरी फिल्मों को जांच के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा. यह एडवाइजरी उन सभी आवेदकों के लिए है जो सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 और सिनेमैटोग्राफ नियम 2024 के तहत सर्टिफिकेशन लेना चाहते हैं.
यह एडवाइजरी 26 अक्टूबर 2026 को जारी की गई थी और इस पर CBFC के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेंद्र सिंह के हस्ताक्षर थे. इसमें फिल्म निर्माताओं से कहा गया है कि वे अपनी फिल्मों को रिलीज से ठीक पहले सर्टिफाई कराने की जल्दबाजी करने के बजाय पहले से ही प्लानिंग बना लें.
नई गाइडलाइंस के मुताबिक, जांच और सर्टिफिकेशन के लिए जमा की जाने वाली फिल्में हर तरह से पूरी और फाइनल रूप में होनी चाहिए. इसमें फाइनल ग्राफिक्स, बैकग्राउंड स्कोर, साउंड मिक्स और सिनेमाघरों में दिखाए जाने के लिए जरूरी सभी एक्सेसिबिलिटी फीचर्स शामिल होने चाहिए.
सर्टिफिकेशन के लिए बदले नियम
CBFC ने कहा है कि फिल्म निर्माताओं को सर्टिफिकेशन के लिए अपनी फिल्मों का फाइनल वर्जन जमा करना होगा. इसका मतलब है कि सब कुछ तैयार होना चाहिए, जिसमें ग्राफिक्स, बैकग्राउंड म्यूजिक, गाने और एक्सेसिबिलिटी फीचर्स शामिल हैं. फिल्म निर्माता अधूरी फिल्में, जिनमें ग्राफिक अभी ना लगे होंया कुछ हिस्से अभी रेडी ना हों. ऐसी फिल्मों को जमा करके यह उम्मीद नहीं कर सकते कि बोर्ड उनके आवेदनों पर काम करेगा. ऐसी फिल्मों के सबमिशन में देरी हो सकती है या उन्हें रिजेक्ट भी किया जा सकता है.
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बोर्ड ने फिल्ममेकर्स को यह भी चेतावनी दी है कि वे पहले से फाइनल टाइटल्स को केवल इसलिए फाइनल या मंजूर न मान लें, क्योंकि उन्हें सर्टिफिकेशन के लिए जमा किया गया है. आवेदन करने वालों को इस बात के लिए भी तैयार रहना चाहिए कि फिल्म का टाइटल बदलना पड़ सकता है.
CBFC का फिल्ममेकर्स को नया फरमान
बोर्ड ने यह भी साफ किया है कि किसी आवेदन को आधिकारिक तौर पर तभी प्राप्त माना जाएगा, जब वह पूरी तरह से पूर्ण हो. इसलिए अधूरी फिल्म को जल्दी भेज देने से फिल्म निर्माताओं को प्रमाणन प्रक्रिया में कोई फायदा नहीं मिलेगा. क्या मेकर्स ने अपनी फिल्मों के नाम पहले ही तय कर दिए हैं? खैर, इसका मतलब यह नहीं है कि ये नाम फाइनल हैं! नई एडवाइजरी के अनुसार, CBFC फिल्म के टाइटल की समीक्षा कर सकता है और उसमें बदलाव के लिए भी कह सकता है. यह नियम उन टाइटल पर भी लागू होता है जिनका इस्तेमाल प्रचार (प्रमोशन) में किया गया है, और उन पर भी जो प्रमाणन आवेदनों में दिए गए हैं.
CBFC का उन फिल्म निर्माताओं के लिए एक और अहम मैसेज है, जो महीनों पहले ही अपनी फिल्म की रिलीज तारीख की घोषणा कर देते हैं. बोर्ड का कहना है कि सिर्फ इसलिए कि किसी फिल्म की रिलीज तारीख तय है, वह अपनी प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) प्रक्रिया में न तो तेजी लाएगा और न ही उसमें कोई बदलाव करेगा. हर फिल्म को नियमित जांच और समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा. जांच और समीक्षा समितियां कानून के तहत तय समय-सीमा और नियमों का ही पालन करेंगी.
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साथ ही CBFC ने आवेदकों से सहयोग करने और दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है, ताकि बोर्ड अपने कानूनी कार्यों को सुचारू रूप से पूरा कर सके. यह सलाह सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा CBFC का पुनर्गठन करने और तीन साल के कार्यकाल के लिए 18 सदस्यों को नियुक्त करने के लगभग दो महीने बाद आई है. नए बोर्ड में पंकज त्रिपाठी, प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी, प्रसेनजीत चटर्जी, प्रियदर्शन, रिकी केज, रूपाली गांगुली, पल्लवी जोशी, मनोज जोशी, विनोद अनुपम और अभिषेक जैन जैसे कलाकार शामिल हैं. इस बोर्ड के अध्यक्ष शशि शेखर वेम्पति हैं.